{"_id":"614cd1618ebc3efad92e34df","slug":"acident-badaun-news-bly4606372178","type":"story","status":"publish","title_hn":"बकरियों को बचाने की कोशिश में ट्रेन की चपेट में आकर महिला की मौत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बकरियों को बचाने की कोशिश में ट्रेन की चपेट में आकर महिला की मौत
विज्ञापन
ट्रेन की चपेट में आने से मृत कस्तूरी देवी। (फाइल फोटो)
- फोटो : BADAUN
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उझानी (बदायूं)। रेलवे लाइन पर पहुंचीं बकरियों को बचाने की कोशिश में महिला की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई। इस दौरान ट्रेन से कटकर तीन बकरियां भी मर गई। हादसे के बाद गार्ड शव को लेकर मानपुर नगरिया स्टेशन पर पहुंचा और उसे जीआरपी के हवाले कर दिया।
कछला हाल्ट स्टेशन के पास हादसा बृहस्पतिवार दोपहर बाद करीब साढ़े तीन बजे हुआ। कोतवाली क्षेत्र के गांव जाटवनगला निवासी कस्तूरी देवी (50) पत्नी ओमकार सिंह पूर्वाह्न 11 बजे छह बकरियां चराने के लिए घर से निकलीं थीं। बकरियों को लेकर वह रेलवे लाइन के पास पहुंच गईं और पेड़ की छांव में बैठ गईं। बकरियां रेलवे लाइन के पास चरने लगीं। अचानक ही लालकुआं-कासगंज स्पेशल एक्सप्रेस आ गई। कस्तूरी को लगा कि बकरियां ट्रेन की चपेट में आ जाएंगी, इसलिए वह उन्हें रेलवे लाइन से खदेड़ने के लिए दौड़ पड़ी।
उसने दो-तीन बकरियां तो भगा दीं लेकिन तीन बकरियों के साथ वह ट्रेन की चपेट में आकर कट गई। कस्तूरी की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद चालक ने आगे बढ़कर ट्रेन को रोक लिया। गार्ड ने शव ट्रेन में रख लिया और उसे कासगंज जिले के मानपुर नगरिया स्टेशन पर पहुंचाकर जीआरपी के हवाले कर दिया। जानकारी पाकर मृतका के परिजन भी मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने रेलवे लाइन पर कटी पड़ीं तीन बकरियों को हटा दिया। दो बकरियां घायल बताई गई हैं।
विज्ञापन
उजड़ गईं गरीब परिवार की खुशियां
ट्रेन की चपेट में आने से मृत कस्तूरी देवी का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है। पति हालांकि मजदूरी करता है लेकिन खुद कस्तूरी पशुपालन के जरिए परिवार के खेवनहार की भूमिका में सहभागी बनी रहीं। परिवार की आर्थिक स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि करीब एक दशक पहले सरकारी योजना की रकम से उसका पक्का मकान बन पाया था।
मृतका कस्तूरी देवी की सात संतान हैं। दो बेटे और पांच बेटियों में दो पुत्रियों का शादी भी हो चुकी है। ग्रामीणों के मुताबिक- कस्तूरी का पति ओमकार मजदूरी करता है। उसे परिवार के भरण-पोषण में पत्नी का भी पूरा सहयोग मिलता रहा। कस्तूरी हालांकि अब इस दुनिया में नहीं है लेकिन उसने पशुपालन में अहम भूमिका निभाई। एक भैंस भी है। अपनी आधा दर्जन बकरियों को चराने के लिए वह रोज ही घर से निकलती और शाम को लौटकर घर पहुंचती। इसके बाद घरेलू काम निपटना उसकी दिनचर्या में शामिल रहा।
हादसे में पत्नी की मौत के बाद ओमकार ने पुलिस कर्मियों को बताया कि उसके परिवार की खुशियां उजड़ गईं हैं। कस्तूरी बकरियों को दूध भी बेच दिया करती थी। जो कुछ बचता, उससे बच्चों के लिए चाय का इंतजाम कर दिया करती थी। ओमकार के पास सिर्फ दो ढाई बीघा कृषि योग्य भूमि है।
विज्ञापन
कछला हाल्ट स्टेशन के पास हादसा बृहस्पतिवार दोपहर बाद करीब साढ़े तीन बजे हुआ। कोतवाली क्षेत्र के गांव जाटवनगला निवासी कस्तूरी देवी (50) पत्नी ओमकार सिंह पूर्वाह्न 11 बजे छह बकरियां चराने के लिए घर से निकलीं थीं। बकरियों को लेकर वह रेलवे लाइन के पास पहुंच गईं और पेड़ की छांव में बैठ गईं। बकरियां रेलवे लाइन के पास चरने लगीं। अचानक ही लालकुआं-कासगंज स्पेशल एक्सप्रेस आ गई। कस्तूरी को लगा कि बकरियां ट्रेन की चपेट में आ जाएंगी, इसलिए वह उन्हें रेलवे लाइन से खदेड़ने के लिए दौड़ पड़ी।
विज्ञापन
उसने दो-तीन बकरियां तो भगा दीं लेकिन तीन बकरियों के साथ वह ट्रेन की चपेट में आकर कट गई। कस्तूरी की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद चालक ने आगे बढ़कर ट्रेन को रोक लिया। गार्ड ने शव ट्रेन में रख लिया और उसे कासगंज जिले के मानपुर नगरिया स्टेशन पर पहुंचाकर जीआरपी के हवाले कर दिया। जानकारी पाकर मृतका के परिजन भी मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने रेलवे लाइन पर कटी पड़ीं तीन बकरियों को हटा दिया। दो बकरियां घायल बताई गई हैं।
विज्ञापन
उजड़ गईं गरीब परिवार की खुशियां
ट्रेन की चपेट में आने से मृत कस्तूरी देवी का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है। पति हालांकि मजदूरी करता है लेकिन खुद कस्तूरी पशुपालन के जरिए परिवार के खेवनहार की भूमिका में सहभागी बनी रहीं। परिवार की आर्थिक स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि करीब एक दशक पहले सरकारी योजना की रकम से उसका पक्का मकान बन पाया था।
मृतका कस्तूरी देवी की सात संतान हैं। दो बेटे और पांच बेटियों में दो पुत्रियों का शादी भी हो चुकी है। ग्रामीणों के मुताबिक- कस्तूरी का पति ओमकार मजदूरी करता है। उसे परिवार के भरण-पोषण में पत्नी का भी पूरा सहयोग मिलता रहा। कस्तूरी हालांकि अब इस दुनिया में नहीं है लेकिन उसने पशुपालन में अहम भूमिका निभाई। एक भैंस भी है। अपनी आधा दर्जन बकरियों को चराने के लिए वह रोज ही घर से निकलती और शाम को लौटकर घर पहुंचती। इसके बाद घरेलू काम निपटना उसकी दिनचर्या में शामिल रहा।
हादसे में पत्नी की मौत के बाद ओमकार ने पुलिस कर्मियों को बताया कि उसके परिवार की खुशियां उजड़ गईं हैं। कस्तूरी बकरियों को दूध भी बेच दिया करती थी। जो कुछ बचता, उससे बच्चों के लिए चाय का इंतजाम कर दिया करती थी। ओमकार के पास सिर्फ दो ढाई बीघा कृषि योग्य भूमि है।