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उत्साहित मन से अजन्मे का इंतजार, जन्माष्टमी आज
Updated Sun, 02 Sep 2018 05:44 PM IST
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कान्हा की अगवानी को शहरवासी तैयार
- शहर के कई मंदिरों में रविवार को ही मनाई गई जन्माष्टमी
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। जिले भर में जन्माष्टमी की धूम है। हर कोई कान्हा के आगमन को लेकर उत्साहित नजर आ रहा है। इधर, शहर के कई मंदिरों में रविवार को ही जन्माष्टमी मना ली गई। पौराणिक मान्यताओं के माने तो गोकुल में नंदलाला का जन्म सप्तमी के दिन हुआ था। वह अगले दिन मथुरा गए थे। जिस कारण शहर के कई मंदिरों में रविवार देर रात कान्हा का आगमन हुआ। हालांकि मथुरा समेत अन्य क्षेत्रों में सोमवार को धूमधाम से जन्माष्टमी मनाई जाएगी। शनिवार से ही बाजार में ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ रही है। सभी नंदलाला के स्वरूप को निखारने के लिए शृंगार सामग्री के साथ वस्त्र आदि की खरीदारी कर रहे थे।
शहर से लेकर देहात तक हर कोई कान्हा के प्रेम में सराबोर नजर आ रहा है। बाजार भी नंदलाल की अगवानी को तैयार हैं। शनिवार से ही ग्राहकों की भारी भीड़ बाजार में उमड़ने का सिलसिला जारी हो गया था जो कि रविवार देर शाम तक यथावत रहा। दुकानदारों की माने तो ग्राहक कान्हा के स्वरूप को सजाने के लिए मनमाकिफ शृंगार, कपड़े और कान्हा के स्वरूपों की खरीदारी कर रहे हैं। बाजार कान्हा के सतरंगी परिधानों से नहाया नजर आ रहा है। हालांकि गोकुल की तर्ज पर शहर के गौरी शंकर, दुर्गा देवी और बिरुआबाड़ी मंदिर में रविवार को रात 12 बजे नंदलाल का अवतार जन्म लेगा। जिसकी तैयारियां पूर्ण कर ली गईं है। करीब दस फीसदी लोग रविवार, बाकी सोमवार को ही जन्माष्टमी मनाएंगे।
फोटो - 14
सोने से पलना में झूलेगा मेरा ललना
शहर के घरों में महिलाओं ने कान्हा के जन्म के बाद लिटाने के लिए पालने को संजाने की तैयारियां शुरू कर दी है। महिलाएं विभिन्न प्रकार के सज्जा सामान से कान्हा का पलना सजा रही हैं। आवास विकास कॉलोनी निवासी सीमा गुप्ता ने बताया कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी कान्हा के लिए आकर्षक पालना तैयार किया है। जिसको फूल और विभिन्न साजों सामान से सजाया है।
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फोटो - 13
कब आओगे नंदलाल अंखियां तरस गईं
कान्हा के जन्म से पूर्व ही शहर के गौरी शंकर, बिरुआबाडी औप नगला मंदिर समेत अन्य मंदिरों में भी व्यवस्थाएं चाक चौबंद कर ली गईं है। मंदिरों में टेंट के साथ-साथ भव्य सजावट की गई है।
पुजारी की बात
फोटो - 12
गोकुल में सप्तमी की रात में ही कान्हा का जन्म हुआ था। जो लोग इस मान्यता को मानते वह रविवार को जन्माष्टमी मना रहे हैं। बाकी सोमवार को मनाएंगे।
-पं. मोनू शर्मा, नगला मंदिर
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कान्हा की अगवानी को शहरवासी तैयार
- शहर के कई मंदिरों में रविवार को ही मनाई गई जन्माष्टमी
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। जिले भर में जन्माष्टमी की धूम है। हर कोई कान्हा के आगमन को लेकर उत्साहित नजर आ रहा है। इधर, शहर के कई मंदिरों में रविवार को ही जन्माष्टमी मना ली गई। पौराणिक मान्यताओं के माने तो गोकुल में नंदलाला का जन्म सप्तमी के दिन हुआ था। वह अगले दिन मथुरा गए थे। जिस कारण शहर के कई मंदिरों में रविवार देर रात कान्हा का आगमन हुआ। हालांकि मथुरा समेत अन्य क्षेत्रों में सोमवार को धूमधाम से जन्माष्टमी मनाई जाएगी। शनिवार से ही बाजार में ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ रही है। सभी नंदलाला के स्वरूप को निखारने के लिए शृंगार सामग्री के साथ वस्त्र आदि की खरीदारी कर रहे थे।
शहर से लेकर देहात तक हर कोई कान्हा के प्रेम में सराबोर नजर आ रहा है। बाजार भी नंदलाल की अगवानी को तैयार हैं। शनिवार से ही ग्राहकों की भारी भीड़ बाजार में उमड़ने का सिलसिला जारी हो गया था जो कि रविवार देर शाम तक यथावत रहा। दुकानदारों की माने तो ग्राहक कान्हा के स्वरूप को सजाने के लिए मनमाकिफ शृंगार, कपड़े और कान्हा के स्वरूपों की खरीदारी कर रहे हैं। बाजार कान्हा के सतरंगी परिधानों से नहाया नजर आ रहा है। हालांकि गोकुल की तर्ज पर शहर के गौरी शंकर, दुर्गा देवी और बिरुआबाड़ी मंदिर में रविवार को रात 12 बजे नंदलाल का अवतार जन्म लेगा। जिसकी तैयारियां पूर्ण कर ली गईं है। करीब दस फीसदी लोग रविवार, बाकी सोमवार को ही जन्माष्टमी मनाएंगे।
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सोने से पलना में झूलेगा मेरा ललना
शहर के घरों में महिलाओं ने कान्हा के जन्म के बाद लिटाने के लिए पालने को संजाने की तैयारियां शुरू कर दी है। महिलाएं विभिन्न प्रकार के सज्जा सामान से कान्हा का पलना सजा रही हैं। आवास विकास कॉलोनी निवासी सीमा गुप्ता ने बताया कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी कान्हा के लिए आकर्षक पालना तैयार किया है। जिसको फूल और विभिन्न साजों सामान से सजाया है।
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कब आओगे नंदलाल अंखियां तरस गईं
कान्हा के जन्म से पूर्व ही शहर के गौरी शंकर, बिरुआबाडी औप नगला मंदिर समेत अन्य मंदिरों में भी व्यवस्थाएं चाक चौबंद कर ली गईं है। मंदिरों में टेंट के साथ-साथ भव्य सजावट की गई है।
पुजारी की बात
फोटो - 12
गोकुल में सप्तमी की रात में ही कान्हा का जन्म हुआ था। जो लोग इस मान्यता को मानते वह रविवार को जन्माष्टमी मना रहे हैं। बाकी सोमवार को मनाएंगे।
-पं. मोनू शर्मा, नगला मंदिर