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150 करोड़ की लागत से यदु शुगर मिल में लगेगा एथेनॉल प्लांट
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150 करोड़ की लागत से यदु शुगर मिल में लगेगा एथेनॉल प्लांट
बदायूं। जिले वासियों के लिए यह एक अच्छी खबर है। बिसौली स्थित यदु शुगर मिल में 150 करोड़ की लागत से एथेनॉल प्लांट बनाया जाएगा। यहां तैयार होने वाला एथेनॉल पेट्रोलियम विभाग को बेचा जाएगा। एथेनॉल प्लांट बन जाने से एक तो शीरा की खपत होगी, दूसरे चीनी मिल को होने वाले घाटे की पूर्ति होगी। इसके साथ लोगों को रोजगार भी मिलेगा। सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद एथेनॉल प्लांट का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। इसको तैयार होने में कम से कम 14 महीने लगेंगे।
प्रदेश में बदायूं की गिनती पिछड़े जिलों में होती है। पिछड़े जिलों में विकास को पटरी पर लाने के लिए प्रदेश की योगी सरकार उद्योग लगाने पर जोर दे रही है। इसके लिए देश की कई नामचीन कंपनियों के लिए भी प्रदेश सरकार ने यूपी में उद्योग लगाने के लिए आमंत्रित किया है। उद्योग लगने से बेरोजगारी दूर होगी। इसी कड़ी में बिसौली तहसील क्षेत्र में स्थित यदु शुगर मिल में एथेनॉल प्लांट लगाने की तैयारी है। मिल प्रशासन ने एथेनॉल के प्लांट का लाइसेंस लेने को आवेदन कर दिया है, जिसकी फाइल आबकारी आयुक्त कार्यालय में पहुंच चुकी है। जिला प्रशासन से एनओसी लेने को आवेदन किया जा चुका है। एथेनॉल प्लांट 150 करोड़ की लागत से बनेगा। लाइसेंस मिलने के बाद प्लांट निर्माण में 14 महीने लगेंगे, जो 120 केएल की क्षमता का होगा। मिल के लिए करीब साढ़े दस एकड़ भूमि की जरूरत होगी, जो मिल परिसर में उपलब्ध है।
यदु शुगर मिल में हर साल करीब तीन लाख क्विंटल शीरा निकलता है। पिछले साल मार्केट में शीरे की डिमांड न होने की वजह से एक रुपये प्रति किलो शीरा का दाम था। शीरा बेचने में दाम से ज्यादा भाड़ा लग जाता, जिससे मिल प्रशासन को शीरा फेंकना पड़ा था। वर्तमान में चीनी के दाम 30 रुपये प्रति किलो है। जबकि चीनी का प्रोडक्शन खर्चा 34 रुपये प्रति किलो। इस हिसाब से चार रुपये प्रति किलो चीनी बनाने में घाटा होता है। बाकी खर्च अलग। इसी घाटे को पूरा करने के लिए एथेनॉल प्लांट लगाने की योजना बनाई गई है। यहां प्लांट तैयार होने वाले एथेनॉल को पेट्रोलियम विभाग को दिया जाएगा। मुख्यमंत्री का कहना है कि प्लांट लगाने पर प्रदेश सरकार की ओर से जरूरी सुविधाएं दी जाएंगी। इससे उम्मीद है कि एथेनॉल प्लांट लगाने के लिए मिल को लाइसेंस जल्दी मिल जाएगा।
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तब बिसौली की बढ़ जाएगी कीमत
यदि एथेनॉल प्लांट बन जाता है तो निश्चित तौर पर बिसौली क्षेत्र का विकास होगा। यदु शुगर मिल बनने के बाद भी इस क्षेत्र को जिले में अलग पहचान मिली है। क्षेत्र के गन्ना किसानों को जहां अपना गन्ना दूसरे स्थानों पर ले जाने को नहीं भटकना पड़ता हैं। वहीं बहुत से लोगों को रोजगार मिला है।
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मिल चल रही है घाटे में यदु शुगर मिल पर गन्ना किसानों का करीब 87 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है। भुगतान पाने को गन्ना किसान कई बार प्रदर्शन के जरिए प्रशासन से मांग कर चुके हैं। घाटे से मिल को उभारने को मिल प्रशासन ने एथेनॉल प्लांट लगाने का फैसला किया है।
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दातागंज में भी प्रस्तावित है एथेनॉल प्लांट
जिले के दातागंज क्षेत्र में भी एथेनॉल प्लांट प्रस्तावित है। इसकी प्रक्रिया शासन स्तर पर चल रही है। कई बार जमीन को देखकर उसकी रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। यदि दातागंज में भी प्लांट बन जाता है तो जिले में दो एथेनॉल प्लांट हो सकते हैं।
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एथेनॉल प्लांट लगाने को आवेदन किया जा चुका है। फाइल आबकारी आयुक्त कार्यालय इलाहाबाद पहुंच चुकी है। लाइसेंस मिलते ही प्लांट का निर्माण शुरू करा दिया जाएगा।
-एचएस गंगवार, यूनिट हेड, यदु शुगर मिल
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बदायूं। जिले वासियों के लिए यह एक अच्छी खबर है। बिसौली स्थित यदु शुगर मिल में 150 करोड़ की लागत से एथेनॉल प्लांट बनाया जाएगा। यहां तैयार होने वाला एथेनॉल पेट्रोलियम विभाग को बेचा जाएगा। एथेनॉल प्लांट बन जाने से एक तो शीरा की खपत होगी, दूसरे चीनी मिल को होने वाले घाटे की पूर्ति होगी। इसके साथ लोगों को रोजगार भी मिलेगा। सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद एथेनॉल प्लांट का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। इसको तैयार होने में कम से कम 14 महीने लगेंगे।
प्रदेश में बदायूं की गिनती पिछड़े जिलों में होती है। पिछड़े जिलों में विकास को पटरी पर लाने के लिए प्रदेश की योगी सरकार उद्योग लगाने पर जोर दे रही है। इसके लिए देश की कई नामचीन कंपनियों के लिए भी प्रदेश सरकार ने यूपी में उद्योग लगाने के लिए आमंत्रित किया है। उद्योग लगने से बेरोजगारी दूर होगी। इसी कड़ी में बिसौली तहसील क्षेत्र में स्थित यदु शुगर मिल में एथेनॉल प्लांट लगाने की तैयारी है। मिल प्रशासन ने एथेनॉल के प्लांट का लाइसेंस लेने को आवेदन कर दिया है, जिसकी फाइल आबकारी आयुक्त कार्यालय में पहुंच चुकी है। जिला प्रशासन से एनओसी लेने को आवेदन किया जा चुका है। एथेनॉल प्लांट 150 करोड़ की लागत से बनेगा। लाइसेंस मिलने के बाद प्लांट निर्माण में 14 महीने लगेंगे, जो 120 केएल की क्षमता का होगा। मिल के लिए करीब साढ़े दस एकड़ भूमि की जरूरत होगी, जो मिल परिसर में उपलब्ध है।
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यदु शुगर मिल में हर साल करीब तीन लाख क्विंटल शीरा निकलता है। पिछले साल मार्केट में शीरे की डिमांड न होने की वजह से एक रुपये प्रति किलो शीरा का दाम था। शीरा बेचने में दाम से ज्यादा भाड़ा लग जाता, जिससे मिल प्रशासन को शीरा फेंकना पड़ा था। वर्तमान में चीनी के दाम 30 रुपये प्रति किलो है। जबकि चीनी का प्रोडक्शन खर्चा 34 रुपये प्रति किलो। इस हिसाब से चार रुपये प्रति किलो चीनी बनाने में घाटा होता है। बाकी खर्च अलग। इसी घाटे को पूरा करने के लिए एथेनॉल प्लांट लगाने की योजना बनाई गई है। यहां प्लांट तैयार होने वाले एथेनॉल को पेट्रोलियम विभाग को दिया जाएगा। मुख्यमंत्री का कहना है कि प्लांट लगाने पर प्रदेश सरकार की ओर से जरूरी सुविधाएं दी जाएंगी। इससे उम्मीद है कि एथेनॉल प्लांट लगाने के लिए मिल को लाइसेंस जल्दी मिल जाएगा।
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तब बिसौली की बढ़ जाएगी कीमत
यदि एथेनॉल प्लांट बन जाता है तो निश्चित तौर पर बिसौली क्षेत्र का विकास होगा। यदु शुगर मिल बनने के बाद भी इस क्षेत्र को जिले में अलग पहचान मिली है। क्षेत्र के गन्ना किसानों को जहां अपना गन्ना दूसरे स्थानों पर ले जाने को नहीं भटकना पड़ता हैं। वहीं बहुत से लोगों को रोजगार मिला है।
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मिल चल रही है घाटे में यदु शुगर मिल पर गन्ना किसानों का करीब 87 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है। भुगतान पाने को गन्ना किसान कई बार प्रदर्शन के जरिए प्रशासन से मांग कर चुके हैं। घाटे से मिल को उभारने को मिल प्रशासन ने एथेनॉल प्लांट लगाने का फैसला किया है।
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दातागंज में भी प्रस्तावित है एथेनॉल प्लांट
जिले के दातागंज क्षेत्र में भी एथेनॉल प्लांट प्रस्तावित है। इसकी प्रक्रिया शासन स्तर पर चल रही है। कई बार जमीन को देखकर उसकी रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। यदि दातागंज में भी प्लांट बन जाता है तो जिले में दो एथेनॉल प्लांट हो सकते हैं।
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एथेनॉल प्लांट लगाने को आवेदन किया जा चुका है। फाइल आबकारी आयुक्त कार्यालय इलाहाबाद पहुंच चुकी है। लाइसेंस मिलते ही प्लांट का निर्माण शुरू करा दिया जाएगा।
-एचएस गंगवार, यूनिट हेड, यदु शुगर मिल