{"_id":"5a4656674f1c1bce6d8b6c6e","slug":"91514559079-budaun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कागजों में ओडीएफ, गरीबों के घरों में शौचालय नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कागजों में ओडीएफ, गरीबों के घरों में शौचालय नहीं
Updated Sat, 30 Dec 2017 12:13 AM IST
विज्ञापन
खुले में शौच
- फोटो : AFP
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बदायूं। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की लापरवाही के कारण जिला अब तक ओडीएफ घोषित नहीं हो पा रहा है। जो गांव ओडीएफ हुए हैं, उनमें भी कई गांवों में बिना शौचालय बनाए गांव को ओडीएफ घोषित करवा दिया गया। जबकि वास्तविकता में अब तक पात्र लोगों को शौचालय तक नसीब नहीं हुए।
जिले में 2011 में बेस लाइन सर्वे हुआ था। इसमें बिसौली के सरौरी गांव में 139 परिवार को दिखाया गया था। जिसके पास में शौचालय नहीं थे। इसमें कई परिवार ऐसे थे, जो जिनके पास में शौचालय बनाने की स्थिति नहीं थी। इसके बाद में टीम ने लोगों को प्रेरित किया। जिसके बाद में 15 लोगों ने शौचालयों का स्वयं ही निर्माण कर लिया। जबकि 89 लोगों को शासन की ओर से शौचालय बनाने के लिए रुपये दिया गया और इसमें जनप्रतिनिधि और अधिकारियों ने खेल कर दिया और अपने चेहतों के यहां पर शौचालयों का निर्माण करा दिया। जो स्वयं भी शौचालय बनाने में सक्षम थे। इसके बाद में गांव को ओडीएफ घोषित कर दिया गया, इसके बावजूद गांव में 35 के घरों पर शौचालय नहीं बन सके है। इनमें 26 परिवार ऐसे है बचे जो पात्रता की श्रेणी में आते है। इसके बावजूद इन्हें शौचालय नहीं मिल सके। डीपीआरओ राजेश कुमार मौर्य ने बताया कि यह मामला संज्ञान में आया है। इसमें जांच कराई जाएगी। जो पात्र परिवार है, उनको शौचालय दिलवाए जाएंगे। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
जिले में 2011 में बेस लाइन सर्वे हुआ था। इसमें बिसौली के सरौरी गांव में 139 परिवार को दिखाया गया था। जिसके पास में शौचालय नहीं थे। इसमें कई परिवार ऐसे थे, जो जिनके पास में शौचालय बनाने की स्थिति नहीं थी। इसके बाद में टीम ने लोगों को प्रेरित किया। जिसके बाद में 15 लोगों ने शौचालयों का स्वयं ही निर्माण कर लिया। जबकि 89 लोगों को शासन की ओर से शौचालय बनाने के लिए रुपये दिया गया और इसमें जनप्रतिनिधि और अधिकारियों ने खेल कर दिया और अपने चेहतों के यहां पर शौचालयों का निर्माण करा दिया। जो स्वयं भी शौचालय बनाने में सक्षम थे। इसके बाद में गांव को ओडीएफ घोषित कर दिया गया, इसके बावजूद गांव में 35 के घरों पर शौचालय नहीं बन सके है। इनमें 26 परिवार ऐसे है बचे जो पात्रता की श्रेणी में आते है। इसके बावजूद इन्हें शौचालय नहीं मिल सके। डीपीआरओ राजेश कुमार मौर्य ने बताया कि यह मामला संज्ञान में आया है। इसमें जांच कराई जाएगी। जो पात्र परिवार है, उनको शौचालय दिलवाए जाएंगे। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन