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बदबू आई तो मचा शोर, लेकिन टूट चुकी थी जीवन की डोर

Sun, 12 Jun 2022 11:44 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 12 Jun 2022 11:44 PM IST
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accident
गौरीशंकर का शव कब्जे में लेने से पहले अभिलेखीय कार्रवाई करता पुलिस कर्मी। संवाद - फोटो : BADAUN
उझानी (बदायूं)। किसी से न कुछ कहना और न ही दूसरे की बात सुन पाना। जन्म से ही मूक-बधिर बुजुर्ग गौरीशंकर सक्सेना कब चल बसे, इसका पता पड़ोसियों को भी नहीं चला। उनके घर से जब बदबू के गुबार उठे तो आसपास के लोग अंदर झांकने को मजबूर हो गए। देखा तो कमरे के बाहर गैलरी में चारपाई पर उनका शव पड़ा था। बुजुर्ग खाली पड़े छोटे भाई के घर में अकेले ही रहते थे।
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श्रीनारायणगंज मोहल्ले के मिल कंपाउंड इलाके में रहने वाले करीब 70 साल के बुजुर्ग गौरीशंकर सक्सेना मूक बधिर जरूर थे लेकिन पड़ोसियों समेत आसपास के लोगों का उनके प्रति लगाव कम नहीं रहा। पड़ोसी बांके बिहारी कॉलेज के प्रवक्ता नवीन कुमार के मुताबिक- तीन-चार दिन से वह मोहल्ले में किसी को नजर नहीं आए। उनके घर से बदबू आई तो शनिवार को लोगों ने अंदर झांका। मुख्य द्वार अंदर से बंद था। उन्होंने और पड़ोस के दो-तीन लोगों ने छत पर चढ़कर अंदर झांका तो वह चारपाई पर पड़े नजर आए। पड़ोसियों की सूचना के बाद पुलिस आई और अंदर से दरवाजा खुलवाकर गई तो वहां गौरीशंकर का शव पड़ा था। प्रभारी निरीक्षक हरपाल सिंह बालियान ने बताया कि मौत स्वाभाविक लग रही है। कब हुई, यह साफ नहीं हो पाया है, पर शव देखकर लग रहा है कि दो-तीन दिन पहले मौत हो गई थी। इस दौरान पुलिस की फोरेंसिक टीम ने नमूने भी लिए। वीडियोग्राफी भी कराई गई। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने शव फर्रुखाबाद से पहुंचे उनके सबसे छोटे भाई राजेश सक्सेना के हवाले कर दिया। बाद में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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चार भाइयों में सबसे बड़े गौरीशंकर का अपना नहीं था आशियाना
अविवाहित गौरीशंकर जिस मकान में रहते थे, वह उनके छोटे भाई मदन मोहन सक्सेना का है। सरकारी सेवा से रिटायर होने के बाद मदन मोहन चंडीगढ़ में रहते हैं तो उनसे छोटे नरेश यहीं पर एक प्राइवेट स्कूल में अध्यापक हैं। सबसे छोटे भाई राजेश सक्सेना का फर्रुखाबाद में निजी व्यवसाय है। नरेश पिछले कुछ दिनों से भाई मदन मोहन के पास चंडीगढ़ में हैं। बताते हैं कि मदन मोहन समेत तीनों भाइयों ने गौरीशंकर को अपने पास रखने की कई बार जिद की लेकिन वह किसी के साथ नहीं गए। गौरीशंकर को रहने के लिए मदन मोहन ने अपना मकान दे रखा था।
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