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एक साल में नहीं बन शेल्टर होम, डीएम नाराज
Updated Sat, 09 Dec 2017 11:55 PM IST
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निरीक्षण करते डीएम।
- फोटो : अमर उजाला
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बदायूं। प्राइवेट बस स्टैंड के पास शेल्टर होम का निर्माण कार्य किया जा रहा है, लेकिन विभाग और कार्यदायी संस्था की ओर से उसमें लापरवाही बरती जा रही है। इस कारण एक साल बाद भी यह शेल्टर होम शुरू नहीं हो सका। डीएम ने निरीक्षण के दौरान कई खामियां पाई। इस पर वह नाराज दिखे। वहीं कार्यदायी संस्था को इस माह कार्य पूरा करने को निर्देशित किया। इसके अलावा राजकीय महाविद्यालय में लाइट की व्यवस्था दुरुस्त नहीं होने पर नाराजगी व्यक्त की।
शनिवार को पौने तीन बजे डीएम दिनेश कुमार सिंह ने प्राइवेट बस स्टैंड पर बने शेल्टर होम का निरीक्षण किया। सबसे पहले उन्होंने कक्षों का निरीक्षण किया। डीएम ने वहां पर शौचालयों के बारे में जानकारी ली तो सहायक प्रोजेक्ट मैनेजर नीरज गोस्वामी उसकी सही जानकारी नहीं दे सकी। इसके बाद में डीएम ने कमरों में लाइटिंग व्यवस्था और फिनिशिंग को देखा, लेकिन वह भी ठीक नहीं मिला। इससे तत्काल दुुरुस्त करने के निर्देश दिए। डीएम ने इससे हर हाल में दिसंबर में पूरा करने के निर्देश दिए। इसके बाद में डीएम ने राजकीय महिला महाविद्यालय का निरीक्षण किया। यहां पर अधिकतर रूम बंद मिले। जो कमरे खुले थे, उनमें पर्याप्त रोशनी नहीं होने पर नाराजगी व्यक्त की। पार्किंग व्यवस्था भी देखी। कॉलेज परिसर में छात्राओं के लिए होस्टल भी बन रहा है। इसमें 90 छात्राएं रह सकेंगी। प्राचार्य डॉ. स्मिता जैन ने स्टाफ कम होने की जानकारी दी। डीएम ने इसकी लिस्ट मांगी। वहीं छात्राओं की संख्या के बारे में जाना। बताया कि 611 छात्राएं पंजीकृत हैं। इस पर डीएम ने औचक निरीक्षण की बात कही। उन्होंने प्राचार्य से कहा कि जो छात्राएं विद्यालय नहीं आती हैं उनके घर पर फोन कर, रोजाना इसकी जानकारी हासिल करें। ताकि पता रहे कौन सी छात्रा घर से कॉलेज के निकली है और वह क्यों नहीं आई।
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शेल्टर रूम के लिए बन चुकी है राशि
प्राइवेट बस स्टैंड पर 2 करोड़ 45 लाख रुपये से शेल्टर होम बनाया जा रहा है। इसमें 100 लोगों के रुकने के लिए व्यवस्था है। यह पिछले दिसंबर में बनना शुरू हुआ था। जो एक साल के अंदर बनकर तैयार होना था, लेकिन नहीं बना। जबकि भारत सरकार की ओर से समय से कार्यदायी संस्था को 1.95 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। जबकि बचा हुआ करीब 50 लाख रुपये विभाग को फर्नीचर खरीदने के लिए दिया जाना था।
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शनिवार को पौने तीन बजे डीएम दिनेश कुमार सिंह ने प्राइवेट बस स्टैंड पर बने शेल्टर होम का निरीक्षण किया। सबसे पहले उन्होंने कक्षों का निरीक्षण किया। डीएम ने वहां पर शौचालयों के बारे में जानकारी ली तो सहायक प्रोजेक्ट मैनेजर नीरज गोस्वामी उसकी सही जानकारी नहीं दे सकी। इसके बाद में डीएम ने कमरों में लाइटिंग व्यवस्था और फिनिशिंग को देखा, लेकिन वह भी ठीक नहीं मिला। इससे तत्काल दुुरुस्त करने के निर्देश दिए। डीएम ने इससे हर हाल में दिसंबर में पूरा करने के निर्देश दिए। इसके बाद में डीएम ने राजकीय महिला महाविद्यालय का निरीक्षण किया। यहां पर अधिकतर रूम बंद मिले। जो कमरे खुले थे, उनमें पर्याप्त रोशनी नहीं होने पर नाराजगी व्यक्त की। पार्किंग व्यवस्था भी देखी। कॉलेज परिसर में छात्राओं के लिए होस्टल भी बन रहा है। इसमें 90 छात्राएं रह सकेंगी। प्राचार्य डॉ. स्मिता जैन ने स्टाफ कम होने की जानकारी दी। डीएम ने इसकी लिस्ट मांगी। वहीं छात्राओं की संख्या के बारे में जाना। बताया कि 611 छात्राएं पंजीकृत हैं। इस पर डीएम ने औचक निरीक्षण की बात कही। उन्होंने प्राचार्य से कहा कि जो छात्राएं विद्यालय नहीं आती हैं उनके घर पर फोन कर, रोजाना इसकी जानकारी हासिल करें। ताकि पता रहे कौन सी छात्रा घर से कॉलेज के निकली है और वह क्यों नहीं आई।
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शेल्टर रूम के लिए बन चुकी है राशि
प्राइवेट बस स्टैंड पर 2 करोड़ 45 लाख रुपये से शेल्टर होम बनाया जा रहा है। इसमें 100 लोगों के रुकने के लिए व्यवस्था है। यह पिछले दिसंबर में बनना शुरू हुआ था। जो एक साल के अंदर बनकर तैयार होना था, लेकिन नहीं बना। जबकि भारत सरकार की ओर से समय से कार्यदायी संस्था को 1.95 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। जबकि बचा हुआ करीब 50 लाख रुपये विभाग को फर्नीचर खरीदने के लिए दिया जाना था।
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