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वाहन चालक की लापरवाही में गई मासूम आदित्य की जान
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बदायूं
Updated Sun, 08 Jul 2018 12:49 AM IST
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बच्चों को घर तक सुरक्षित पहुंचाने के एक स्कूल के दावे शनिवार को फेल हो गए। नियम तो यह है कि बच्चों को स्कूल ले जाने और लौटकर छोड़ने तक पूरी जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन की होगी। स्कूल प्रबंधन एक ऐसे व्यक्ति के हाथ में वाहन का स्टेयरिंग थमाएगा, जो अपने बच्चों की तरह जिम्मेदारी समझता हो। अगर यही जिम्मेदारी वैन चालक ने निभाई होती, तो शायद आदित्य की जान नहीं जाती।
पिछले काफी समय से एसएसपी अशोक कुमार स्कूली बच्चों को लेकर सख्त हैं। उनके आदेश पर जिलेभर के स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभियान चलाया गया। सभी थाना प्रभारियों ने अपने-अपने इलाके के स्कूलों में जाकर चालकों और हेल्परों को नियम बताए। साथ ही स्कूल संचालकों से कहा था कि वे वाहनों का फीडबैक रखें। उसे ही नौकरी पर रखें, जो अपने बच्चों की तरह दूसरे के बच्चों का ध्यान रखता हो। बच्चों को रास्ते में न छोड़, ध्यान से उतारे और चढ़ाए। कई बातें चालकों और हेल्परों को समझाईं गईं। सर्वा गांव में हुए हादसे की वजह से पुलिस की मेहनत पर पानी फिर गया। ऐसा लगता है कि स्कूल के चालक पर पुलिस द्वारा बताए गए नियमों का कोई असर नहीं पड़ा और न ही स्कूल प्रबंधन ने इसकी जिम्मेदारी समझी। अगर वैन चालक ने जल्दबाजी न की होती, तो शायद मासूम आदित्य की जान नहीं जाती।
छोटे भाई को वैन के नीचे देख बिलख पड़ा अंश
सर्वा गांव के रहने वाले धीरेंद्र यादव वैसे तो पेट्रोल पंप पर मजदूरी करते हैं। उनके दो बेटे थे, जिनमें अंश बड़ा और आदित्य छोटा है। धीरेंद्र यादव अपने दोनों बेटों को राम लखन की जोड़ी मानते थे। दोनों को खूब पढ़ाना-लिखाना भी चाहते थे। इसलिए उन्होंने पैसों की चिंता न करते हुए अपने बेटों का एडमीशन नगर के स्कूल में कराया था। परंतु शनिवार हुए हादसे में आदित्य की जान चली गई। उसे वैन के नीचे दबा देखकर अंश बुरी तरह बिलखने लगा। वह यही कह रहा है कि अब वह स्कूल किसके साथ जाएगा। वहीं बेटे की मौत ने धीरेंद्र यादव और उनकी पत्नी रेखा को झकझोर कर रख दिया है।
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पिछले काफी समय से एसएसपी अशोक कुमार स्कूली बच्चों को लेकर सख्त हैं। उनके आदेश पर जिलेभर के स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभियान चलाया गया। सभी थाना प्रभारियों ने अपने-अपने इलाके के स्कूलों में जाकर चालकों और हेल्परों को नियम बताए। साथ ही स्कूल संचालकों से कहा था कि वे वाहनों का फीडबैक रखें। उसे ही नौकरी पर रखें, जो अपने बच्चों की तरह दूसरे के बच्चों का ध्यान रखता हो। बच्चों को रास्ते में न छोड़, ध्यान से उतारे और चढ़ाए। कई बातें चालकों और हेल्परों को समझाईं गईं। सर्वा गांव में हुए हादसे की वजह से पुलिस की मेहनत पर पानी फिर गया। ऐसा लगता है कि स्कूल के चालक पर पुलिस द्वारा बताए गए नियमों का कोई असर नहीं पड़ा और न ही स्कूल प्रबंधन ने इसकी जिम्मेदारी समझी। अगर वैन चालक ने जल्दबाजी न की होती, तो शायद मासूम आदित्य की जान नहीं जाती।
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छोटे भाई को वैन के नीचे देख बिलख पड़ा अंश
सर्वा गांव के रहने वाले धीरेंद्र यादव वैसे तो पेट्रोल पंप पर मजदूरी करते हैं। उनके दो बेटे थे, जिनमें अंश बड़ा और आदित्य छोटा है। धीरेंद्र यादव अपने दोनों बेटों को राम लखन की जोड़ी मानते थे। दोनों को खूब पढ़ाना-लिखाना भी चाहते थे। इसलिए उन्होंने पैसों की चिंता न करते हुए अपने बेटों का एडमीशन नगर के स्कूल में कराया था। परंतु शनिवार हुए हादसे में आदित्य की जान चली गई। उसे वैन के नीचे दबा देखकर अंश बुरी तरह बिलखने लगा। वह यही कह रहा है कि अब वह स्कूल किसके साथ जाएगा। वहीं बेटे की मौत ने धीरेंद्र यादव और उनकी पत्नी रेखा को झकझोर कर रख दिया है।
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