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बहन ने कहा अब किसे बाधूंगी राखी

Wed, 13 Sep 2017 11:59 PM IST
Updated Wed, 13 Sep 2017 11:59 PM IST
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बहन ने कहा अब किसे बाधूंगी राखी

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अमर उजाला ब्यूरो
बिसौली। घर का इकलौता चिराग बुझने से महावीर के पूरे परिवार पर मानो वज्रपात हो गया। हिमांशु की मौत से मां दक्ष कुमारी माथुर का तो रो रोकर बुरा हाल है। बड़ी बहन साक्षी और छोटी बहन लक्की रो-रोकर कह रही हैं कि मां अब किसकी कलाई पर राखी बाधूंगी। वहीं पिता महावीर सूनी आंखों से हर आने जाने वाले को देखकर यही सवाल कर रहा है कि आखिर उसके बेटे ने किसी का क्या बिगाड़ा था। गमगीन माहौल में सोत नदी के घाट पर मृतक का अंतिम संस्कार कर दिया गया। सैंकड़ों नम आंखों ने शव यात्रा में शामिल होकर हिमांशु को अंतिम विदाई दी।
दबतोरी क्षेत्र के ग्राम ललुआ नगला के मूल निवासी महावीर ने लगभग दस साल पहले नगर के नखासा बाजार में अपना मकान बनाया था। उस वक्त हिमांशु की उम्र महज सात साल थी। महावीर इस्लामनगर के केएम इंटर कॉलेज में अंग्रेजी के प्रवक्ता हैं। बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने के मकसद से शिक्षक महावीर ने गांव छोड़कर नगर में अपना मुकाम बनाया। बड़ी बेटी साक्षी बीएससी फाइनल कर रही है, छोटी बेटी कक्षा पांच की छात्रा है। एकमात्र पुत्र हिमांशु सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में इंटरमीडिएट का होनहार छात्र था। हाईस्कूल की परीक्षा में हिमांशु ने कॉलेज टॉप किया था। मोहल्लेवासियों ने बताया कि पूरे परिवार का व्यवहार अच्छा था, पता नहीं किसकी नजर लगी कि हरी भरी बगिया का चमकता फूल सदा सदा के लिए सबको रोता बिलखता छोड़ गया। हिमांशु की असमय मौत से मां दक्ष कुमारी तो बार बार बेहोश हो रही है। रो रोकर मां हर किसी से कह रही है कि मेरे लाल को एक बार मेरे सामने ला दो चाहे मेरी जान ले लो। मां की करुणा भरे क्रंदन को सुनकर हर आने जाने वाले की आंखें भर आती हैं। वहीं बहन साक्षी और लक्की भी अपने इकलौते भाई को खोकर सदमे में हैं।
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हिमांशु की मौत से सब सकते में
दबतोरी। क्षेत्र के ग्राम ललुआ नगला निवासी महावीर का गांव में बहुत अच्छा अखलाक था। मासूम हिमांशु की मौत की खबर लगते ही सैंकडों ग्रामीण घटनास्थल पर दौड़ पड़े। ग्रामीण सुरेंद्र सिंह ने बताया कि जब भी महावीर और उनका बेटा हिमांशु गांव आते थे तो तो हिमांशु बड़ों का अशीर्वाद लेता था। बच्चे की मौत के बाद गांव में अधिकतर घरों चूल्हे नहीं जले।
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स्कूल में हुई शोकसभा
प्रधानाचार्य सुभाष चंद्र सिसौदिया ने कहा कि हिमांशु सभी गुरुजनों का प्रिय छात्र था। हाईस्कूल की परीक्षा में उसने कॉलेज का नाम रोशन किया। शिक्षक राजन शर्मा ने कहा कि हिमांशु की असमय मौत ने कॉलेज का एक तारा कम कर दिया। शोकसभा में कॉलेेज का समस्त स्टाफ मौजूद रहा।
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