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डॉक्टर को दिखाने से पहले पर्चे पर लिखी जाएगी बच्चों की चेकअप रिपोर्ट
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बदायूं। बुधवार सुबह जिला अस्पताल पहुंचे ज्वाइंट डायरेक्टर हरीश चंद्रा ने ओपीडी का निरीक्षण किया। उन्होंने बच्चों के लिए ओपीडी में एक चेकअप रूप बनाने का निर्देश दिया। कहा कि पहले बच्चों का चेकअप होगा, उसकी रिपोर्ट पर्चे पर लिखी जाएगी, तब डॉक्टर बच्चे को देखकर दवा लिखेंगे। इससे डॉक्टर को परेशानी नहीं होगी और न ही बीमार बच्चे को भटकना पड़ेगा।
ज्वाइंट डायरेक्टर डॉ. चंद्रा बुधवार सुबह करीब 11 बजे जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने सीएमएस डॉ. भारत भूषण पुष्कर और अस्पताल प्रबंधक को दिशा निर्देश देते हुए बताया कि बीमार बच्चों के परिवार वाले पर्चा लेकर सीधे लाइन में लग जाते हैं। डॉक्टर को बच्चों का वजन तौलना पड़ता है। उनका बुखार नापना पड़ता है, साथ ही उनकी पल्स, ब्लड प्रेशर, धड़कन आदि चेक करने के लिए अधिक समय खर्च करना पड़ता है। बीमार बच्चों को और जल्दी लाभ मिल सके, इसके लिए ओपीडी के अंदर एक चेकअप रूम बनाया जाएगा। पर्चे के साथ तीमारदार सीधे अपने बच्चों को लेकर चेकअप रूम में पहुंचेंगे, जहां उनका बुखार आदि माप लिया जाएगा। उनका वजन चेक कर लिया जाएगा। इससे मरीज और डॉक्टर का समय बचेगा। डॉक्टर को इलाज करने में और आसानी होगी। इसके लिए रोगी सहायता केंद्र की डेस्क हटाई जाएगी। ओपीडी में उस जगह पुताई कराई जाएगी। बच्चों के पोस्टर आदि लगाए जाएंगे, जिससे लगे कि यहां छोटे बच्चों का इलाज होता है। जेडी ने इसके लिए पंद्रह दिन का समय दिया है। उन्होंने कहा कि वह पंद्रह दिन बाद फिर ओपीडी का निरीक्षण करेंगे। तब तक यह कार्य शुरू हो जाए, अन्यथा वह अस्पताल प्रशासन की लापरवाही की रिपोर्ट बनाकर उच्चाधिकारियों को भेज देंगे। चेकअप रूम बनाने के निर्देश देने के बाद वह बरेली के लिए रवाना हो गए।
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ज्वाइंट डायरेक्टर डॉ. चंद्रा बुधवार सुबह करीब 11 बजे जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने सीएमएस डॉ. भारत भूषण पुष्कर और अस्पताल प्रबंधक को दिशा निर्देश देते हुए बताया कि बीमार बच्चों के परिवार वाले पर्चा लेकर सीधे लाइन में लग जाते हैं। डॉक्टर को बच्चों का वजन तौलना पड़ता है। उनका बुखार नापना पड़ता है, साथ ही उनकी पल्स, ब्लड प्रेशर, धड़कन आदि चेक करने के लिए अधिक समय खर्च करना पड़ता है। बीमार बच्चों को और जल्दी लाभ मिल सके, इसके लिए ओपीडी के अंदर एक चेकअप रूम बनाया जाएगा। पर्चे के साथ तीमारदार सीधे अपने बच्चों को लेकर चेकअप रूम में पहुंचेंगे, जहां उनका बुखार आदि माप लिया जाएगा। उनका वजन चेक कर लिया जाएगा। इससे मरीज और डॉक्टर का समय बचेगा। डॉक्टर को इलाज करने में और आसानी होगी। इसके लिए रोगी सहायता केंद्र की डेस्क हटाई जाएगी। ओपीडी में उस जगह पुताई कराई जाएगी। बच्चों के पोस्टर आदि लगाए जाएंगे, जिससे लगे कि यहां छोटे बच्चों का इलाज होता है। जेडी ने इसके लिए पंद्रह दिन का समय दिया है। उन्होंने कहा कि वह पंद्रह दिन बाद फिर ओपीडी का निरीक्षण करेंगे। तब तक यह कार्य शुरू हो जाए, अन्यथा वह अस्पताल प्रशासन की लापरवाही की रिपोर्ट बनाकर उच्चाधिकारियों को भेज देंगे। चेकअप रूम बनाने के निर्देश देने के बाद वह बरेली के लिए रवाना हो गए।
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