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Budaun News: झूठी गवाही देने पर वादी व दो गवाहों के खिलाफ कार्रवाई

Sat, 30 Aug 2025 01:57 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 30 Aug 2025 01:57 AM IST
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Action against plaintiff and two witnesses for giving false testimony
बदायूं। न्यायालय में झूठी गवाही देना अब किसी को भी भारी पड़ सकता है। विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी कोर्ट एवं अपर सत्र न्यायाधीश सुयश प्रकाश श्रीवास्तव की अदालत ने एक ऐसे ही मामले में सख्त रुख अपनाते हुए वादी और उसके दो गवाहों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
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मामले की सुनवाई कोर्ट में लंबे समय से चल रही थी। बरेली के आंवला कस्बा निवासी अजीत पाल सिंह ने दिशांत रस्तोगी और उनके पिता सुबोध रस्तोगी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह तथ्य सामने आया कि वादी पक्ष और उसके गवाहों ने न्यायालय को गुमराह करने के उद्देश्य से झूठी गवाही दी है। इस पर न्यायालय ने संज्ञान लेते हुए दंडात्मक कार्रवाई का आदेश सुनाया।
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वादी अजीत पाल सिंह का कहना था कि उसके पिता पुलिस विभाग में कार्यरत थे और उनकी तैनाती बदायूं में भी रही थी। उसी दौरान उसकी पढ़ाई-लिखाई बदायूं में हुई और यहां रहते हुए उसके कई लोगों से घनिष्ठ संबंध बन गए। पढ़ाई पूरी करने के बाद वह अपने पैतृक कस्बे आंवला जाकर रहने लगा, लेकिन बदायूं में भी उसका कारोबार चलता रहा। इस कारण वह समय-समय पर बदायूं आता जाता था। वादी का आरोप था कि शहर के मोहल्ला चाहमीर मढ़ई चौक के नजदीक रहने वाले दिशांत रस्तोगी और उनके पिता सुबोध रस्तोगी की दुकान पर उसका आना-जाना था, लेकिन बाद में विवाद बढ़ने पर उसने उनके खिलाफ मुकदमा दायर कर दिया।
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सुनवाई के दौरान जब गवाहों और वादी के बयानों की पड़ताल हुई तो यह पाया गया कि उन्होंने अदालत के समक्ष तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया और असत्य बयान दिए। अदालत ने इसे न्याय की प्रक्रिया से खिलवाड़ मानते हुए वादी और उसके गवाहों पर ही कार्रवाई का आदेश दे दिया। न्यायालय के आदेश के बाद वादी अजीत पाल सिंह और उसके दो गवाहों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अदालत का यह आदेश उन सभी लोगों के लिए बड़ा सबक माना जा रहा है जो न्यायालय में झूठी गवाही देकर अपने पक्ष को मजबूत करने की कोशिश करते हैं।
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