{"_id":"5ca6457dbdec2214530facbf","slug":"181554400637-budaun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्राइवेट अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत, परिजनों ने किया हंगामा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्राइवेट अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत, परिजनों ने किया हंगामा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बदायूं। गुरुवार देर रात शहर के एक प्राइवेट अस्पताल में डिलीवरी के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत हो गई, जिससे अस्पताल में हंगामा हो गया। परिवार वालों ने डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए पुलिस को सूचना दी। इस पर पहुंची पुलिस ने दोनों शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए।
गर्भवती महिला सुनीता (25) पत्नी भगवान सिंह मूसाझाग थाना क्षेत्र के ग्राम रुखड़ा खौला निवासी थी। उसके जेठ परशुराम के मुताबिक सुनीता का यह दूसरा बच्चा था। गुरुवार शाम करीब चार बजे उसके दर्द शुरू हुआ था। इस पर उन्होंने 102 नंबर एंबुलेंस को फोन किया। उनके गांव पहुंची एंबुलेंस सुनीता को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र घटपुरी ले गई, जहां से परिवार वाले सुनीता को उसी समय शहर ले आए और उसे कोतवाली क्षेत्र में पनबड़िया विद्युत उपकेंद्र के सामने स्थित अग्रवाल जनरल अस्पताल एंड मैटरनिटी सेंटर में भर्ती करा दिया। परिवार वालों का कहना है कि डॉक्टर ने उनसे कहा था कि वह बच्चे को बचाने की गारंटी नहीं ले रहे हैं लेकिन सुनीता को हर हालत में बचा लेंगे। रात करीब आठ बजे सुनीता की डिलीवरी हुई। इसी दौरान जन्मे पुत्र की मौत हो गई। कुछ देर बाद सुनीता ने भी दम तोड़ दिया। इससे गुस्साए परिवार वालों ने अस्पताल में हंगामा किया। उन्होंने डॉक्टर पर कार्रवाई की मांग करते हुए पुलिस को सूचना दे दी। इस पर यूपी 100 और कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंच गई। उसके बाद पुलिस ने मामले की छानबीन करते हुए जच्चा-बच्चा के शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए। इस संबंध में देर शाम तक महिला के परिवार वालों ने तहरीर नहीं दी।
महिला जैसे ही अस्पताल में आई, हमने उसी समय कहा था कि उसकी हालत बहुत ही खराब है। हमने उनके लिए एक एंबुलेंस भी करवा दी थी लेकिन वे महिला को बरेली नहीं ले गए। अगर वे महिला को बरेली ले जाते तो शायद उसकी जान बच जाती।
विज्ञापन
-डॉ. स्वतंत्र बाला अग्रवाल, अस्पताल मालिक
विज्ञापन
गर्भवती महिला सुनीता (25) पत्नी भगवान सिंह मूसाझाग थाना क्षेत्र के ग्राम रुखड़ा खौला निवासी थी। उसके जेठ परशुराम के मुताबिक सुनीता का यह दूसरा बच्चा था। गुरुवार शाम करीब चार बजे उसके दर्द शुरू हुआ था। इस पर उन्होंने 102 नंबर एंबुलेंस को फोन किया। उनके गांव पहुंची एंबुलेंस सुनीता को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र घटपुरी ले गई, जहां से परिवार वाले सुनीता को उसी समय शहर ले आए और उसे कोतवाली क्षेत्र में पनबड़िया विद्युत उपकेंद्र के सामने स्थित अग्रवाल जनरल अस्पताल एंड मैटरनिटी सेंटर में भर्ती करा दिया। परिवार वालों का कहना है कि डॉक्टर ने उनसे कहा था कि वह बच्चे को बचाने की गारंटी नहीं ले रहे हैं लेकिन सुनीता को हर हालत में बचा लेंगे। रात करीब आठ बजे सुनीता की डिलीवरी हुई। इसी दौरान जन्मे पुत्र की मौत हो गई। कुछ देर बाद सुनीता ने भी दम तोड़ दिया। इससे गुस्साए परिवार वालों ने अस्पताल में हंगामा किया। उन्होंने डॉक्टर पर कार्रवाई की मांग करते हुए पुलिस को सूचना दे दी। इस पर यूपी 100 और कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंच गई। उसके बाद पुलिस ने मामले की छानबीन करते हुए जच्चा-बच्चा के शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए। इस संबंध में देर शाम तक महिला के परिवार वालों ने तहरीर नहीं दी।
विज्ञापन
महिला जैसे ही अस्पताल में आई, हमने उसी समय कहा था कि उसकी हालत बहुत ही खराब है। हमने उनके लिए एक एंबुलेंस भी करवा दी थी लेकिन वे महिला को बरेली नहीं ले गए। अगर वे महिला को बरेली ले जाते तो शायद उसकी जान बच जाती।
विज्ञापन
-डॉ. स्वतंत्र बाला अग्रवाल, अस्पताल मालिक