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क्या ऐसे ही मनाया जाएगा वन महोत्सव सप्ताह
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बदायूं
Updated Mon, 02 Jul 2018 11:27 PM IST
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पर्यावरण को लेकर आज हर कोई चिंतित है। प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र में यह एक गंभीर समस्या बनी हुई है, दो दशकों से जिस तरह पेड़ों को अंधाधुंध कटान हुआ है। उससे जन सामान्य को शुद्ध वायु नही मिल पा रही है तो दूसरी बड़ी समस्या मानसून की भी है। जिसकी वजह से गत कई सालों से देखने में आया है कि सामान्य से कम वर्षा हो रही है। उसका पूरा प्रभाव आम आदमी के जीवन पर पड़ रहा है। हालात पर यदि काबू नहीं पाए गए तो वे दिन दूर नहीं जब आने वाली पीढ़ियों को ठीक से पीने को पानी भी मयस्सर न हो। इस समस्या को दूर करने के लिए सरकारें योजनाएं बनाती हैं और योजनाओं के मुताबिक धरातल पर काम हो उसके लिए महकमे के आला अफसरों को आदेश भी दिए जाते हैं। शासन के उन आदेशों का किस तरह अनुपालन होता है इसका सहज अंदाजा भी लगाया जा सकता है। पर्यावरण के लिए सरकार हर साल वन महोत्सव सप्ताह चलाती है इस साल भी यह सप्ताह पहली जुलाई से शुरू हो गया है। इस सप्ताह का मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक पौधे लगाने का है। शासन की ओर से बाकायदा हर जिले के लिए एक लक्ष्य निर्धारित किया जाता है कि जिले में इस सप्ताह में कितने पौधे लगाए जाएंगे।
क्लीन इंडिया, ग्रीन इंडिया का नारा देकर जन प्रतिनिधि भी कार्यक्रमों के जरिए जनता का आह्वान करते हैं कि वे एक पौधा अवश्य लगाएं और उस पौधे की एक सेवा उसी तरह करें जैसे माता पिता अपनी संतान की करते हैं। इसके पीछे जन प्रतिनिधि तर्क देते हैं कि बच्चा बड़ा होकर अपने माता पिता की सेवा करता है उसी तरह एक नन्हा पौधा वट वृक्ष बनकर सभी के लिए शुद्ध वायु देता है जो एक जीवन के लिए सबसे बहुमूल्य होती है।
एक जुलाई से चल रहे वन महोत्सव सप्ताह पर अगर गौर करें तो जिले में यह अब तक हवा हवाई रहा है। वन विभाग भले ही दावे कर रहा हो कि वह अपने वन रेंज क्षेत्र में पौधरोपण करा रहा है लेकिन दो दिन के अंदर कितने पौधे लगाए गए हैं इसकी जानकारी किसी के पास नही है।
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मनाया जा रहा वन महोत्सव और कर्मचारी मना रहे छुट्टी
शासनादेश के अनुसार किसी बड़े कार्यक्रम के दौरान किसी भी विभागीय अधिकारी और कर्मचारी को अवकाश देने का प्रावधान नहीं है, लेकिन यहां शासनादेश की अवमानना कर कई विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को अवकाश दे दिया गया है। जिस कारण विभागीय कार्यालय में अधिकतर कुर्सियां खाली पड़ी हैं। वही वन विभाग अधिकारी के ऑफिस पर भी ताला लटक रहा है।
पर्यावरण संरक्षण के लिए पिछले 20 वर्षों से मुहिम चला रहे वरिष्ठ साहित्यकार और हिन्दी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.शैलेन्द्र कबीर का कहना है कि आज भारत ही नहीं पूरा विश्व पर्यावरण प्रदूषण से आक्रांत है। जल, ध्वनि, वायु और मिट्टी का प्रदूषण लगातार बढ़ता जा रहा है।
निरंतर बढ़ता तापमान, घटता जलस्तर, मौसम में बदलाव प्रदूषण का खुला संकेत दे रहे है। नदियां सिकुड़कर लगातार छोटी होती जा रही हैं। वायुमंडल में अशुद्ध गैसों की मात्रा बढ़ती जा रही है, अगर अब भी नहीं जागे तो बहुत कुछ खोना पड़ेगा, जिसमें स्वास्थ्य पर काफी असर पड़ेगा। आवश्यकता इस बात की है कि अब अधिक से अधिक पौधरोपण करें।
वन महोत्सव को लेकर पूर्व में ही कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार कर ली गई थी, समस्त रेंजों में पौधरोपण कराया जा रहा है। पांच जुलाई को बदायूं रेंज में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें व्यापक रूप से पौधरोपण कराया जाएगा। अभी कार्यभार ग्रहण किए दो सप्ताह का समय हुआ है जो भी विभागीय कर्मचारी अवकाश पर हैं उनको अवकाश पूर्व में स्वीकृत हुआ था लेकिन फिर भी संबंधितों से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।
-ईशा तिवारी, डीएफओ
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क्लीन इंडिया, ग्रीन इंडिया का नारा देकर जन प्रतिनिधि भी कार्यक्रमों के जरिए जनता का आह्वान करते हैं कि वे एक पौधा अवश्य लगाएं और उस पौधे की एक सेवा उसी तरह करें जैसे माता पिता अपनी संतान की करते हैं। इसके पीछे जन प्रतिनिधि तर्क देते हैं कि बच्चा बड़ा होकर अपने माता पिता की सेवा करता है उसी तरह एक नन्हा पौधा वट वृक्ष बनकर सभी के लिए शुद्ध वायु देता है जो एक जीवन के लिए सबसे बहुमूल्य होती है।
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एक जुलाई से चल रहे वन महोत्सव सप्ताह पर अगर गौर करें तो जिले में यह अब तक हवा हवाई रहा है। वन विभाग भले ही दावे कर रहा हो कि वह अपने वन रेंज क्षेत्र में पौधरोपण करा रहा है लेकिन दो दिन के अंदर कितने पौधे लगाए गए हैं इसकी जानकारी किसी के पास नही है।
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मनाया जा रहा वन महोत्सव और कर्मचारी मना रहे छुट्टी
शासनादेश के अनुसार किसी बड़े कार्यक्रम के दौरान किसी भी विभागीय अधिकारी और कर्मचारी को अवकाश देने का प्रावधान नहीं है, लेकिन यहां शासनादेश की अवमानना कर कई विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को अवकाश दे दिया गया है। जिस कारण विभागीय कार्यालय में अधिकतर कुर्सियां खाली पड़ी हैं। वही वन विभाग अधिकारी के ऑफिस पर भी ताला लटक रहा है।
पर्यावरण संरक्षण के लिए पिछले 20 वर्षों से मुहिम चला रहे वरिष्ठ साहित्यकार और हिन्दी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.शैलेन्द्र कबीर का कहना है कि आज भारत ही नहीं पूरा विश्व पर्यावरण प्रदूषण से आक्रांत है। जल, ध्वनि, वायु और मिट्टी का प्रदूषण लगातार बढ़ता जा रहा है।
निरंतर बढ़ता तापमान, घटता जलस्तर, मौसम में बदलाव प्रदूषण का खुला संकेत दे रहे है। नदियां सिकुड़कर लगातार छोटी होती जा रही हैं। वायुमंडल में अशुद्ध गैसों की मात्रा बढ़ती जा रही है, अगर अब भी नहीं जागे तो बहुत कुछ खोना पड़ेगा, जिसमें स्वास्थ्य पर काफी असर पड़ेगा। आवश्यकता इस बात की है कि अब अधिक से अधिक पौधरोपण करें।
वन महोत्सव को लेकर पूर्व में ही कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार कर ली गई थी, समस्त रेंजों में पौधरोपण कराया जा रहा है। पांच जुलाई को बदायूं रेंज में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें व्यापक रूप से पौधरोपण कराया जाएगा। अभी कार्यभार ग्रहण किए दो सप्ताह का समय हुआ है जो भी विभागीय कर्मचारी अवकाश पर हैं उनको अवकाश पूर्व में स्वीकृत हुआ था लेकिन फिर भी संबंधितों से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।
-ईशा तिवारी, डीएफओ