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जेलर व डिप्टी जेलर पर गिरी गाज, तबादले पर भेजे गए

Fri, 01 Jun 2018 12:19 AM IST
Updated Fri, 01 Jun 2018 12:19 AM IST
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जेलर व डिप्टी जेलर पर गिरी गाज, तबादले पर भेजे गए
जेलर और डिप्टी जेलर पर
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गिरी गाज, तबादला किया
जिला जेल में 18 दिनों में दो घटनाओं से शासन तक मची खलबली
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं।
जिला जेल में 18 दिन के अंदर दो बड़ी घटनाएं होने पर शासन तक खलबली मच गई। पहले जेल की दीवार कूदकर बंदी सुमित भाग था। बाद में जेल के अंदर दो कैदियों ने जहर खाकर जान दे दी। इन दोनों घटनाओं की गाज जेलर प्रेम सागर शुक्ला और डिप्टी जेलर सुनील कुमार पर गिरी है। इनमें जेलर को तबादले पर गोरखपुर और डिप्टी जेलर वेद प्रकाश को बस्ती भेजा गया है। इस संबंध में जेल अधीक्षक कैलाशपति त्रिपाठी का कहना है कि दोनों लोगों का तबादला संबंधी फैक्स यहां आ गया है।
मई में ताबड़तोड़ दो वारदातें होने से बदायूं जेल लखनऊ तक चर्चा में आ गई। 12 मई की रात आठ बजे यहां जेल में बंद नवैनी गद्दी थाना हजरतनगर मुरादाबाद का बंदी सुमित रस्सी के सहारे दीवार कूदकर फरार हो गया था। उसके साथी देवकी नंदन उर्फ चंदन सिंह ने भागने की कोशिश की थी। इस घटना का पता लगने पर मौका मुआयना करने पहुंचे अफसरों को जेल परिसर में पिस्टल मिली थी। इस घटना के बाद डीआईजी जेल शशि श्रीवास्तव ने दो दिन गहनता से छानबीन की थी। इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी। तभी से जेल अफसरों पर गाज गिरना तय माना जा रहा था।
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बुधवार 30 मई की दोपहर जेल के बंदी शाहरुख व असलम ने जहर खा लिया था। जिला अस्पताल ले जाने पर दोनों को मृत घोषित कर दिया गया। उनके परिवार वाले जेल प्रशासन पर हत्या का आरोप लगा रहे हैं। डीआईजी जेल शशि श्रीवास्तव ने इस घटना की जांच करने के बाद रिपोर्ट शासन को भेजी थी। शासन ने डीआईजी जेल की जांच रिपोर्ट को गंभीरता से लिया।
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गुरुवार को शासन ने जेलर प्रेम सागर का तबादला गोरखपुर जेल कर दिया। उनकी जगह रामपुर से आदित्य कुमार को बदायूं भेजा गया है। डिप्टी जेलर सुनील कुमार का तबादला बस्ती जेल किया गया है। उनकी जगह मुरादाबाद से डिप्टी जेलर वेद प्रकाश को भेजा गया है।
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ताबीज में रखकर जेल के अंदर पहुंचा था जहर
शाहरुख ने सुसाइड नोट में जहर का भी किया जिक्र
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। जिला जेल के अंदर ताबीज में रखकर जहरीला पदार्थ पहुंचाया गया था, परंतु जहरीला पदार्थ किसने पहुंचाया और कब पहुंचाया था अभी इसका खुलासा नहीं हो सका है। माना जा रहा है कि जहरीला पदार्थ पूरी प्लानिंग के साथ जेल के अंदर पहुंचाया गया था।

डीएम दिनेश कुमार सिंह गुरुवार सुबह इसी बात का पता लगाने के लिए जिला कारागार पहुंचे थे कि आखिर जेल में जहरीला पदार्थ कैसे पहुंचा। परिवार वाले तो अपनों को जहर नहीं दे सकते परंतु दूसरा व्यक्ति भी सोच समझकर कदम उठाएगा। वह दस बार सोचेगा कि कहीं कोई जहरीले पदार्थ को खा न ले। दुकानदार भी नौजवान युवक को जहरीले पदार्थ नहीं देते हैं। ऐसे में जेल के अंदर जहरीला पहुंचने पर सवाल उठना लाजमी था। डीएम ने इसके लिए कैदियों और बंदियों से पूछताछ भी की थी परंतु कोई भी इस बारे में जानकारी नहीं दे सका। कैदी शाहरुख ने अपने सुसाइड नोट में लिखा है कि उसने ताबीज में रखवाकर जहरीला पदार्थ मंगा लिया था। उसकी जमानत तो हो नहीं सकती और न ही वह कभी जेल से बाहर आ सकेगा। इसलिए उसके पास सिर्फ आत्महत्या करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। परिवार वाले उसे माफ करें, वह अल्लाह के पास जा रहा है।
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