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बेटी के हाथ तो पीले किए...शादी में लिया कर्जा नहीं उतार पाया हेमराज
Updated Tue, 22 Aug 2017 10:03 AM IST
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अवनेश राठौर
सिलहरी।
बेटी के हाथ तो पीले कर दिए मगर शादी में लिया गया कर्ज नहीं उतार पाया। सारे रास्ते जब बंद हो गए तो उसने मौत को गले लगा लिया। हेमराज की मौत पर हर व्यक्ति गमजदा है।
कुंवरगांव थाना क्षेत्र के गांव बल्लिया में मातम पसरा हुआ है। गरीबी इंसान को कहां तक ले जा सकती है हेमराज की मौत से साफ हो गया है। बेटी संतोष की शादी हेमराज ने जून में धूमधाम से की। परिवार की माली हालत ठीक नहीं होने के बाद भी हेमराज ने बेटी संतोष को कभी ऐसा एहसास नहीं होने दिया कि वह शादी में किसी तरह की कमी छोडे़ंगे। सो उन्होंने कर्जा लेकर शादी की। बेटी अपने ससुराल चली गई, लेकिन शादी के बाद से हेमराज चैन से सो नहीं सके क्योंकि कर्जे में वह इतना डूबे हुए थे कि कर्ज चुकाने का उन्हें कोई रास्ता ही नहीं आ रहा था। गांव वालों की बातों को यदि सच मानें तो बीते कुछ दिनों से हेमराज हर समय गुमसुम रहते थे वह किसी से बात तक नहीं करते थे। गांव का व्यक्ति यदि कोई उनसे बात करता तो वह चिढ़ से जाते थे। लोग नहीं समझ पा रहे थे कि आखिर उनमें एकाएक इतना बदलाव क्यों आया। छप्परनुमा घर में रहने वाले हेमराज आठ दिन पहले चले गए। लोगों ने तलाश किया मगर वह नहीं मिले। मिला तो उनका शव।
--
तो सरकारी योजनाओं का लाभ क्यों नहीं मिला
सिलहरी। मृतक हेमराज की माली हालत किसी से छिपी नहीं है। मात्र साढ़े तीन बीघा जमीन। वृद्ध होने के बाद भी वह मजदूरी करके परिवार चला रहे थे। घर वालों ने बताया कि किसी भी सरकारी योजना का लाभ उन्हें नहीं मिल रहा था।
सिलहरी।
बेटी के हाथ तो पीले कर दिए मगर शादी में लिया गया कर्ज नहीं उतार पाया। सारे रास्ते जब बंद हो गए तो उसने मौत को गले लगा लिया। हेमराज की मौत पर हर व्यक्ति गमजदा है।
कुंवरगांव थाना क्षेत्र के गांव बल्लिया में मातम पसरा हुआ है। गरीबी इंसान को कहां तक ले जा सकती है हेमराज की मौत से साफ हो गया है। बेटी संतोष की शादी हेमराज ने जून में धूमधाम से की। परिवार की माली हालत ठीक नहीं होने के बाद भी हेमराज ने बेटी संतोष को कभी ऐसा एहसास नहीं होने दिया कि वह शादी में किसी तरह की कमी छोडे़ंगे। सो उन्होंने कर्जा लेकर शादी की। बेटी अपने ससुराल चली गई, लेकिन शादी के बाद से हेमराज चैन से सो नहीं सके क्योंकि कर्जे में वह इतना डूबे हुए थे कि कर्ज चुकाने का उन्हें कोई रास्ता ही नहीं आ रहा था। गांव वालों की बातों को यदि सच मानें तो बीते कुछ दिनों से हेमराज हर समय गुमसुम रहते थे वह किसी से बात तक नहीं करते थे। गांव का व्यक्ति यदि कोई उनसे बात करता तो वह चिढ़ से जाते थे। लोग नहीं समझ पा रहे थे कि आखिर उनमें एकाएक इतना बदलाव क्यों आया। छप्परनुमा घर में रहने वाले हेमराज आठ दिन पहले चले गए। लोगों ने तलाश किया मगर वह नहीं मिले। मिला तो उनका शव।
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तो सरकारी योजनाओं का लाभ क्यों नहीं मिला
सिलहरी। मृतक हेमराज की माली हालत किसी से छिपी नहीं है। मात्र साढ़े तीन बीघा जमीन। वृद्ध होने के बाद भी वह मजदूरी करके परिवार चला रहे थे। घर वालों ने बताया कि किसी भी सरकारी योजना का लाभ उन्हें नहीं मिल रहा था।
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