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शिक्षक बनकर डीएम ने बच्चों को पढ़ाया
Updated Thu, 07 Dec 2017 12:03 AM IST
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डीएम ने बच्चों को पढ़ाया
- फोटो : अमर उजाला
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बदायूं। डीएम की सख्ती के बाद जिले के कई स्कूलों की स्थिति सुधरी है। बुधवार को दुगरैया उच्च प्राथमिक स्कूल के बच्चों ने डीएम दिनेश कुमार सिंह के सारे सवालों के जवाब दिए। यहां बच्चों की उपस्थिति कम मिली। जिस पर डीएम ने नाराजगी जताई।
बुधवार दिन में करीब एक बजे का समय होगा। सहकारी समितियों का निरीक्षण करने निकले डीएम अचानक उच्च प्राथमिक विद्यालय दुगरैया जा पहुंचे। बाहर से देखने पर स्कूल मॉर्डन लगा। स्कूल परिसर में घुसने के बाद डीएम सीधे छठी कक्षा में जा घुसे। डीएम ने सवाल किया- 69 में कितनी इकाई और कितनी दहाई होती है? बच्चों ने इसका सही जवाब दिया। इसके बाद डीएम ने कई सवाल पूछे, जो बच्चों ने आसानी से बता दिए। राइटिंग परखने के लिए ब्लैक बोर्ड पर खुद भी लिखा और बच्चों से लिखवाया। इसके बाद वह कक्षा सात और आठ में गए और बच्चों से तरह-तरह के सवाल किए। किताब उठाकर खुद भी पढ़ाया। बच्चों को प्रतिदिन स्वच्छ रहने, शौचालय की सफाई, घर के बड़े सदस्यों के पैर छूने सहित दैनिक क्रियाओं के बारे में पूछा। टीचर्स के कहने पर बच्चे झूठ तो नहीं बोल रहे यह जानने के लिए फोन पर उनके घरवालों से भी बात की।
प्रधानाचार्य कल्याण दास गुप्ता को निर्देश दिए कि बच्चों को शिक्षा एवं संस्कार अच्छे तरीके से दिए जाएं। उन्होंने बच्चों से यह भी कहा कि स्कूल में पढ़ाए गए पाठ को घर में जाकर दोबारा अवश्य पढ़ें। उपस्थिति कम देखकर नाराजगी व्यक्त करते हुए प्रधानाचार्य को निर्देश दिए कि बच्चों की उपस्थिति शत-प्रतिशत पूर्ण की जाए। मिड्डे मील मेन्यू का भी निरीक्षण किया। वहां पर उपस्थित गांव के लोगों से वार्ता करते हुए कहा कि अपने-अपने घरों में शौचालय अवश्य बनाएं और उसका प्रयोग करें।
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बुधवार दिन में करीब एक बजे का समय होगा। सहकारी समितियों का निरीक्षण करने निकले डीएम अचानक उच्च प्राथमिक विद्यालय दुगरैया जा पहुंचे। बाहर से देखने पर स्कूल मॉर्डन लगा। स्कूल परिसर में घुसने के बाद डीएम सीधे छठी कक्षा में जा घुसे। डीएम ने सवाल किया- 69 में कितनी इकाई और कितनी दहाई होती है? बच्चों ने इसका सही जवाब दिया। इसके बाद डीएम ने कई सवाल पूछे, जो बच्चों ने आसानी से बता दिए। राइटिंग परखने के लिए ब्लैक बोर्ड पर खुद भी लिखा और बच्चों से लिखवाया। इसके बाद वह कक्षा सात और आठ में गए और बच्चों से तरह-तरह के सवाल किए। किताब उठाकर खुद भी पढ़ाया। बच्चों को प्रतिदिन स्वच्छ रहने, शौचालय की सफाई, घर के बड़े सदस्यों के पैर छूने सहित दैनिक क्रियाओं के बारे में पूछा। टीचर्स के कहने पर बच्चे झूठ तो नहीं बोल रहे यह जानने के लिए फोन पर उनके घरवालों से भी बात की।
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प्रधानाचार्य कल्याण दास गुप्ता को निर्देश दिए कि बच्चों को शिक्षा एवं संस्कार अच्छे तरीके से दिए जाएं। उन्होंने बच्चों से यह भी कहा कि स्कूल में पढ़ाए गए पाठ को घर में जाकर दोबारा अवश्य पढ़ें। उपस्थिति कम देखकर नाराजगी व्यक्त करते हुए प्रधानाचार्य को निर्देश दिए कि बच्चों की उपस्थिति शत-प्रतिशत पूर्ण की जाए। मिड्डे मील मेन्यू का भी निरीक्षण किया। वहां पर उपस्थित गांव के लोगों से वार्ता करते हुए कहा कि अपने-अपने घरों में शौचालय अवश्य बनाएं और उसका प्रयोग करें।
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