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घोटालेबाज ठेकेदार के 15 लाख के भुगतान पर रोक
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घोटालेबाज ठेकेदार के 15 लाख के भुगतान पर रोक
सत्ता पक्ष से जुड़े हैं परिवहन ठेकेदार के तार, खाद भी कर चुका है गायब
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। तीन करोड़ के खाद घोटाले में शामिल परिवहन ठेकेदार गोदाम प्रभारी से भी आगे निकला। बताया जा रहा है कि उसके तार सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं से जुड़े हुए थे। इससे उसका जमकर धंधा चल रहा था। उस पर कई लाख रुपये की खाद भी निकल रही है, न तो उसने खाद वापस की है और न ही उसका भुगतान किया है। इस पर पीसीएफ यूपी कोऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड ने ठेकेदार का करीब 15 लाख रुपये भुगतान रोक दिया है।
सिविल लाइंस थाने में दर्ज एफआईआर के मुताबिक तीन करोड़ की खाद घोटाले में गोदाम प्रभारी जगतपाल, परिवहन ठेकेदार और तत्कालीन अधिकारी शामिल थे। रिपोर्ट दर्ज होने से पहले डीएम के आदेश पर विभागीय जांच हुई थी, जिसमें तीनों लोग दोषी पाए गए थे। इसी आधार पर पीसीएफ जिला प्रबंधक ने रिपोर्ट दर्ज कराई। अब यह मामला एसआईटी के हाथ में पहुंच गया है। वहीं से इस घोटाले की जांच हो रही है। धीरे-धीरे घोटालेबाजों का पर्दाफाश भी होता जा रहा है। सूत्रों की मानें तो एफआईआर में जिस परिवहन ठेकेदार का जिक्र किया गया है, वह एक नहीं, दो लोग थे। दोनों ने पीसीएफ के परिवहन का साझेदारी में ठेका लिया था। उनका सत्ता पक्ष से जुड़े कुछ नेताओं से भी संपर्क था। इससे उन्हें कोई परेशानी नहीं आ रही थी और वे मनमानी कर रहे थे। सत्ता पक्ष से जुड़े होने की वजह से परिवहन ठेकेदार की गोदाम प्रभारी से अच्छी मिलीभगत हो गई थी। इससे गोदाम प्रभारी के भी हौसले बुलंद हो गए थे। धीरे-धीरे दोनों ने तत्कालीन अधिकारी की मदद से तीन करोड़ की खाद ही गायब कर दी।
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक परिवहन ठेकेदार पर पीसीएफ की खाद भी आ रही है। वह बाद में भुगतान देने की बात कहकर खाद ले गया था। उसके बाद न तो खाद आई और न ही उसका भुगतान किया गया। परिवहन ठेकेदार और जगतपाल ने वह खाद प्राइवेट दुकानों पर सप्लाई करा दी। इधर, पीसीएफ पर ठेकेदार का करीब 15 लाख रुपये किराया भी बाकी बताया जा रहा है। घोटाले की पोल खुलने पर पीसीएफ की ओर से उसके भुगतान पर रोक लगा दी गई है।
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सरेंडर कर सकता है घोटालेबाज गोदाम प्रभारी
तीन करोड़ के खाद घोटाले में मुख्य आरोपी गोदाम प्रभारी जगतपाल अभी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा है। उसने अपना मोबाइल भी बंद कर लिया है। पुलिस को उसकी तलाश है। सूत्रों की माने तो जगतपाल सरेंडर होने की फिराक में है। वह एक- दो दिन में सरेंडर कर सकता है।
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दूसरों को कसूरवार साबित करने में लगे घोटालेबाज
खाद घोटाले की पोल खुलने के बाद विभाग के साथ आरोपियों में खलबली मची है। वे ऐसे-ऐसे लोगों पर आरोप मढ़ते फिर रहे हैं, जिनका घोटाले से दूर तक कोई संबंध नहीं है। इसके लिए वे राजनेताओं का भी सहारा ले रहे हैं। सत्ता पक्ष से जुड़े नेताओं से दबाव डलवा रहे हैं।
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मुख्यमंत्री तक घोटाला पहुंचने की चर्चा
सूत्रों की मानें तो तीन करोड़ के खाद घोटाले का मामला लखनऊ तक पहुुंच गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसको गंभीरता से लिया है। यह भी चर्चा है कि एक-दो दिन में लखनऊ से कमेटी भी जांच करने के लिए आ सकती है। हालांकि अभी ऐसा कोई आदेश नहीं आया है लेकिन अभी से विभाग में खलबली मची है।
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सत्ता पक्ष से जुड़े हैं परिवहन ठेकेदार के तार, खाद भी कर चुका है गायब
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। तीन करोड़ के खाद घोटाले में शामिल परिवहन ठेकेदार गोदाम प्रभारी से भी आगे निकला। बताया जा रहा है कि उसके तार सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं से जुड़े हुए थे। इससे उसका जमकर धंधा चल रहा था। उस पर कई लाख रुपये की खाद भी निकल रही है, न तो उसने खाद वापस की है और न ही उसका भुगतान किया है। इस पर पीसीएफ यूपी कोऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड ने ठेकेदार का करीब 15 लाख रुपये भुगतान रोक दिया है।
सिविल लाइंस थाने में दर्ज एफआईआर के मुताबिक तीन करोड़ की खाद घोटाले में गोदाम प्रभारी जगतपाल, परिवहन ठेकेदार और तत्कालीन अधिकारी शामिल थे। रिपोर्ट दर्ज होने से पहले डीएम के आदेश पर विभागीय जांच हुई थी, जिसमें तीनों लोग दोषी पाए गए थे। इसी आधार पर पीसीएफ जिला प्रबंधक ने रिपोर्ट दर्ज कराई। अब यह मामला एसआईटी के हाथ में पहुंच गया है। वहीं से इस घोटाले की जांच हो रही है। धीरे-धीरे घोटालेबाजों का पर्दाफाश भी होता जा रहा है। सूत्रों की मानें तो एफआईआर में जिस परिवहन ठेकेदार का जिक्र किया गया है, वह एक नहीं, दो लोग थे। दोनों ने पीसीएफ के परिवहन का साझेदारी में ठेका लिया था। उनका सत्ता पक्ष से जुड़े कुछ नेताओं से भी संपर्क था। इससे उन्हें कोई परेशानी नहीं आ रही थी और वे मनमानी कर रहे थे। सत्ता पक्ष से जुड़े होने की वजह से परिवहन ठेकेदार की गोदाम प्रभारी से अच्छी मिलीभगत हो गई थी। इससे गोदाम प्रभारी के भी हौसले बुलंद हो गए थे। धीरे-धीरे दोनों ने तत्कालीन अधिकारी की मदद से तीन करोड़ की खाद ही गायब कर दी।
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विभागीय अधिकारियों के मुताबिक परिवहन ठेकेदार पर पीसीएफ की खाद भी आ रही है। वह बाद में भुगतान देने की बात कहकर खाद ले गया था। उसके बाद न तो खाद आई और न ही उसका भुगतान किया गया। परिवहन ठेकेदार और जगतपाल ने वह खाद प्राइवेट दुकानों पर सप्लाई करा दी। इधर, पीसीएफ पर ठेकेदार का करीब 15 लाख रुपये किराया भी बाकी बताया जा रहा है। घोटाले की पोल खुलने पर पीसीएफ की ओर से उसके भुगतान पर रोक लगा दी गई है।
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सरेंडर कर सकता है घोटालेबाज गोदाम प्रभारी
तीन करोड़ के खाद घोटाले में मुख्य आरोपी गोदाम प्रभारी जगतपाल अभी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा है। उसने अपना मोबाइल भी बंद कर लिया है। पुलिस को उसकी तलाश है। सूत्रों की माने तो जगतपाल सरेंडर होने की फिराक में है। वह एक- दो दिन में सरेंडर कर सकता है।
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दूसरों को कसूरवार साबित करने में लगे घोटालेबाज
खाद घोटाले की पोल खुलने के बाद विभाग के साथ आरोपियों में खलबली मची है। वे ऐसे-ऐसे लोगों पर आरोप मढ़ते फिर रहे हैं, जिनका घोटाले से दूर तक कोई संबंध नहीं है। इसके लिए वे राजनेताओं का भी सहारा ले रहे हैं। सत्ता पक्ष से जुड़े नेताओं से दबाव डलवा रहे हैं।
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मुख्यमंत्री तक घोटाला पहुंचने की चर्चा
सूत्रों की मानें तो तीन करोड़ के खाद घोटाले का मामला लखनऊ तक पहुुंच गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसको गंभीरता से लिया है। यह भी चर्चा है कि एक-दो दिन में लखनऊ से कमेटी भी जांच करने के लिए आ सकती है। हालांकि अभी ऐसा कोई आदेश नहीं आया है लेकिन अभी से विभाग में खलबली मची है।