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पोल खुलने के बाद काटी गई थी ढाई सौ रुपये की रसीद
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बदायूं। जिला अस्पताल के प्लास्टर रूम में मानसिक मंदित व्यक्ति के तीमारदार से रुपये लेने के मामले में भले ही कोई कार्रवाई नहीं हुई हो, लेकिन रिश्वतखोरों में अफरा-तफरी जरूर है। कर्मचारियों ने पोल खुलने के बाद ढाई सौ रुपये की रसीद कटवाई थी। मामले की जांच शुरू हो गई है।
जिला अस्पताल में प्लास्टर और ईसीजी कराने के लिए मरीज को दो नंबर रूम में अपनी रसीद कटवानी होती है। नियम के मुताबिक बगैर रसीद के प्लास्टर नहीं होगा और न ही ईसीजी होगी। उस दिन तीमारदार सरवर अली मानसिक मंदित को लेकर अनजाने में सीधे प्लास्टर रूम में पहुंच गए थे। उन्होंने दो नंबर कमरे में रसीद नहीं कटवाई थी। प्लास्टर रूम में सबसे पहले उनसे रसीद ही मांगी गई थी लेकिन उन्होंने रसीद कटवाने से इंकार किया। इस पर कर्मचारियों ने वहीं सरवरी अली से ढाई सौ रुपये ले लिए और उसके बाद मानसिक मंदित के हाथ पर प्लास्टर कर दिया गया। इस दौरान तीमारदार को रसीद भी नहीं दी गई। उसने डीएम से शिकायत कर दी, जिस पर वह मौके पर पहुंच गए। अगर तीमारदार डीएम से शिकायत नहीं करता तो ढाई सौ रुपये सीधे कर्मचारियों की जेब में जाते और मरीज अपने घर लौट जाता।
जांच अभी चल रही है। गुरुवार को मेरे पास जांच रिपोर्ट आ सकती है। तभी कोई आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. भारत भूषण पुष्कर, सीएमएस जिला अस्पताल
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जिला अस्पताल में प्लास्टर और ईसीजी कराने के लिए मरीज को दो नंबर रूम में अपनी रसीद कटवानी होती है। नियम के मुताबिक बगैर रसीद के प्लास्टर नहीं होगा और न ही ईसीजी होगी। उस दिन तीमारदार सरवर अली मानसिक मंदित को लेकर अनजाने में सीधे प्लास्टर रूम में पहुंच गए थे। उन्होंने दो नंबर कमरे में रसीद नहीं कटवाई थी। प्लास्टर रूम में सबसे पहले उनसे रसीद ही मांगी गई थी लेकिन उन्होंने रसीद कटवाने से इंकार किया। इस पर कर्मचारियों ने वहीं सरवरी अली से ढाई सौ रुपये ले लिए और उसके बाद मानसिक मंदित के हाथ पर प्लास्टर कर दिया गया। इस दौरान तीमारदार को रसीद भी नहीं दी गई। उसने डीएम से शिकायत कर दी, जिस पर वह मौके पर पहुंच गए। अगर तीमारदार डीएम से शिकायत नहीं करता तो ढाई सौ रुपये सीधे कर्मचारियों की जेब में जाते और मरीज अपने घर लौट जाता।
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जांच अभी चल रही है। गुरुवार को मेरे पास जांच रिपोर्ट आ सकती है। तभी कोई आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. भारत भूषण पुष्कर, सीएमएस जिला अस्पताल