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Budaun News: पांच बसों का चालान कर 1.79 लाख राजस्व वसूला
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स्लीपर बसों पर कार्रवाई करते हुए परिवहन विभाग के अधिकारी। स्रोत-विभाग
- फोटो : ramnagar news
बदायूं। जिले में स्लीपर बसें पंजीकृत नहीं हैं। बाहरी जिलों में पंजीकृत स्लीपर बसें जिले से होकर रात-दिन गुजर रहीं हैं। यह खबर अमर उजाला में प्रमुखता से प्रकाशित की गई। इसके बाद परिवहन विभाग ने बृहस्पतिवार व शुक्रवार को इनकी चेकिंग की। कार्रवाई में नौ बसों को पकड़ा गया। परिवहन विभाग ने पांच बसों का चालान कर 1.79 लाख रुपये की राजस्व वसूली की है। चार बसें सीज कर दी गईं हैं।
स्लीपर बसों का जिले में पंजीकरण नहीं हैं। बावजूद इसके 20 से अधिक बसें अन्य प्रदेशों तक दौड़ लगा रहीं हैं। जिले में 270 प्राइवेट बसों का एआरटीओ कार्यालय में पंजीकरण है। इनमें से 170 बसों को जिले के सात रूटों पर संचालित होने का परमिट दिया गया है। करीब सौ बसें ऐसी हैं, जिनको टूरिस्ट परमिट हैं।
स्लीपर बसों का पंजीकरण न होने के बाद भी 20 से अधिक बसों का संचालन बदस्तूर जारी है। इन बसों पर विभाग के अधिकारी कार्रवाई भी करते हैं, लेकिन संचालक मानने को राजी नहीं हैं। बसों के संचालक थाना-चौकी से सांठगांठ करके गैर जनपद तक बसों के प्रतिदिन संचालित करते आ रहे हैं। इन बसों के चलने का समय ऐसा है कि यहां से निकलेगी सुबह को तो लौटकर रात में ही आती हैं।
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ऐसे में इन बसों पर अधिकारियों की नजर कम पड़ती है। विभाग के अधिकारी जब-तब इन पर कार्रवाई भी करते रहते हैं। इसी तरह पंजीकृत टूरिस्ट बसें भरी मानक से अधिक सवारियों को लेकर हर रोज संचालित की जा रहीं हैं।
खबर पर संज्ञान लेते हुए एआरटीओ अमरीश कुमार ने बृहस्पतिवार व शुक्रवार को नौ स्लीपर बसों पर कार्रवाई की है। इसमें से पांच बसों का चालान कर 1.79 लाख रुपये की राजस्व वसूली की गई है। साथ ही पांच बसें ऐसी मिलीं जिनके पास रोड पर चलने के मानक ही पूरे नहीं थे। ऐसी चार बसों को सीज किया गया है।
एआरटीओ अमरीश कुमार ने बताया कि इन बसों में अधिकांश बसें राजस्थान में पंजीकृत मिली हैं। इनके मानक भी सड़क पर चलने के पूरे नहीं मिले हैं। इस वजह से कार्रवाई की गई है। आगे भी लगातार चेकिंग कर कार्रवाई की जाएगी। इस तरह की बसों का संचालन किसी कीमत पर नहीं किया जाएगा, जो सड़क हादसों की वजह बनती हैं।
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स्लीपर बसों का जिले में पंजीकरण नहीं हैं। बावजूद इसके 20 से अधिक बसें अन्य प्रदेशों तक दौड़ लगा रहीं हैं। जिले में 270 प्राइवेट बसों का एआरटीओ कार्यालय में पंजीकरण है। इनमें से 170 बसों को जिले के सात रूटों पर संचालित होने का परमिट दिया गया है। करीब सौ बसें ऐसी हैं, जिनको टूरिस्ट परमिट हैं।
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स्लीपर बसों का पंजीकरण न होने के बाद भी 20 से अधिक बसों का संचालन बदस्तूर जारी है। इन बसों पर विभाग के अधिकारी कार्रवाई भी करते हैं, लेकिन संचालक मानने को राजी नहीं हैं। बसों के संचालक थाना-चौकी से सांठगांठ करके गैर जनपद तक बसों के प्रतिदिन संचालित करते आ रहे हैं। इन बसों के चलने का समय ऐसा है कि यहां से निकलेगी सुबह को तो लौटकर रात में ही आती हैं।
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ऐसे में इन बसों पर अधिकारियों की नजर कम पड़ती है। विभाग के अधिकारी जब-तब इन पर कार्रवाई भी करते रहते हैं। इसी तरह पंजीकृत टूरिस्ट बसें भरी मानक से अधिक सवारियों को लेकर हर रोज संचालित की जा रहीं हैं।
खबर पर संज्ञान लेते हुए एआरटीओ अमरीश कुमार ने बृहस्पतिवार व शुक्रवार को नौ स्लीपर बसों पर कार्रवाई की है। इसमें से पांच बसों का चालान कर 1.79 लाख रुपये की राजस्व वसूली की गई है। साथ ही पांच बसें ऐसी मिलीं जिनके पास रोड पर चलने के मानक ही पूरे नहीं थे। ऐसी चार बसों को सीज किया गया है।
एआरटीओ अमरीश कुमार ने बताया कि इन बसों में अधिकांश बसें राजस्थान में पंजीकृत मिली हैं। इनके मानक भी सड़क पर चलने के पूरे नहीं मिले हैं। इस वजह से कार्रवाई की गई है। आगे भी लगातार चेकिंग कर कार्रवाई की जाएगी। इस तरह की बसों का संचालन किसी कीमत पर नहीं किया जाएगा, जो सड़क हादसों की वजह बनती हैं।

स्लीपर बसों पर कार्रवाई करते हुए परिवहन विभाग के अधिकारी। स्रोत-विभाग- फोटो : ramnagar news

स्लीपर बसों पर कार्रवाई करते हुए परिवहन विभाग के अधिकारी। स्रोत-विभाग- फोटो : ramnagar news

स्लीपर बसों पर कार्रवाई करते हुए परिवहन विभाग के अधिकारी। स्रोत-विभाग- फोटो : ramnagar news