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Budaun News: एडीपीआरओ ने की प्रधान पर लगे आरोपों की जांच
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उझानी संजरपुर बालजीत गांव में जांच को पहुंचे एडीपीआरओ। स्रोत: जागरूक ग्रामीण
उझानी। ब्लॉक क्षेत्र के गांव संजरपुर बालजीत के प्रधान पर भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच शुरू हो गई है। अपर जिला पंचायती राज अधिकारी गिरीश कुमार ने तालाब के पास गलियारे में जलभराव देख प्रधान का पक्ष जाना और ग्रामीणों से भी जानकारी की।
संजरपुर बालजीत निवासी वीरेंद्र सिंह पुत्र भूदेव ने विकास कार्यों में घोटाले का आरोप लगाते हुए आठ बिंदुओं पर शिकायत डीएम से की थी। डीएम ने जांच के लिए डीपीआरओ को निर्देशित किया था। इसके तहत अपर जिला पंचायती राज अधिकारी गिरीश कुमार बृहस्पतिवार दोपहर गांव पहुंचे। उन्होंने गांव का मौका मुआयना करने के बाद पंचायत घर में प्रधान अरविंद उपाध्याय का पक्ष सुना। शिकायतकर्ता वीरेंद्र सिंह को भी बुलवाया गया, लेकिन उन्होंने पंचायत घर परिसर में पहुंचने के बजाय मौके पर जांच करने की बात कहकर वहां पहुंचने से मना कर दिया। इसके बाद अपर जिला पंचायती राज अधिकारी ने उन्हें अलग बुलाकर पक्ष सुना।
करीब दो- तीन घंटे तक जांच करने के बाद उन्होंने तालाब समेत उसके आसपास की गलियों में जलभराव देख निकासी की व्यवस्था कराने का निर्देश भी दिया। एडीपीआरओ ने बताया कि भ्रष्टाचार के जो आरोप लगाए गए हैं, प्रथम दृष्टया उनकी पुष्टि नहीं हो पाई है। जबकि वीरेंद्र ने बताया कि वह जांच की मौजूदा स्थिति से संतुष्ट नहीं हैं। प्रधान अरविंद उपाध्याय का कहना है कि जांच में कहीं पर भी खामी नहीं पाई गई है। शिकायत उन्हें बेवजह परेशान करने के की गई है। जांच में भी हकीकत सामने आ गई है।
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प्रधान पर यह भी आरोप
- गोआश्रय स्थल के निर्माण में गोलमाल, कूड़ा संग्रह के लिए खरीदे गए ई- रिक्शा की गुणवत्ता, क्रीड़ास्थल में खामियां, मनरेगा से निर्माण कार्य में मानक के विपरीत काम, सचिवालय के द्वार पर परिजन का नाम, मासिक बैठकों पर खर्चा का ब्योरा नहीं देना और जल निकासी के इंतजाम नहीं करना शामिल है।
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संजरपुर बालजीत निवासी वीरेंद्र सिंह पुत्र भूदेव ने विकास कार्यों में घोटाले का आरोप लगाते हुए आठ बिंदुओं पर शिकायत डीएम से की थी। डीएम ने जांच के लिए डीपीआरओ को निर्देशित किया था। इसके तहत अपर जिला पंचायती राज अधिकारी गिरीश कुमार बृहस्पतिवार दोपहर गांव पहुंचे। उन्होंने गांव का मौका मुआयना करने के बाद पंचायत घर में प्रधान अरविंद उपाध्याय का पक्ष सुना। शिकायतकर्ता वीरेंद्र सिंह को भी बुलवाया गया, लेकिन उन्होंने पंचायत घर परिसर में पहुंचने के बजाय मौके पर जांच करने की बात कहकर वहां पहुंचने से मना कर दिया। इसके बाद अपर जिला पंचायती राज अधिकारी ने उन्हें अलग बुलाकर पक्ष सुना।
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करीब दो- तीन घंटे तक जांच करने के बाद उन्होंने तालाब समेत उसके आसपास की गलियों में जलभराव देख निकासी की व्यवस्था कराने का निर्देश भी दिया। एडीपीआरओ ने बताया कि भ्रष्टाचार के जो आरोप लगाए गए हैं, प्रथम दृष्टया उनकी पुष्टि नहीं हो पाई है। जबकि वीरेंद्र ने बताया कि वह जांच की मौजूदा स्थिति से संतुष्ट नहीं हैं। प्रधान अरविंद उपाध्याय का कहना है कि जांच में कहीं पर भी खामी नहीं पाई गई है। शिकायत उन्हें बेवजह परेशान करने के की गई है। जांच में भी हकीकत सामने आ गई है।
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प्रधान पर यह भी आरोप
- गोआश्रय स्थल के निर्माण में गोलमाल, कूड़ा संग्रह के लिए खरीदे गए ई- रिक्शा की गुणवत्ता, क्रीड़ास्थल में खामियां, मनरेगा से निर्माण कार्य में मानक के विपरीत काम, सचिवालय के द्वार पर परिजन का नाम, मासिक बैठकों पर खर्चा का ब्योरा नहीं देना और जल निकासी के इंतजाम नहीं करना शामिल है।