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दहेज हत्या के आरोपी पति को एक साल में ही मिली आजीवन कारावास की सजा
Updated Tue, 10 Oct 2017 01:18 AM IST
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हाईकोर्ट
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बदायूं। दहेज लोभी दानवों के प्रति कोर्ट भी सख्त हुआ है। दातागंज इलाके में एक साल पहले दहेज की खातिर हुई विवाहिता की हत्या के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय मधुलिका चौधरी ने आरोपी पति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, जबकि संदेह का लाभ देते हुए सास को बरी कर दिया। आरोपी पति पर पांच हजार का जुर्माना भी डाला गया है।
घटना 14 अगस्त 2016 को थाना दातागंज क्षेत्र के गांव पलिया गूजर में घटी। गांव बिरियाडांडी निवासी अमर पाल पुत्र प्यारे लाल ने घटना के दिन ही थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसने बहन सुनीता की शादी गांव पलिया गूजर निवासी परमानंद पुत्र दोदराम के साथ की थी। उसने अपनी हैसियत के मुताबिक दान-दहेज दिया।
अमर पाल का आरोप था कि ससुराल वाले सुनीता को चार लाख रुपये की मांग को लेकर तरह-तरह से प्रताड़ित करते थे। घटना के दिन उसे गांव के लोगों ने सूचना दी थी कि सुनीता को ससुराल वालों ने मार का फंदे पर लटका दिया। जब वह मौके पर पहुंचा तो सुनीता फंदे पर लटकी मिली। अमर पाल ने दहेज हत्या के इस मामले में पति परमानंद के अलावा उसके भाई नेत्रपाल, खेमपाल और ब्रहमपाल और मां विद्यावती के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने परमानंद और सास विद्यावती उर्फ आशा के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल ली।
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मधुलिका चौधरी ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद आरोपी पति परमानंद को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही सास विद्यावती उर्फ आशा को संदेह के लाभ देते हुए बरी कर दिया। न्यायाधीश ने पति पर पांच हजार का जुर्माना भी डाला है।
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घटना 14 अगस्त 2016 को थाना दातागंज क्षेत्र के गांव पलिया गूजर में घटी। गांव बिरियाडांडी निवासी अमर पाल पुत्र प्यारे लाल ने घटना के दिन ही थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसने बहन सुनीता की शादी गांव पलिया गूजर निवासी परमानंद पुत्र दोदराम के साथ की थी। उसने अपनी हैसियत के मुताबिक दान-दहेज दिया।
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अमर पाल का आरोप था कि ससुराल वाले सुनीता को चार लाख रुपये की मांग को लेकर तरह-तरह से प्रताड़ित करते थे। घटना के दिन उसे गांव के लोगों ने सूचना दी थी कि सुनीता को ससुराल वालों ने मार का फंदे पर लटका दिया। जब वह मौके पर पहुंचा तो सुनीता फंदे पर लटकी मिली। अमर पाल ने दहेज हत्या के इस मामले में पति परमानंद के अलावा उसके भाई नेत्रपाल, खेमपाल और ब्रहमपाल और मां विद्यावती के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने परमानंद और सास विद्यावती उर्फ आशा के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल ली।
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मधुलिका चौधरी ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद आरोपी पति परमानंद को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही सास विद्यावती उर्फ आशा को संदेह के लाभ देते हुए बरी कर दिया। न्यायाधीश ने पति पर पांच हजार का जुर्माना भी डाला है।