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बुखार से जिला अस्पताल के हालात बदतर, मरीज भर्ती होना मुश्किल

Mon, 03 Sep 2018 11:28 PM IST
Updated Mon, 03 Sep 2018 11:28 PM IST
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बुखार से जिला अस्पताल के हालात बदतर, मरीज भर्ती होना मुश्किल
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बुखार से जिला अस्पताल के हालात बदतर, मरीज भर्ती होना मुश्किल
सिफारिशों से भर्ती हो रहे मरीज, तीमारदारों की बेंचों पर लेट रहे मरीज, जमीन पर इलाज की नौवत अमर उजाला ब्यूरो बदायूं। जिले में एक ओर बुखार से लोग तड़प रहे हैं, अपनी जान गवां रहे हैं। वहीं दूसरी ओर जिला अस्पताल के हालात बद से बदतर हो गए हैं। अस्पताल के सभी वार्डों के बैड फुल हैं। तीमारदारों को बैठने तक की जगह नहीं है। तीमारदार जहां-तहां बैठ कर समय गुजार रहे हैं। उनकी बेंचों पर मरीज भर्ती हो रहे हैं। अगर ऐसी ही हालत रही तो मरीजों को जमीन पर लिटाने की नौबत आ जाएगी। अभी हालत ऐसी है कि मरीजों का इलाज तो दूर, उनको भर्ती करना तक मुश्किल है। इसके लिए सिफारिशें तक आ रहीं हैं।
जिस तरह स्वास्थ्य विभाग बुखार को लेकर अलर्ट नहीं हुआ और न ही कोई पहले से तैयारी की। उसी तरह जिला अस्पताल प्रशासन कम लापरवाह नहीं है। अभी दो दिन पहले ज्वाइंट डायरेक्टर हरीश चंद्रा ने निरीक्षण करते वक्त सीएमएस से कहा था कि जिले में फैले बुखार से वह भी अलर्ट हो जाएं। स्थिति गंभीर हो उससे पहले वह डेंगू और मलेरिया वार्ड तैयार कर लें। उनमें साफ-सफाई करा दें, जिससे मरीजों को इंफेक्शन न हो और उनका स्वच्छता पूर्वक इलाज हो सके। जिला अस्पताल के सीएमएस ने वार्ड के बाहर डेंगू वार्ड का नोटिस तो लगवा दिया परंतु वार्डों में कोई तैयारी नहीं कराई और न ही साफ-सफाई कराई। आज भी दोनों वार्ड जैसे के तैसे पड़े हैं। बाकी वार्डों की हालत भी बद से बदतर है। अस्पताल में एक भी वार्ड खाली नहीं है। सभी वार्डों के बैड फुल हो चुके हैं। हालात यह हैं कि वार्डों में तीमारदारों को डाली गई बेंचें भी फुल हो गई हैं। उन पर भी मरीजों का इलाज किया जा रहा है। अब अस्पताल की ऐसी कंडीशन हो गई है कि मरीजों को भर्ती कराना तो दूर इलाज कराना तक मुश्किल है। सोमवार को दर्जनों मरीज बैरंग लौट गए। उन्हें भर्ती नहीं किया जा सका। वहीं दूसरी ओर कुछ मरीजों को सिफारिश पर भर्ती किया गया। क्षय रोग विभाग में कार्यरत एक कर्मचारी के रिश्तेदार तक भर्ती नहीं हुआ। वह रोष प्रकट करता हुआ बैरंग लौट गया।
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हालत खस्ता, फिर भी इलाज का दावा
जिला अस्पताल में कुल 234 बैड हैं। इस समय कम से कम 400 मरीज भर्ती हैं। हालत खस्ता है, लापरवाही में कोई कमी नहीं है। इसके बावजूद जिला प्रशासन को जताने के लिए और मरीजों के इलाज का दावा है। जो मरीज भर्ती हैं, उनकी हालत सुधर नहीं रही है। इन हालात में अस्पताल प्रशासन दिखावटी इलाज कर रहा है।
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इमरजेंसी में रख लिए खाली ऑक्सीजन सिलेंडर वैसे जिले में बुखार से हालात बहुत खराब है। ऐसे में जिला अस्पताल को दवाई से लेकर ऑक्सीजन सिलेंडर तक तैयार रखने की जरूरत है। इसके बावजूद न तो सिलेंडर में ऑक्सीजन है और न ही अस्पताल में पर्याप्त दवाई। सोमवार को इमरजेंसी में जो ऑक्सीजन सिलेंडर रखे थे। वह खाली थे। गनीमत रही कि उस दौरान किसी को ऑक्सीजन की जरूरत नहीं पड़ी, नहीं तो जिंदगी मौत से जूझना पड़ता।

जिला अस्पताल से प्रमुख दवाइयां खत्म
जिला अस्पताल जिले का केंद्र बिंदु है। उसी में प्रमुख दवाओं का टोटा हो गया है। मरीजों को बाहर की दवाएं लिखी जा रही हैं। ऐसे में गरीब मरीजों की किल्लत हो गई है। वह न तो दवा खरीद पा रहे हैं और न ही उन्हें अस्पताल से मिल रही है।

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तड़पती रही बालिका, राजनीति करता रहा डॉक्टर बदायूं। अब कहने को जिला अस्पताल गरीबों के लिए रह गया है। हकीकत में यहां के हालात कुछ और हो चुके हैं। इलाज के नाम पर राजनीति हो रही है। डॉक्टर भी राजनीति करने से नहीं चूक रहे हैं। यहां सबसे अधिक अव्यवस्था भाजपा विधायक के करीबी डॉक्टर की वजह से है। सोमवार सुबह इमरजेंसी के हालात कुछ इस कदर थे कि ड्यूटी तो डॉ. जीके गुप्ता की थी। वह बेंच पर पहले से लेटे मरीजों को भर्ती करने की कार्रवाई कर रहे थे। उनका इलाज लिख रहे थे। तभी भाजपा विधायक के करीबी डॉक्टर ने पहुंचकर इमरजेंसी की व्यवस्था और बिगाड़ दी। डॉक्टर अपने मरीजों को देखने में व्यस्त हो गए। जबकि बेंच पर लेटे मरीज तड़पते रहे। इससे डॉ. जीके गुप्ता को इमरजेंसी से हटना पड़ा। करीब एक घंटे तक इमरजेंसी में ऐसी अफरा-तफरी रही कि उस दौरान कोई और मरीज भर्ती ही नहीं किया गया। उस दौरान वही मरीज भर्ती हुए जो भाजपा विधायक के करीबी थे या फिर विधायक करीबी डॉक्टर से परिचित थे। उसी दौरान एक बालिका इमरजेंसी के बाहर जमीन पर तड़प रही थी। डॉक्टर को विधायक जी के वोट बैंक की चिंता थी। मरीज के इलाज की कोई चिंता नहीं थी। बाद में थक हारकर परिवार वाले बालिका को किसी दूसरे अस्पताल ले ही गए और डॉक्टर वाहवाही लूटने में लगा रहा।

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चौबीस घंटों में दो बच्चियों की मौत
दातागंज/ उसावां। ब्लाक म्याऊ क्षेत्र के ग्राम लभारी में चौबीस घंटे में दो बच्चियों की मौत हो गई। छह वर्षीय बालिका सुनैना तीन दिन से बीमार थी। परिवार वाले इलाज कराने बदायूं ले जा रहे थे कि रास्ते में उसकी मृत्यु हो गई। सोमवार सुबह ग्रामीणों की सूचना पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की टीम गांव पहुंची और कैंप लगाकर लोगों को दवा बांटी। कुछ लोगों के ब्लड चेक किए।


ककराला में बुखार से दूसरी मौत
ककराला। अब ककराला में भी बुखार अपना असर दिखा रहा है। वार्ड नंबर 24 निवासी आलम खां के बेटे नोमान खान की बुखार से मौत हुई है। इससे पहले भी एक युवक की बुखार से मौत हुई थी। जिससे कस्बे में बुखार से लोग डरने लगे हैं। ककराला निवासी डॉ. खालिद नईम ने नगरवासियों से बुखार से बचने के लिए अपने घर और आस-पास सफाई रखने, खाना ढककर रखने, बासी खाना नहीं खाने, पानी को उबालकर पीने की अपील की है।

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दिल्ली से लौटते ही बुखार ने जकड़ा, मौत
वजीरगंज। विकास खंड क्षेत्र के ग्राम हतरा निवासी बाबू खान का 19 वर्षीय बेटा आमिर खान तीन दिन पहले दिल्ली से लौटा था। तभी उसे तेज बुखार आ गया। कल सुबह परिजन उसे प्राइवेट अस्पताल ले गए। डॉक्टर ने मना कर दिया तो परिजन उसे दिल्ली ले जा रहे थे, देर रात उसकी रास्ते में मौत हो गई। इससे युवक के परिवार में कोहराम मच गया है।
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...तो अंधेरे में इलाज कर रहा स्वास्थ्य विभाग!
विभागीय जांच में मलेरिया की पुष्टि
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। जिले में एक तरफ बुखार से लोग मर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग इलाज का दावा कर रहा है। इधर, स्वास्थ्य विभाग पर ही सवाल उठने लगे हैं। गतवर्ष के रिकार्ड पर गौर करें तो इसी तरह बुखार से दर्जनों लोगों की मौत हुई थी। स्वास्थ्य विभाग वायरल बुखार का दावा करता रहा परंतु जांच में फैंसी फेरम मलेरिया निकला। ऐसा तो नहीं कि इस बार भी स्वास्थ्य विभाग मलेरिया-मलेरिया कह रहा हो और लोग किसी दूसरी वजह के शिकार हो रहे हों।
पिछले साल जिले के जगत, समरेर, म्याऊ और वजीरगंज ब्लाक क्षेत्र में बुखार फैला था। उसकी चपेट में आने से दर्जनों लोगों की मौत हुई थी। स्वास्थ्य विभाग की टीम मलेरिया और साधारण मलेरिया का इलाज करने में लगी रही। उस दौरान एक स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात लैब टैक्नीशियन ने एक नहीं कई मरीजों का ब्लड चेक किया था। उसकी जांच में फैंसी फेरम मलेरिया की पुष्टि हुई थी। जबकि दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग अंधेरे में लोगों का इलाज करता रहा। जब फैंसी फेरम मलेरिया की बात सीएमओ के पास पहुंची तो उन्होंने लैब टैक्नीशियन को ही रडार पर ले लिया और उसका दूसरी जगह ट्रांसफर कर दिया। इस बार भी विभागीय टीमों में दर्जनों लोगों का किट से ब्लड चेक किया है। हालांकि उनमें मलेरिया की पुष्टि हुई है।



वर्जन-
बुखार कोई बीमारी नहीं है। बुखार तो कभी भी आ सकता है। अभी तक जिन मरीजों की जांच कराई गई हैं। उनमें मलेरिया ही निकला है, जो सामान्य सा बुखार है। इसके बावजूद मौत क्यों हो रहीं हैं? इसके बहुत से कारण हैं। सफाई नहीं है, मच्छर हैं। फिर भी हम कोशिश में लगे हैं। - डॉ. अनिल शर्मा, प्रभारी सीएमओ
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