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Budaun News: फिर दरका खंभा.. निर्माणाधीन कोविड हाल की बार-बार मरम्मत पर उठे सवाल
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उझानी अस्पताल परिसर में दरके पिलर को देखता राजमिस्त्री। संवाद
- फोटो : BADAUN
उझानी (बदायूं)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) परिसर में निर्माणाधीन कोविड हाल के आठ में से एक खंभे पर संकट बना हुआ है। पिछले दिनों उसे बंदर ने झकझोरा तो वह गिर पड़ा था। राजमिस्त्री ने मरम्मत कर उसे सीधा कर दिया, लेकिन सोमवार को यह खंभा फिर से दरक गया।
अस्पताल में कोविड हाल का निर्माण करीब दो महीना पहले शुरू हुआ है। करीब 25 लाख रुपये की लागत से निर्माणाधीन हाल में कुल आठ पिलर लगे हैं। इनमें शौचालय की छोरवाला पिलर चार दिन पहले बंदर के झकझोर देने पर ही गिर पड़ा था। मामला चिकित्साधीक्षक राजकुमार गंगवार समेत स्थानीय कर्मचारियों के संज्ञान में आया तो उन्होंने राजमिस्त्री से गुणवत्ता को लेकर शिकायत की। उसी दिन शाम को पिलर सीधा कर दिया गया।
वह फिर से क्षतिग्रस्त नहीं हो, इसलिए पिलर की मरम्मत कर पास में चिनाई भी कर दी गई। रविवार दोपहर में पिलर को ऊंचाई तक ले जाने के लिए फिर से भरा गया। सोमवार को राजमिस्त्री ने आसपास से ईंटें हटाईं तो पिलर का कुछ हिस्सा दरक गया। बताते हैं कि पिलर की बार-बार मरम्मत की जा रही है। नियमानुसार उसे नींव से बनाया जाना था, लेकिन डीपीसी से निर्माण शुरू करके उसकी मजबूती पर सवाल खड़े हो रहे हैं। बता दें कि चिकित्साधीक्षक की ओर से इसे लेकर विभागीय अफसरों को भी अवगत कराया जा चुका है।
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प्रोजेक्ट इंजीनियर के संज्ञान में है पूरा मामला
पिलर के बार-बार जवाब दे जाने को लेकर राजमिस्त्री से लेकर मजूदरों से बात की गई तो उन्होंने कार्यदायी संस्था के कारिंदों से जानकारी करने की सलाह दी। बताया कि कंपनी के प्रोजेक्ट इंजीनियर को पिलर के बारे में अवगत कराया जा चुका है। कंपनी के कारिंदों के कहने पर ही पिलर की मरम्मत की गई है। कोविड हाल का निर्माण राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत कराया जा रहा है।
इस संबंध में जानकारी नहीं है। एनएचएम के तहत जिले में कई निर्माण चल रहे हैं। गुणवत्ता से किसी तरह की छेड़छाड़ अगर की जाती है तो संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उझानी सीएचसी में चल रहे निर्माण की जांच कराई जाएगी। -डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ
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अस्पताल में कोविड हाल का निर्माण करीब दो महीना पहले शुरू हुआ है। करीब 25 लाख रुपये की लागत से निर्माणाधीन हाल में कुल आठ पिलर लगे हैं। इनमें शौचालय की छोरवाला पिलर चार दिन पहले बंदर के झकझोर देने पर ही गिर पड़ा था। मामला चिकित्साधीक्षक राजकुमार गंगवार समेत स्थानीय कर्मचारियों के संज्ञान में आया तो उन्होंने राजमिस्त्री से गुणवत्ता को लेकर शिकायत की। उसी दिन शाम को पिलर सीधा कर दिया गया।
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वह फिर से क्षतिग्रस्त नहीं हो, इसलिए पिलर की मरम्मत कर पास में चिनाई भी कर दी गई। रविवार दोपहर में पिलर को ऊंचाई तक ले जाने के लिए फिर से भरा गया। सोमवार को राजमिस्त्री ने आसपास से ईंटें हटाईं तो पिलर का कुछ हिस्सा दरक गया। बताते हैं कि पिलर की बार-बार मरम्मत की जा रही है। नियमानुसार उसे नींव से बनाया जाना था, लेकिन डीपीसी से निर्माण शुरू करके उसकी मजबूती पर सवाल खड़े हो रहे हैं। बता दें कि चिकित्साधीक्षक की ओर से इसे लेकर विभागीय अफसरों को भी अवगत कराया जा चुका है।
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प्रोजेक्ट इंजीनियर के संज्ञान में है पूरा मामला
पिलर के बार-बार जवाब दे जाने को लेकर राजमिस्त्री से लेकर मजूदरों से बात की गई तो उन्होंने कार्यदायी संस्था के कारिंदों से जानकारी करने की सलाह दी। बताया कि कंपनी के प्रोजेक्ट इंजीनियर को पिलर के बारे में अवगत कराया जा चुका है। कंपनी के कारिंदों के कहने पर ही पिलर की मरम्मत की गई है। कोविड हाल का निर्माण राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत कराया जा रहा है।
इस संबंध में जानकारी नहीं है। एनएचएम के तहत जिले में कई निर्माण चल रहे हैं। गुणवत्ता से किसी तरह की छेड़छाड़ अगर की जाती है तो संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उझानी सीएचसी में चल रहे निर्माण की जांच कराई जाएगी। -डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ