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सीएमएस ने बंद कराया ओपीडी का आपातकालीन गेट
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बदायूं। एक तरफ प्रशासन बड़ी-बड़ी बिल्डिंगों में आपात कालीन व्यवस्था के तहत खिड़की और दरवाजे लगवाने की बात कहता है। वहीं दूसरी तरफ जिला अस्पताल के सीएमएस ने ओपीडी के आपातकालीन गेट को ही बंद करा दिया है। उस पर हमेशा के लिए ताले डलवा दिए गए हैं। इससे न सिर्फ मरीजों को दिक्कत हो रही है बल्कि कोई हादसा होने पर बाहर आने के लिए भी दिक्कत खड़ी हो सकती है।
जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना आने वाले मरीजों की संख्या पर गौर करें तो सुबह से लेकर दोपहर तक अच्छी खासी भीड़ रहती है। रोजाना करीब डेढ़ हजार मरीज आते हैं। ओपीडी का सिर्फ एक मेन गेट है, बाकी बिल्डिंग चारों ओर से बंद है। उसके बीच एक लंबी गैलरी बनी हुई है। उसके दोनों ओर लाइन से कमरे बने हुए हैं और सभी के गेट गैलरी में ही खुल रहे हैं। ओपीडी के अंत में एक चैनल लगा हुआ है, जिसके ठीक सामने यूनानी अस्पताल है। यूनानी अस्पताल से दवा लेने वाले अधिकतर मरीज लंबा रास्ता न तय करके ओपीडी से होकर पहुंच जाते थे। ओपीडी के आपातकालीन गेट से वैसे भी मरीजों को आराम रहता था। भीड़भाड़ से बचते हुए मरीज इधर से निकल जाते थे लेकिन अब अस्पताल के सीएमएस ने आपातकालीन दरवाजे पर ताले डलवा दिए हैं। उसे हमेशा के लिए बंद करा दिया गया है।
इसके अलावा अस्पताल के दूसरे गेट पर भी ताले डलवा दिए गए हैं। जो कि रजिस्ट्री कार्यालय के बराबर में स्थित है। कचहरी की ओर से आने वाले अधिकतर मरीज इसी गेट से अस्पताल में घुसते थे। अब उन्हें मेन गेट से ही एंट्री करनी पड़ रही है।
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सूरत की घटना से नहीं लिया सबक
-अहमदाबाद के सूरत में कुछ दिन पहले एक कोचिंग सेंटर में भीषण आग लग गई थी, जिसमें करीब 20 बच्चों की मौत हो गई थी। अधिकतर बच्चे बिल्डिंग से नीचे कूद गए थे। इस हादसे के बाद लोगों ने न सिर्फ दुख जताया, बल्कि विभागों और कंपनियों ने बड़ी-बड़ी बिल्डिंगों में आपातकालीन रास्ते नियमित कर दिए। यहां तक जिला प्रशासन ने बड़ी-बड़ी बिल्डिंगों के मालिकों से सवाल जवाब किए थे। इसके बावजूद जिला अस्पताल के सीएमएस ने उस पर ध्यान नहीं दिया।
जिला अस्पताल के सीएमएस ने आपातकालीन दरवाजा क्यों बंद कराया है। इसके बारे में उनसे जानकारी ली जाएगी। तभी कुछ इसके बारे में बताया जा सकता है।
डॉ. प्रमिला गौड़, एडी हेल्थ
यह दरवाजा तो सीएमएस साहब ने बंद कराया है। हम इसके बारे में कुछ नहीं कह सकते कि उन्होंने क्यों बंद कराया। वैसे आपातकालीन गेट बनाए इसलिए जाते हैं कि लोगों को बाहर निकलने में आसानी हो।
डॉ. उदयवीर सिंह, सीनियर डॉक्टर जिला अस्पताल
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जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना आने वाले मरीजों की संख्या पर गौर करें तो सुबह से लेकर दोपहर तक अच्छी खासी भीड़ रहती है। रोजाना करीब डेढ़ हजार मरीज आते हैं। ओपीडी का सिर्फ एक मेन गेट है, बाकी बिल्डिंग चारों ओर से बंद है। उसके बीच एक लंबी गैलरी बनी हुई है। उसके दोनों ओर लाइन से कमरे बने हुए हैं और सभी के गेट गैलरी में ही खुल रहे हैं। ओपीडी के अंत में एक चैनल लगा हुआ है, जिसके ठीक सामने यूनानी अस्पताल है। यूनानी अस्पताल से दवा लेने वाले अधिकतर मरीज लंबा रास्ता न तय करके ओपीडी से होकर पहुंच जाते थे। ओपीडी के आपातकालीन गेट से वैसे भी मरीजों को आराम रहता था। भीड़भाड़ से बचते हुए मरीज इधर से निकल जाते थे लेकिन अब अस्पताल के सीएमएस ने आपातकालीन दरवाजे पर ताले डलवा दिए हैं। उसे हमेशा के लिए बंद करा दिया गया है।
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इसके अलावा अस्पताल के दूसरे गेट पर भी ताले डलवा दिए गए हैं। जो कि रजिस्ट्री कार्यालय के बराबर में स्थित है। कचहरी की ओर से आने वाले अधिकतर मरीज इसी गेट से अस्पताल में घुसते थे। अब उन्हें मेन गेट से ही एंट्री करनी पड़ रही है।
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सूरत की घटना से नहीं लिया सबक
-अहमदाबाद के सूरत में कुछ दिन पहले एक कोचिंग सेंटर में भीषण आग लग गई थी, जिसमें करीब 20 बच्चों की मौत हो गई थी। अधिकतर बच्चे बिल्डिंग से नीचे कूद गए थे। इस हादसे के बाद लोगों ने न सिर्फ दुख जताया, बल्कि विभागों और कंपनियों ने बड़ी-बड़ी बिल्डिंगों में आपातकालीन रास्ते नियमित कर दिए। यहां तक जिला प्रशासन ने बड़ी-बड़ी बिल्डिंगों के मालिकों से सवाल जवाब किए थे। इसके बावजूद जिला अस्पताल के सीएमएस ने उस पर ध्यान नहीं दिया।
जिला अस्पताल के सीएमएस ने आपातकालीन दरवाजा क्यों बंद कराया है। इसके बारे में उनसे जानकारी ली जाएगी। तभी कुछ इसके बारे में बताया जा सकता है।
डॉ. प्रमिला गौड़, एडी हेल्थ
यह दरवाजा तो सीएमएस साहब ने बंद कराया है। हम इसके बारे में कुछ नहीं कह सकते कि उन्होंने क्यों बंद कराया। वैसे आपातकालीन गेट बनाए इसलिए जाते हैं कि लोगों को बाहर निकलने में आसानी हो।
डॉ. उदयवीर सिंह, सीनियर डॉक्टर जिला अस्पताल