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अस्पतालों में नहीं हैं अग्नि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

Updated Mon, 15 Jan 2018 11:58 PM IST
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जिला महिला अस्पताल।
जिला महिला अस्पताल। - फोटो : अमर उजाला
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बदायूं। बरेली के साईं अस्पताल में आग लगने से बदायूं की दो महिलाओं की मौत के बाद अस्पतालों में अग्निशमन उपायों की प्रासंगिकता का मुद्दा गरमा गया है। सोमवार को अमर उजाला टीम ने जायजा लिया तो पता लगा कि जिला से लेकर निजी अस्पतालों तक में अग्निशमन सुरक्षा के समुचित इंतजाम नहीं हैं। इससे कभी भी यहां बड़ा हादसा हो सकता है।
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जिला अस्पताल में अग्निशमन उपाय नाकाफी हैं। इमरजेंसी ओपीडी में एक फायर सिलेंडर लगा है पर बाकी वार्डों में कहीं फायर सिलेंडर दिखाई नहीं देते। अंदर के वार्डों में भी ऐसा ही हाल है। अंदर तंग रास्ते हैं और हर वार्ड तक फायर ब्रिगेड पहुंचने की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में कभी किसी घटना के वक्त मुसीबत हो सकती है। महिला अस्पताल की पुरानी इमारत में भी ऐसी ही स्थिति हैं। यहां गिनती के फायर सिलेंडर लगे हैं, इनमें भी कई खाली हैं। अस्पताल का नया भवन जरूर अग्निशमन संसाधनों की औपचारिकता पूरी कर रहा है।

शहर के निजी अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा उपायों की स्थिति काफी दयनीय है। अस्पताल प्रबंधन इस मद में धन खर्च करना ही नहीं चाहते। आईएमए के अधीन जिले में 75 डॉक्टर पंजीकृत हैं। इनमें से 24 के नर्सिंग होम हैं तो बाकी क्लीनिक के तौर पर रजिस्टर्ड हैं। इनमें से अधिकतर अस्पतालों में आग बुझाने के उपकरण हैं ही नहीं। कुछ जगह सिलेंडर लगे हैं तो वह बेकार और एक्सपायरी डेट के हैं। आईएमए के अलावा आयुष डॉक्टरों के अस्पतालों में तो कोई भी सुरक्षा इंतजाम नहीं है। शहर के नवादा क्षेत्र में गली कूंचों में नर्सिंग होम खोले गए हैं। इनमें से कुछ का तो स्वास्थ्य विभाग के ही पास रजिस्ट्रेशन नहीं है। यहां सैकड़ों मरीज भर्ती रहते हैं पर यहां अग्निकांड के दौरान तबाही से बचाने के कोई साधन नहीं है। कई अस्पताल ऐसे संकरे रास्तों से अंदर जाकर बनाए गए हैं जहां तक दमकल कभी नहीं पहुंच सकती।
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अग्निशमन विभाग भी काफी हद तक जिम्मेदार
बदायूं।
निजी अस्पतालों ने अग्नि सुरक्षा के मानकों को ताक पर रख दिया है तो उसके लिए काफी हद तक अग्निशमन विभाग जिम्मेदार है। विभाग इस मामले में दोहरी नीति अपनाता है। विभाग के लोग बराबर मानकों को परखने के नाम पर अस्पतालों में आवाजाही रखते हैं और दूसरे तरीकों से इसका लाभ भी उठाते हैं। शायद यही वजह है जो आज तक एक भी अस्पताल के खिलाफ विभाग ने कार्रवाई नहीं की। इस मामले में अधिकारी दूसरे तरीके से बचाव करते हैं। मुख्य अग्निशमन अधिकारी आरके वाजपेई कहते हैं कि बदायूं जिले में कोई ऐसा अस्पताल नहीं है जो उनकी कार्रवाई की सीधी जद में हो। नियमानुसार पंद्रह मीटर ऊंचाई या पांच सौ वर्ग मीटर जगह वाले अस्पतालों को विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना होता है। ऐसे अस्पतालों में वह लोग चेकिंग और संबंधित कार्रवाई कर सकते हैं। बदायूं जिले में सभी अस्पताल छोटे हैं और इस श्रेणी में नहीं आते। वह लोग उन्हें सुरक्षा उपाय अपनाने की सलाह ही दे सकते हैं, कार्रवाई का अधिकार उनके पास नहीं है।

सीएमओ ने निजी अस्पतालों को दिया नोटिस
बदायूं।
बरेली की घटना के बाद स्वास्थ्य महकमा भी अलर्ट हो गया है। सीएमओ डॉ. नेमीचंद्रा ने बताया कि सभी सरकारी अस्पतालों को एक सप्ताह पहले ही अग्निशमन उपाय दुरुस्त करने के लिए नोटिस दिया गया था। अधिकतर जगह व्यवस्था ओके भी हो गई है। वहीं निजी अस्पतालों को वह आज ही नोटिस जारी करा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सभी निजी अस्पतालों में टीम भेजकर निरीक्षण कराया जाएगा। जहां भी अग्निकांड की दशा में मरीजों की जान से खिलवाड़ जैसी स्थिति मिलेगी, वहां कार्रवाई की जाएगी। वह खुद भी निरीक्षण करेंगे।
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आईएमए सचिव ने भी जारी किया अलर्ट
बदायूं।
आईएमए सचिव डॉ. शरद गुप्ता बरेली की घटना से काफी आहत दिखे। हालांकि उन्होंने दावा किया कि आईएमए में पंजीकृत सभी अस्पतालों में फायर इंस्टूमेंट पर्याप्त संख्या में लगे हैं। इसके बावजूद उन्होंने संस्था के व्हाट्सएप ग्रुप पर सभी अस्पताल संचालकों को मेसेज भेजकर इस बारे में अलर्ट जारी कर दिया है। सभी से सुरक्षा इंतजाम दुरुस्त रखने की अपेक्षा की गई है ताकि किसी संकट की स्थिति में स्टाफ और मरीज की जान खतरे में न पड़े।
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