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540 में 215 किसानों ने जमा की अफीम
अमर उजाला ब्यूरो दातागंज।
Updated Sat, 22 Apr 2017 12:04 AM IST
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- फोटो : Amar Ujala
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-ज्यादातर किसानों ने फसल खराब होने पर करा दी थी नष्ट
-सरकारी मानक पूरा न होने पर लाइसेंस बचाने की जुगत
अफीम किसानों के लिए नारकोटिक्स विभाग की ओर से उत्पादन का मानक बढ़ा दिए जाने से उनके सामने लाइसेंस बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। बरेली और बदायूं के 95 गांवों के 540 अफीम किसानों में से 215 ने ही बाराबंकी स्थित अफीम कार्यालय में अफीम जमा की है। बाकी के किसान पहले ही अपनी फसलों को यह कहकर नष्ट करा चुके हैं कि वह फसल खराब हो गई।
पूरे सूबे में अफीम की खेती पर नारकोटिक्स विभाग बाराबंकी का नियंत्रण रहता है। यहीं से अफीम किसानों के लिए लाइसेंस जारी किए जाते हैं। अब तक उत्पादित अफीम शाहजहांपुर के तिलहर में जमा होती थी। अब तिलहर कार्यालय खत्म कर इसे बाराबंकी से अटैच कर दिया गया है। केंद्र सरकार का मानक कुछ साल पहले तक 40 से 44 प्रतिशत उत्पादन प्रति एरी था। अब इसे बढ़ाकर 54 प्रतिशत प्रति एरी कर दिया गया है। ऐसे में मानक के अनुरूप फसल उत्पादन न होने पर किसान का लाइसेंस निरस्त करने का प्रावधान है। लाइसेंस बचाने के लिए कई किसान पहले ही अर्जी देकर फसल को नष्ट करा देते हैं। इधर डोडा की बिक्री पर पाबंदी होने की वजह से किसानों को अफीम की फसल से नुकसान हो रहा है। गौर करने वाली बात यह है कि अफीम की आपूर्ति पूरी करने के लिए सरकार ने बड़ी संख्या में नए लाइसेंस जारी किए थे। किसान की लागत न निकलने के चलते ज्यादा लाइसेंस देने की नीति फ्लॉप हो रही है। अफीम लंबरदार अनीस खां ने बताया कि पहले किसान डोडा भी बेच लेता था। इसके अलावा अफीम से पोस्ता दाना से भी उसे लाभ होता था। सरकार ने नई नीति के तहत डोडा पर पाबंदी लगा दी है। नष्ट फसल को भी किसान को खेत में ही रखना होगा। बाद में उसका दाना निकाल कर इसे नष्ट करने का प्रावधान है। ऐसे में किसान का अफीम की खेती से मोह भंग होता दिख रहा है।
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-सरकारी मानक पूरा न होने पर लाइसेंस बचाने की जुगत
अफीम किसानों के लिए नारकोटिक्स विभाग की ओर से उत्पादन का मानक बढ़ा दिए जाने से उनके सामने लाइसेंस बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। बरेली और बदायूं के 95 गांवों के 540 अफीम किसानों में से 215 ने ही बाराबंकी स्थित अफीम कार्यालय में अफीम जमा की है। बाकी के किसान पहले ही अपनी फसलों को यह कहकर नष्ट करा चुके हैं कि वह फसल खराब हो गई।
पूरे सूबे में अफीम की खेती पर नारकोटिक्स विभाग बाराबंकी का नियंत्रण रहता है। यहीं से अफीम किसानों के लिए लाइसेंस जारी किए जाते हैं। अब तक उत्पादित अफीम शाहजहांपुर के तिलहर में जमा होती थी। अब तिलहर कार्यालय खत्म कर इसे बाराबंकी से अटैच कर दिया गया है। केंद्र सरकार का मानक कुछ साल पहले तक 40 से 44 प्रतिशत उत्पादन प्रति एरी था। अब इसे बढ़ाकर 54 प्रतिशत प्रति एरी कर दिया गया है। ऐसे में मानक के अनुरूप फसल उत्पादन न होने पर किसान का लाइसेंस निरस्त करने का प्रावधान है। लाइसेंस बचाने के लिए कई किसान पहले ही अर्जी देकर फसल को नष्ट करा देते हैं। इधर डोडा की बिक्री पर पाबंदी होने की वजह से किसानों को अफीम की फसल से नुकसान हो रहा है। गौर करने वाली बात यह है कि अफीम की आपूर्ति पूरी करने के लिए सरकार ने बड़ी संख्या में नए लाइसेंस जारी किए थे। किसान की लागत न निकलने के चलते ज्यादा लाइसेंस देने की नीति फ्लॉप हो रही है। अफीम लंबरदार अनीस खां ने बताया कि पहले किसान डोडा भी बेच लेता था। इसके अलावा अफीम से पोस्ता दाना से भी उसे लाभ होता था। सरकार ने नई नीति के तहत डोडा पर पाबंदी लगा दी है। नष्ट फसल को भी किसान को खेत में ही रखना होगा। बाद में उसका दाना निकाल कर इसे नष्ट करने का प्रावधान है। ऐसे में किसान का अफीम की खेती से मोह भंग होता दिख रहा है।
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