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रामगंगा उफान पर, बनने लगे हैं बाढ जैसे हालात
Updated Sun, 05 Aug 2018 12:14 AM IST
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रामगंगा उफान पर, बनने
लगे हैं बाढ़ जैसे हालात
नगरिया खनू बाढ़ चौकी है सबसे ज्यादा संवेदनशील
अमर उजाला ब्यूरो
दातागंज। रामगंगा पूरे उफान पर है। बाढ़ की दृष्टि से तहसील क्षेत्र के गांव नगरिया खनू बाढ़ चौकी सबसे ज्यादा संवेदनशील है। यदि जलस्तर और बढ़ जाता है तब रामगंगा के दूसरी पार बसे 14 गांवों के लोगों का दातागंज से पूूरी संपर्क कट सकता है। रामगंगा में नाव नहीं होने की वजह से दूसरी पार बसे गांव के लोगों को फिलहाल करीब 25 किमी का रास्ता ज्यादा तय करना पड़ रहा है। वहीं जलस्तर के लगातार बढ़ने से लोगों की चिंता भी ज्यादा बढ़ गई है।
कई दिनों से मानसून अपना पूरा असर दिखा रहा है। दो साल से बारिश ज्यादा नहीं होने की वजह से रामगंगा में उतना पानी नहीं रहा जिससे किसी को कोई चिंता होती, लेकिन इस वक्त रामगंगा पूरे उफान पर है। यहां बता दें कि तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत कुडरा मजरा, नवादा बदन, लालपुर खादर और शेरपुर पट्टी के 14 मजरे रामगंगा के दूसरी पार हैं। रामगंगा को पार करने के लिए हर साल पांटून पुल का इस्तेमाल होता है, लेकिन जुलाई आते ही इस पुल को हटा दिया जाता है। दूसरी पार रहने वाले लोग रामगंगा को पार करने के लिए नाव का सहारा लेते थे, लेकिन दो साल से इसका ठेका नहीं होने की वजह से उसमें नाव नहीं है। दरअसल, कुछ समय पहले तक रामगंगा सूखी थी सो लोगों को आवागमन में किसी तरह की दिक्कत नहीं हो रही थी। निचले स्तर पर रामगंगा के होने की वजह से यह आशंका जताई जा रही है कि किसी भी दिन नगरिया खनू इलाके में बाढ़ आ सकती है।
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रामगंगा में पानी के बढ़ जाने से बाढ़ जैसे हालात होने लगे हैं। दूसरी पार बसे गांव वालों ने रामगंगा में छोटी नाव डाल रखी है। उसी के जरिए आ जा रहे हैं।
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-ठाकुर श्रीकृष्ण सिंह, प्रधान नगरिया खनू
--
तहसील प्रशासन बाढ़ चौकी पर नजर रखे हैं। रामगंगा के दूसरी पार बसे लोगों के आवागमन को नाव की व्यवस्था की जा रही है।
-दिनेश कुमार सिंह, एसडीएम दातागंज
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लगे हैं बाढ़ जैसे हालात
नगरिया खनू बाढ़ चौकी है सबसे ज्यादा संवेदनशील
अमर उजाला ब्यूरो
दातागंज। रामगंगा पूरे उफान पर है। बाढ़ की दृष्टि से तहसील क्षेत्र के गांव नगरिया खनू बाढ़ चौकी सबसे ज्यादा संवेदनशील है। यदि जलस्तर और बढ़ जाता है तब रामगंगा के दूसरी पार बसे 14 गांवों के लोगों का दातागंज से पूूरी संपर्क कट सकता है। रामगंगा में नाव नहीं होने की वजह से दूसरी पार बसे गांव के लोगों को फिलहाल करीब 25 किमी का रास्ता ज्यादा तय करना पड़ रहा है। वहीं जलस्तर के लगातार बढ़ने से लोगों की चिंता भी ज्यादा बढ़ गई है।
कई दिनों से मानसून अपना पूरा असर दिखा रहा है। दो साल से बारिश ज्यादा नहीं होने की वजह से रामगंगा में उतना पानी नहीं रहा जिससे किसी को कोई चिंता होती, लेकिन इस वक्त रामगंगा पूरे उफान पर है। यहां बता दें कि तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत कुडरा मजरा, नवादा बदन, लालपुर खादर और शेरपुर पट्टी के 14 मजरे रामगंगा के दूसरी पार हैं। रामगंगा को पार करने के लिए हर साल पांटून पुल का इस्तेमाल होता है, लेकिन जुलाई आते ही इस पुल को हटा दिया जाता है। दूसरी पार रहने वाले लोग रामगंगा को पार करने के लिए नाव का सहारा लेते थे, लेकिन दो साल से इसका ठेका नहीं होने की वजह से उसमें नाव नहीं है। दरअसल, कुछ समय पहले तक रामगंगा सूखी थी सो लोगों को आवागमन में किसी तरह की दिक्कत नहीं हो रही थी। निचले स्तर पर रामगंगा के होने की वजह से यह आशंका जताई जा रही है कि किसी भी दिन नगरिया खनू इलाके में बाढ़ आ सकती है।
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रामगंगा में पानी के बढ़ जाने से बाढ़ जैसे हालात होने लगे हैं। दूसरी पार बसे गांव वालों ने रामगंगा में छोटी नाव डाल रखी है। उसी के जरिए आ जा रहे हैं।
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-ठाकुर श्रीकृष्ण सिंह, प्रधान नगरिया खनू
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तहसील प्रशासन बाढ़ चौकी पर नजर रखे हैं। रामगंगा के दूसरी पार बसे लोगों के आवागमन को नाव की व्यवस्था की जा रही है।
-दिनेश कुमार सिंह, एसडीएम दातागंज