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बरेली के पशु चिकित्सालय में बीमार गायें भर्ती कराईं
Updated Fri, 29 Dec 2017 12:43 AM IST
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गाय
- फोटो : SELF
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उझानी (बदायूं)। बीमार गायों को चौबारी (बरेली) के पशु चिकित्सालय में भर्ती कराने के लिए लेकर बुधवार देर रात तक पसोपेश का माहौल बना रहा। पशु चिकित्सकों ने बीमार गायों को अपनी सुपुर्दगी में लेने से इंकार कर दिया तो गो-रक्षक सेवा समिति के प्रदेश अध्यक्ष ने मामला केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के संज्ञान में डाला। केंद्रीय मंत्री के हस्तक्षेप पर गायों को भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया गया।
स्थानीय गोशाला प्रबंधन और गो-रक्षकों ने तस्करों के चंगुल से मुक्त बीमार गायों को बेहतर इलाज के लिए बुधवार अपराह्न में बरेली में चौबारी के पशु चिकित्सालय में भेजने का निर्णय किया था। बीमार गायों को लेकर शाम को गोशाला कर्मी चौबारी पहुंचा तो पशु चिकित्सकों ने उन्हें सुपुर्दगी में लेने से मना कर दिया। कर्मचारी ने गोशाला अध्यक्ष रतन जिंदल और विहिप के जिला उपाध्यक्ष अरविंद शर्मा से बात कर उन्हें हालात से अवगत कराया। विहिप उपाध्यक्ष ने बताया कि बीमार गायों को पशु चिकित्सालय में बात होने के बाद ही भेजा गया था। देर शाम तक नतीजा सामने नहीं आने पर गो-रक्षक सेवा समिति के प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र नागर ने केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी से बात कर उन्हें पूरे प्रकरण से अवगत कराया। केंद्रीय मंत्री के निर्देश पर पशु चिकित्सालय के कोआर्डिनेटर ने बीमार गायों को सुपुर्दगी में लेकर इलाज शुरू करा दिया। इसके बाद गोशाला प्रबंधन ने भी राहत की सांस ली। बीमार गायें तीन दिन तक गोशाला गेट पर तड़पती रही थीं।
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सुपुर्दगी में लेना पड़ा तो पहले कराएंगे गायों का मेडिकल
उझानी। श्री कामधेनु गोशाला प्रबंध कमेटी के अध्यक्ष रतन जिंदल ने बताया कि तस्करों के चंगुल से मुक्त गायों को उसी स्थिति में गोशाला में लिया जाएगा जब वहां गायों की संख्या कम हो। पहले से ही ओवरलोड गोशाला में 260 से अधिक गोवंशीय पशु हैं। फिर भी विषम परिस्थितियों में गायों को सुपुर्दगी में लेना पड़ा तो उनकी हालत पर गौर भी किया जाएगा। पशु चिकित्सक से मेडिकल कराने के बाद स्वस्थ गायों को गोशाला में लिया जाएगा।
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स्थानीय गोशाला प्रबंधन और गो-रक्षकों ने तस्करों के चंगुल से मुक्त बीमार गायों को बेहतर इलाज के लिए बुधवार अपराह्न में बरेली में चौबारी के पशु चिकित्सालय में भेजने का निर्णय किया था। बीमार गायों को लेकर शाम को गोशाला कर्मी चौबारी पहुंचा तो पशु चिकित्सकों ने उन्हें सुपुर्दगी में लेने से मना कर दिया। कर्मचारी ने गोशाला अध्यक्ष रतन जिंदल और विहिप के जिला उपाध्यक्ष अरविंद शर्मा से बात कर उन्हें हालात से अवगत कराया। विहिप उपाध्यक्ष ने बताया कि बीमार गायों को पशु चिकित्सालय में बात होने के बाद ही भेजा गया था। देर शाम तक नतीजा सामने नहीं आने पर गो-रक्षक सेवा समिति के प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र नागर ने केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी से बात कर उन्हें पूरे प्रकरण से अवगत कराया। केंद्रीय मंत्री के निर्देश पर पशु चिकित्सालय के कोआर्डिनेटर ने बीमार गायों को सुपुर्दगी में लेकर इलाज शुरू करा दिया। इसके बाद गोशाला प्रबंधन ने भी राहत की सांस ली। बीमार गायें तीन दिन तक गोशाला गेट पर तड़पती रही थीं।
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सुपुर्दगी में लेना पड़ा तो पहले कराएंगे गायों का मेडिकल
उझानी। श्री कामधेनु गोशाला प्रबंध कमेटी के अध्यक्ष रतन जिंदल ने बताया कि तस्करों के चंगुल से मुक्त गायों को उसी स्थिति में गोशाला में लिया जाएगा जब वहां गायों की संख्या कम हो। पहले से ही ओवरलोड गोशाला में 260 से अधिक गोवंशीय पशु हैं। फिर भी विषम परिस्थितियों में गायों को सुपुर्दगी में लेना पड़ा तो उनकी हालत पर गौर भी किया जाएगा। पशु चिकित्सक से मेडिकल कराने के बाद स्वस्थ गायों को गोशाला में लिया जाएगा।
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