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बरेली के पशु अस्पताल भेजी गईं बीमार गायें
Updated Thu, 28 Dec 2017 12:28 AM IST
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बीमार गायों को देखते विहिप कार्यकर्ता।
- फोटो : अमर उजाला
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उझानी (बदायूं)। गोशाला गेट पर तड़पती बीमार गायों की पीड़ा अमर उजाला के जरिए लोगों तक पहुंचते ही बुुधवार को गो-रक्षक सामने आ गए। उन्होंने गोशाला के गेट पर पहुंचकर हालात की जानकारी की। गो-रक्षक सेवा समिति के प्रदेश अध्यक्ष से वार्ता के बाद विश्व हिंदू परिषद के जिला उपाध्यक्ष अरविंद शर्मा ने गोशाला के अध्यक्ष के समक्ष बीमार गायों का बेहतर इलाज कराने का प्रस्ताव रखा। बाद में गंभीर रूप से बीमार दोनों गायों को इलाज के लिए बरेली में चौबारी स्थित पशु चिकित्सालय भेज दिया गया।
चार दिन पहले अलापुर थाना क्षेत्र में तस्करों के चंगुल से मुक्त कराने के बाद पुलिस करीब 26 गायों को लेकर गोशाला पहुंची थी। गोशाला प्रबंधन ने 15 गायों को तो सुपुर्दगी में ले लिया लेकिन 11 गायों की हालत खराब बताते हुए लेने से इंकार कर दिया था। आरोप है कि पुलिस बीमार गायों को गोशाला गेट पर ही छोड़ गई। बीमार गायों का गोशाला प्रबंधन ने इलाज भी शुरू करा दिया लेकिन इलाज के दौरान एक गाय की मौत हो गई। जबकि गंभीर रूप से बीमार दो गायें सड़क किनारे पड़ी तड़पती रहीं। बुधवार सुबह विहिप के जिला उपाध्यक्ष अरविंद शर्मा और गो-रक्षक उपेंद्र शर्मा के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने गो-रक्षक सेवा समिति के प्रदेश अध्यक्ष बिजेंद्र नागर से बात कर बीमार गायों के बारे में अवगत कराया।
विहिप के जिला उपाध्यक्ष ने गोशाला अध्यक्ष रतन जिंदल से भी वार्ता की। गो-रक्षक सेवा समिति के प्रदेश अध्यक्ष और गोशाला के अध्यक्ष से बातचीत के बाद नाजुक हालत में दोनों गायों को बरेली में चौबारी के पशु चिकित्सालय भेज दिया गया। गोशाला अध्यक्ष ने बताया कि इस पूरे मामले में अलापुर पुलिस की भूमिका संदिग्ध रही है। पुलिस ने बीमार गायों को सुपुर्दगी की औपचारिकता पूरी करने से पहले उनका मेडिकल भी नहीं कराया था। बता दें कि पिछली बार कुंवरगांव पुलिस ने जिन गायों को गोशाला भेजा था, उनमें भी बीमार दो गायों की मौत हो चुकी है।
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गोशाला ने कराया वाहन का इंतजाम
उझानी। गंभीर रूप से बीमार दोनों गायों को इलाज के लिए बरेली में चौबारी के पशु चिकित्सालय भेजने के लिए गोशाला के अध्यक्ष रतन जिंदल ने निजी वाहन का इंतजाम कराया। उन्होंने गोशाला के कर्मचारी को भी गायों के साथ भेजा है। वाहन का खर्चा भी गोशाला वहन करेगी। इसके विपरीत, इलाके के लोगों ने विहिप के जिला उपाध्यक्ष समेत गो-रक्षकों के हौसले पर खुशी व्यक्त की है।
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चार दिन पहले अलापुर थाना क्षेत्र में तस्करों के चंगुल से मुक्त कराने के बाद पुलिस करीब 26 गायों को लेकर गोशाला पहुंची थी। गोशाला प्रबंधन ने 15 गायों को तो सुपुर्दगी में ले लिया लेकिन 11 गायों की हालत खराब बताते हुए लेने से इंकार कर दिया था। आरोप है कि पुलिस बीमार गायों को गोशाला गेट पर ही छोड़ गई। बीमार गायों का गोशाला प्रबंधन ने इलाज भी शुरू करा दिया लेकिन इलाज के दौरान एक गाय की मौत हो गई। जबकि गंभीर रूप से बीमार दो गायें सड़क किनारे पड़ी तड़पती रहीं। बुधवार सुबह विहिप के जिला उपाध्यक्ष अरविंद शर्मा और गो-रक्षक उपेंद्र शर्मा के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने गो-रक्षक सेवा समिति के प्रदेश अध्यक्ष बिजेंद्र नागर से बात कर बीमार गायों के बारे में अवगत कराया।
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विहिप के जिला उपाध्यक्ष ने गोशाला अध्यक्ष रतन जिंदल से भी वार्ता की। गो-रक्षक सेवा समिति के प्रदेश अध्यक्ष और गोशाला के अध्यक्ष से बातचीत के बाद नाजुक हालत में दोनों गायों को बरेली में चौबारी के पशु चिकित्सालय भेज दिया गया। गोशाला अध्यक्ष ने बताया कि इस पूरे मामले में अलापुर पुलिस की भूमिका संदिग्ध रही है। पुलिस ने बीमार गायों को सुपुर्दगी की औपचारिकता पूरी करने से पहले उनका मेडिकल भी नहीं कराया था। बता दें कि पिछली बार कुंवरगांव पुलिस ने जिन गायों को गोशाला भेजा था, उनमें भी बीमार दो गायों की मौत हो चुकी है।
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गोशाला ने कराया वाहन का इंतजाम
उझानी। गंभीर रूप से बीमार दोनों गायों को इलाज के लिए बरेली में चौबारी के पशु चिकित्सालय भेजने के लिए गोशाला के अध्यक्ष रतन जिंदल ने निजी वाहन का इंतजाम कराया। उन्होंने गोशाला के कर्मचारी को भी गायों के साथ भेजा है। वाहन का खर्चा भी गोशाला वहन करेगी। इसके विपरीत, इलाके के लोगों ने विहिप के जिला उपाध्यक्ष समेत गो-रक्षकों के हौसले पर खुशी व्यक्त की है।