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जिला अस्पताल में ठिठुर रहे मरीज
Updated Tue, 27 Nov 2018 09:27 PM IST
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बदायूं। कहने को जिला अस्पताल जिला मुख्यालय पर स्थित है। डीएम से लेकर सभी प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की नजर है, बावजूद इसके मरीज ठंड में ठिठुरने को मजबूर हैं। वजह, मरीजों को ऐसे फटे-पुराने कंबल दिए गए हैं, अगर वे दो भी ओढ़ लें तो भी ठंड दूर नहीं होगी। वे अपने घर से कपड़े लाकर काम चला रहे हैं। वहीं दूसरी ओर अस्पताल की उन दीवारों पर पुताई करवाई जा रही है जहां चार माह पहले ही हुई थी।
जिला अस्पताल में एक दिन पहले शुरू हुई रंगाई-पुताई को पैसे की बर्बादी या कमीशनबाजी का खेल कहा जा सकता है। जिला अस्पताल की बिल्डिंग अब भी चमक रही है। थोड़ा अंतर यह है कि छत के किनारे थोड़े से काले हो गए हैं। यहां बता दें कि चार माह पूर्व जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बदायूं आए थे तो पूरी बिल्डिंग की रंगाई-पुताई हुई थी। अब उसी के ऊपर दोबारा फिर से पुताई शुरू करा दी गई है। इसके विपरीत दूसरी ओर मरीज किस हालत में रात गुजार रहे हैं इसकी किसी को फिक्र नहीं है। इस समय काफी ठंड है, बावजूद इसके अस्पताल में भर्ती मरीजों को फटे-पुराने कंबल दिए गए हैं। इन कंबलों में एक नहीं, दो-दो, तीन-तीन जगह छेद हैं। कई जगह से फटे हुए भी हैं। इतने घिस गए हैं, जिससे आरपार का भी दिख रहा है। यानि अगर मरीज दो कंबल भी ओढ़ ले तो भी ठंड दूर नहीं होने वाली। यह फटे-पुराने कंबल देकर एक प्रकार से खानापूर्ति की जा रही है। ऐसे में जो लोग मजबूत हैं, वह रजाई और कंबल घर से लाकर काम चला रहे हैं।
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अच्छे तार हटाकर घटिया तारों से फिटिंग
जिला अस्पताल में बिजली फिटिंग का कार्य भी चल रहा है। ओपीडी में पहले लोहे के पाइप डालकर और अच्छे तारों से बिजली फिटिंग हुई थी। अब तक उसी फिटिंग से पूरी ओपीडी में सप्लाई जा रही थी। उसमें कॉपर का मोटा तार था, उसे हटाकर घटिया क्वालिटी का तार लगाया जा रहा है। जो तार हटाया जा चुका है, उसे और लोहे के पाइप कहां गए, किसी को जानकारी नहीं है।
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पिछले साल खरीदे गए थे कंबल
जिला अस्पताल में तौलिया और साबुन खरीद घोटाला हो चुका है। कंबल भी पिछले साल खरीदे गए थे। उनका रंग मटमैले कलर का था। मरीजों को जो फटे-पुराने कंबल दिए गए हैं, यह लाल रंग के हैं। इस समय किसी मरीज के पास मटमैले रंग का कोई कंबल नहीं है। वह कहां गए, इसके बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं है।
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मरीजों को पुराने कंबल दिए गए हैं इसकी मुझे जानकारी नहीं है। पिछले साल कंबल खरीदे गए थे या नहीं, यह मेरे समय का मामला नहीं है। अस्पताल में जो कार्य चल रहे हैं। वह हम खुद करा रहे हैं। बिजली फिटिंग जरूरी थी, इसलिए कराई जा रही है।
-डॉ. भारत भूषण पुष्कर, सीएमएस, जिला अस्पताल
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जिला अस्पताल में एक दिन पहले शुरू हुई रंगाई-पुताई को पैसे की बर्बादी या कमीशनबाजी का खेल कहा जा सकता है। जिला अस्पताल की बिल्डिंग अब भी चमक रही है। थोड़ा अंतर यह है कि छत के किनारे थोड़े से काले हो गए हैं। यहां बता दें कि चार माह पूर्व जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बदायूं आए थे तो पूरी बिल्डिंग की रंगाई-पुताई हुई थी। अब उसी के ऊपर दोबारा फिर से पुताई शुरू करा दी गई है। इसके विपरीत दूसरी ओर मरीज किस हालत में रात गुजार रहे हैं इसकी किसी को फिक्र नहीं है। इस समय काफी ठंड है, बावजूद इसके अस्पताल में भर्ती मरीजों को फटे-पुराने कंबल दिए गए हैं। इन कंबलों में एक नहीं, दो-दो, तीन-तीन जगह छेद हैं। कई जगह से फटे हुए भी हैं। इतने घिस गए हैं, जिससे आरपार का भी दिख रहा है। यानि अगर मरीज दो कंबल भी ओढ़ ले तो भी ठंड दूर नहीं होने वाली। यह फटे-पुराने कंबल देकर एक प्रकार से खानापूर्ति की जा रही है। ऐसे में जो लोग मजबूत हैं, वह रजाई और कंबल घर से लाकर काम चला रहे हैं।
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अच्छे तार हटाकर घटिया तारों से फिटिंग
जिला अस्पताल में बिजली फिटिंग का कार्य भी चल रहा है। ओपीडी में पहले लोहे के पाइप डालकर और अच्छे तारों से बिजली फिटिंग हुई थी। अब तक उसी फिटिंग से पूरी ओपीडी में सप्लाई जा रही थी। उसमें कॉपर का मोटा तार था, उसे हटाकर घटिया क्वालिटी का तार लगाया जा रहा है। जो तार हटाया जा चुका है, उसे और लोहे के पाइप कहां गए, किसी को जानकारी नहीं है।
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पिछले साल खरीदे गए थे कंबल
जिला अस्पताल में तौलिया और साबुन खरीद घोटाला हो चुका है। कंबल भी पिछले साल खरीदे गए थे। उनका रंग मटमैले कलर का था। मरीजों को जो फटे-पुराने कंबल दिए गए हैं, यह लाल रंग के हैं। इस समय किसी मरीज के पास मटमैले रंग का कोई कंबल नहीं है। वह कहां गए, इसके बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं है।
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मरीजों को पुराने कंबल दिए गए हैं इसकी मुझे जानकारी नहीं है। पिछले साल कंबल खरीदे गए थे या नहीं, यह मेरे समय का मामला नहीं है। अस्पताल में जो कार्य चल रहे हैं। वह हम खुद करा रहे हैं। बिजली फिटिंग जरूरी थी, इसलिए कराई जा रही है।
-डॉ. भारत भूषण पुष्कर, सीएमएस, जिला अस्पताल