फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Budaun News ›   बदायूं की नई चेयरमैन के सामने हैं कई चुनौतियां

बदायूं की नई चेयरमैन के सामने हैं कई चुनौतियां

Sun, 03 Dec 2017 12:55 AM IST
Updated Sun, 03 Dec 2017 12:55 AM IST
विज्ञापन
बदायूं की नई चेयरमैन के सामने हैं कई चुनौतियां
bdn - फोटो : amar ujala
शहर में समस्याओं का अंबार, मौकापरस्तों से रहना होगा सावधान
विज्ञापन

पटरी से उतरे चल रहे सिस्टम को ठीक करना होगी बढ़ी चुनौती


बदायूं। नगर पालिका परिषद की नवनिर्वाचित चेयरमैन दीपमाला गोयल को व्यवस्था सुधारने के लिए कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।
शहर में हर तरफ समस्याएं ही समस्याएं है। सबसे बड़ी समस्या गंदगी की है। कोई मोहल्ला या गली ऐसी नहीं हैं, जहां पर गंदगी के ढेर नहीं लगे हों। नागरिकों की कोई सुनने को तैयार नहीं था। पेयजल की भी गंभीर समस्या हैं। कई मोहल्ले ऐसे हैं जहां पर दो वक्त पानी नहीं पहुंचता है। वजह है कि पालिका के कई नलकूप काफी समय से खराब पड़े हैं। हालांकि उनकी मरम्मत के नाम पर धनराशि खूब निकलती रही है। पथप्रकाश व्यवस्था भी चौपट सी है। कई मोहल्ले हैं जो शाम होते ही अंधेरे में डूब जाते हैं। सो लोगों को दिक्कत होती हैं।

स्थायी हुआ अतिक्रमण
शहर में अतिक्रमण स्थायी समस्या के रूप में है। अतिक्रमण को हटाने के लिए पालिका ने कभी उतने सार्थक कदम नहीं उठाए जो उठाने चाहिए थे। शायद यही वजह है कि दुकानदारों ने अपनी दुकानों के आगे स्थायी और अस्थायी रूप से अतिक्रमण कर लिया है। लिहाजा, खामियाजा आम लोगों को उठाना पड़ता है।
विज्ञापन


जर्जर सड़कें बनी मुसीबत
शहर में कई सड़कें हैं। जो जर्जर और खस्ताहाल हैं। जिन पर पैदल चलना भी किसी खतरे से खाली नहीं रहता है। लोग अक्सर गड्ढों में ठोकरें खाकर जख्मी होते रहते हैं। इसको लेकर कई बार लोग शिकायतें कर चुके, लेकिन अब तक यह सही नहीं हो सकीं।
विज्ञापन
विज्ञापन


खल रह सीवर लाइन की कमी
सीवर लाइन की भी काफी समय से कमी महसूस की जा रही है। इससे लोगों को बरसात के दिनों में जलभराव का सामना करना पड़ता है। कई बार तो लोगों के घरों तक में पानी घुस आया है। इसको लेकर शहर विधायक महेश चंद्र गुप्ता प्रयासरत हैं। मगर अब तक यह योजना धरातल पर नहीं आ सकी है।

शुरू नहीं हो सका प्लांट
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के लिए नगर पंचायत गुलड़िया के ग्राम पंचायत उतरना के मजरा सहपुरा में जगह को चिह्नित किया गया था। यह प्रोजेक्ट लगभग 12.50 करोड़ रुपये का था, इस ड्रीम प्रोजेक्ट का काम दिसंबर 2012 तक पूरा होना था, लेकिन किसी कारण से वहां पर काम नहीं हो सका। नए सिरे से इसकी प्रक्रिया शुरू करने की जरूरत है।

ठेकेदार की रहती है मनमानी
यहां नगर पालिका में रिकार्ड के अनुसार 83 ठेका कर्मचारी हैं। इनमें 36 पंप चालक, दो इलेक्ट्रिशियन, 18 बेलदार, 19 ड्राइवर हैं। आठ कर्मचारी नगर पालिका इंटर कॉलेज में लगे हैं। ठेकेदार ने इन कर्मचारियों को पिछले कई महीने का वेतन नहीं दिया है। आरोप है कि रिकार्ड में कर्मचारियों की संख्या ज्यादा, जबकि मौके पर कम है। यानी ठेका कर्मियों के मामले में ठेकेदार की मनमानी चलती है।


निजाम बदलते ही पालिका में दिखने लगा असर
निजाम बदलने के साथ ही नगर पालिका परिषद में व्यवस्थाएं बदलनी शुरू हो गई हैं। हालांकि अभी शपथ की तिथि तय नहीं हो सकी है। मगर नयी चेयरमैन के आने से पालिका के अधिकारियों-कर्मचारियों में खलबली मची है। शनिवार को अवकाश के दिन भी पालिका में काम होता रहा। बताते हैं कि अब सभी कर्मचारियों की नेमप्लेट भी उनके कक्ष के बाहर लगाई जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed