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संविदा कर्मचारी ने रिश्तेदार बताकर फ्री कराया था खून
Updated Thu, 11 Oct 2018 06:40 PM IST
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संविदा कर्मचारी ने रिश्तेदार बताकर फ्री कराया था खून
सात हजार में खून बेचने का मामला: बोला-मैं आजमगढ़ का, मरीज भी वहीं का, गरीबी में दे रहा हूं साथ
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। संविदा कर्मचारी ने जिला अस्पताल में भर्ती मरीज को अपना रिश्तेदार बता कर ब्लड फ्री कराया था। बोला मैं आजमगढ़ का हूं और मरीज भी आजमगढ़ की। इस पर सीएमएस ने जेएसवाई (जननी सुरक्षा योजना) के तहत ब्लड को फ्री कर दिया था, परंतु बाद में पता चला कि मरीज जेएसवाई का लाभ नहीं ले सकता है तो मरीज के तीमारदार के साथ डोनर के रूप में कर्मचारी खुद पहुंचा। बाद में सात हजार रुपये में खून बेच दिया।
आमतौर पर सीधे-साधे मरीज और उनके तीमारदार ऐसे दलालों के चक्कर में पड़ जाते हैं और बाद में पछताते हैं। जिला अस्पताल में भी ऐसा ही हुआ। दलाल संविदा कर्मचारी न तो तीमारदारों को जानता था और ही कर्मचारी को वह जानते थे। तीमारदार चर्चा कर रहे तो संविदा कर्मी ने जानकारी जुटाई। और बाद में उसने मरीज के तीमारदारों को ऐसी पट्टी पढ़ाई की वे उसकी बातों में आ गए। जान न पहचान फिर भी अपने मरीज के लिए उन्हें कर्मचारी की बात माननी पड़ी। संविदा कर्मचारी मरीज के तीमारदारों को अपने साथ सीएमएस कार्यालय में ले गया और मरीज को रिश्तेदार बता कर जननी सुरक्षा योजना के तहत ब्लड फ्री करा लिया। उसके बाद फार्म लेकर ब्लड बैंक पहुंचा। चूंकि मरीज महिला अस्पताल में नहीं जिला अस्पताल में भर्ती थी। इससे वह जेएसवाई का लाभ नहीं ले सकती थी। उसके बाद फ्री एडवाइज को निरस्त कराया गया। महिला का पति ब्लड डोनेट नहीं करना चाहता था। इससे संविदा कर्मचारी ने रुपयों के लालच में खुद ब्लड डोनेट किया। इस पर ब्लड बैंक के कर्मचारियों ने सवाल भी उठाए थे परंतु उस संविदा कर्मचारी ने खुद को मरीज का रिश्तेदार बताया। इस पर ब्लड बैंक के कर्मचारियों ने भी कोई ध्यान नहीं दिया। बाद में कर्मचारी सात हजार रुपये लेकर चलता बना।
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छुट्टी लेकर घर भागा संविदा कर्मचारी
जिला अस्पताल में खून की दलाली की पोल खुलने के बाद संविदा कर्मचारी अवकाश लेकर अपने घर भाग गया है। उसने रुपये लौटाने के बाद ही अवकाश स्वीकृत कराने के लिए प्रार्थना पत्र दिया था। उसके बाद अपने घर चला गया। ---
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एक और संविदा कर्मचारी कर चुका है ऐसी हरकत
जिला अस्पताल में खून की दलाली इससे पहले भी हो चुकी है। वह कर्मचारी भी अस्पताल में संविदा पर कार्यरत है। उसने ब्लड दिलाने के नाम पर ढाई हजार रुपये लिए थे परंतु मरीज के साथ वालों ने उसका वीडियो बना लिया। वह वीडियो लेकर सीधे सीएमएस के पास गए थे। इस पर सीएमएस ने रुपये तो वापस करा दिए लेकिन संविदा कर्मचारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।
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सितंबर में ब्लड बैंक से 523 यूनिट गया खून
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में सिर्फ सितंबर माह की बात करें तो 523 यूनिट ब्लड की खपत हुई। इसमें महिला अस्पताल और जिला अस्पताल के मरीजों को 193 यूनिट ब्लड मिला और बाकी 330 यूनिट ब्लड प्राइवेट अस्पतालों के मरीजों को गया। इनमें भी 14 यूनिट मुफ्त ब्लड प्राइवेट अस्पतालों और जबकि 28 यूनिट फ्री ब्लड महिला अस्पताल, जिला अस्पताल के मरीजों को दिया गया।
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ब्लड डोनेट करने से कतराते हैं तीमारदार
जिला अस्पताल में तीमारदारों का खुद अपने मरीज को ब्लड देने से कतराना ही दलाली की वजह बनता है। तीमारदार समझते हैं कि ब्लड देने से उनको कमजोरी महसूस होगी।
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वर्जन.............
जिला अस्पताल में 7000 में ब्लड बेचा जाना वाकई गंभीर मामला है। अगर इसमें कोई शिकायत आती है तो जांच कराएंगे। इसके बावजूद इस मामले को गंभीरता से लिया जाएगा।
-डॉ. आशाराम, सीएमओ
वर्जन--
मैंने स्वयं संविदा कर्मचारी से रुपये वापस कराए थे। उसे चेतावनी भी दी गई है कि अगर दोबारा ऐसी हरकत करता पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मरीज के रुपये वापस मिल जाना भी बड़ी बात रही।
- डॉ. भारत भूषण वर्मा, सीएमएस, जिला अस्पताल
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सात हजार में खून बेचने का मामला: बोला-मैं आजमगढ़ का, मरीज भी वहीं का, गरीबी में दे रहा हूं साथ
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। संविदा कर्मचारी ने जिला अस्पताल में भर्ती मरीज को अपना रिश्तेदार बता कर ब्लड फ्री कराया था। बोला मैं आजमगढ़ का हूं और मरीज भी आजमगढ़ की। इस पर सीएमएस ने जेएसवाई (जननी सुरक्षा योजना) के तहत ब्लड को फ्री कर दिया था, परंतु बाद में पता चला कि मरीज जेएसवाई का लाभ नहीं ले सकता है तो मरीज के तीमारदार के साथ डोनर के रूप में कर्मचारी खुद पहुंचा। बाद में सात हजार रुपये में खून बेच दिया।
आमतौर पर सीधे-साधे मरीज और उनके तीमारदार ऐसे दलालों के चक्कर में पड़ जाते हैं और बाद में पछताते हैं। जिला अस्पताल में भी ऐसा ही हुआ। दलाल संविदा कर्मचारी न तो तीमारदारों को जानता था और ही कर्मचारी को वह जानते थे। तीमारदार चर्चा कर रहे तो संविदा कर्मी ने जानकारी जुटाई। और बाद में उसने मरीज के तीमारदारों को ऐसी पट्टी पढ़ाई की वे उसकी बातों में आ गए। जान न पहचान फिर भी अपने मरीज के लिए उन्हें कर्मचारी की बात माननी पड़ी। संविदा कर्मचारी मरीज के तीमारदारों को अपने साथ सीएमएस कार्यालय में ले गया और मरीज को रिश्तेदार बता कर जननी सुरक्षा योजना के तहत ब्लड फ्री करा लिया। उसके बाद फार्म लेकर ब्लड बैंक पहुंचा। चूंकि मरीज महिला अस्पताल में नहीं जिला अस्पताल में भर्ती थी। इससे वह जेएसवाई का लाभ नहीं ले सकती थी। उसके बाद फ्री एडवाइज को निरस्त कराया गया। महिला का पति ब्लड डोनेट नहीं करना चाहता था। इससे संविदा कर्मचारी ने रुपयों के लालच में खुद ब्लड डोनेट किया। इस पर ब्लड बैंक के कर्मचारियों ने सवाल भी उठाए थे परंतु उस संविदा कर्मचारी ने खुद को मरीज का रिश्तेदार बताया। इस पर ब्लड बैंक के कर्मचारियों ने भी कोई ध्यान नहीं दिया। बाद में कर्मचारी सात हजार रुपये लेकर चलता बना।
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छुट्टी लेकर घर भागा संविदा कर्मचारी
जिला अस्पताल में खून की दलाली की पोल खुलने के बाद संविदा कर्मचारी अवकाश लेकर अपने घर भाग गया है। उसने रुपये लौटाने के बाद ही अवकाश स्वीकृत कराने के लिए प्रार्थना पत्र दिया था। उसके बाद अपने घर चला गया। ---
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एक और संविदा कर्मचारी कर चुका है ऐसी हरकत
जिला अस्पताल में खून की दलाली इससे पहले भी हो चुकी है। वह कर्मचारी भी अस्पताल में संविदा पर कार्यरत है। उसने ब्लड दिलाने के नाम पर ढाई हजार रुपये लिए थे परंतु मरीज के साथ वालों ने उसका वीडियो बना लिया। वह वीडियो लेकर सीधे सीएमएस के पास गए थे। इस पर सीएमएस ने रुपये तो वापस करा दिए लेकिन संविदा कर्मचारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।
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सितंबर में ब्लड बैंक से 523 यूनिट गया खून
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में सिर्फ सितंबर माह की बात करें तो 523 यूनिट ब्लड की खपत हुई। इसमें महिला अस्पताल और जिला अस्पताल के मरीजों को 193 यूनिट ब्लड मिला और बाकी 330 यूनिट ब्लड प्राइवेट अस्पतालों के मरीजों को गया। इनमें भी 14 यूनिट मुफ्त ब्लड प्राइवेट अस्पतालों और जबकि 28 यूनिट फ्री ब्लड महिला अस्पताल, जिला अस्पताल के मरीजों को दिया गया।
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ब्लड डोनेट करने से कतराते हैं तीमारदार
जिला अस्पताल में तीमारदारों का खुद अपने मरीज को ब्लड देने से कतराना ही दलाली की वजह बनता है। तीमारदार समझते हैं कि ब्लड देने से उनको कमजोरी महसूस होगी।
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वर्जन.............
जिला अस्पताल में 7000 में ब्लड बेचा जाना वाकई गंभीर मामला है। अगर इसमें कोई शिकायत आती है तो जांच कराएंगे। इसके बावजूद इस मामले को गंभीरता से लिया जाएगा।
-डॉ. आशाराम, सीएमओ
वर्जन--
मैंने स्वयं संविदा कर्मचारी से रुपये वापस कराए थे। उसे चेतावनी भी दी गई है कि अगर दोबारा ऐसी हरकत करता पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मरीज के रुपये वापस मिल जाना भी बड़ी बात रही।
- डॉ. भारत भूषण वर्मा, सीएमएस, जिला अस्पताल