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खराब हुए जिला अस्पताल के शव वाहन, जमकर हंगामा

Thu, 27 Sep 2018 07:32 PM IST
Updated Thu, 27 Sep 2018 07:32 PM IST
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खराब हुए जिला अस्पताल के शव वाहन, जमकर हंगामा
फोटो-2, 4
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खराब हुए जिला अस्पताल
के शव वाहन, जमकर हंगामा
महिला का शव ले जाने को नहीं मिली सुविधा, मंगाना पड़ा किराए का वाहन
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूूं। जिला अस्पताल में दो-दो शव वाहन होते हुए बुधवार रात एक महिला के शव को घर ले जाने के लिए किराए का वाहन करना पड़ा। परिवार वालों ने शव वाहन भिजवाने की मांग की थी जिस पर उनसे कह दिया गया कि दोनों वाहन खराब हैं। इस पर काफी हंगामा भी हुआ, लेकिन उन्हें शव वाहन की सुविधा नहीं मिल सकी। अंत में परिवार वाले किराए के वाहन से शव को घर ले गए।
शव वाहन को लेकर यह पहला विवाद नहीं है। इससे पहले भी जिला अस्पताल प्रशासन की लापरवाही उजागर हो चुकी है। एक व्यक्ति को अपनी पत्नी का शव घर ले जाने के लिए शव वाहन की सुविधा नहीं दी गई थी। इस पर वह व्यक्ति पत्नी के शव को अपने कंधों पर रखकर ले गया। उस दिन अस्पताल प्रशासन ने लापरवाही के साथ मानवता को भी शर्मसार कर दिया था। इस मामले पर अधिकारियों ने अस्पताल प्रशासन को आड़े हाथों लिया था। साथ ही यह आदेश दिए थे कि अस्पताल में दम तोड़ने वाले प्रत्येक व्यक्ति के शव को इन्हीं शव वाहनों से घर पहुंचाया जाएगा। इन्हें इमरजेंसी के सामने खड़ा किया जाएगा। इसके बावजूद बुधवार रात एक महिला के शव को घर ले जाने के लिए शव वाहन मोहैया नहीं कराया गया। दरअसल सदर कोतवाली इलाके के मोहल्ला पटियाली सराय निवासी रामसरन की 50 वर्षीय पत्नी सुमन वर्मा की बुधवार रात अचानक हालत खराब हो गई थी। परिवार वाले उन्हें जिला अस्पताल ले गए, जहां सुमन वर्मा को मृत घोषित कर दिया गया। उसके बाद परिवार वालों ने अस्पताल प्रशासन से शव वाहन की सुविधा दिलाने की मांग की थी। उस वक्त इमरजेंसी में बैठे ईएमओ डॉ. मोहित यादव ने शव वाहन के चालक को बुलाया और शव को घर भेजने की बात कही। इस पर चालक ने बताया कि दोनों शव वाहन खराब पड़े हैं। एक वाहन पहले से खराब खड़ा है। दूसरा स्टार्ट नहीं हो रहा। इस पर तीमारदारों ने हंगामे के रूम में नाराजगी भी प्रकट की। इसके बावजूद उन्हें शव वाहन की सुविधा नहीं दी गई। इसके लिए पहले से दुखी परिवार वालों को इधर-उधर भटकना भी पड़ा परंतु उन्हें निराशा ही हाथ लगी। बाद में परिवार वाले टेंपो किराए पर करके लाए और रोते-बिलखते हुए शव को अपने घर ले गए।
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वर्जन-
दोनों शव वाहन 18 हजार किलो मीटर से अधिक चल चुके थे। चालकों ने कोई गौर ही नहीं किया। वाहनों के सीज होने की नौबत आ गई थी। एक वाहन की तो कल ही सर्विस कराई थी। वह तो जा सकता था। इसके बावजूद चालक वाहन नहीं ले गया तो उसकी यह गलती है। मैं मामले की जांच कराता हूं, तभी कोई कार्रवाई होगी।
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-डॉ. भारत भूषण पुष्कर, सीएमएस जिला अस्पताल
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