{"_id":"648f60bc796a3e5333059387","slug":"140-newborns-arrived-in-the-machine-before-the-mothers-lap-badaun-news-c-4-1-185658-2023-06-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Budaun News: मां की गोद से पहले मशीन में पहुंचे 140 नवजात","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Budaun News: मां की गोद से पहले मशीन में पहुंचे 140 नवजात
Mon, 19 Jun 2023 01:23 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Mon, 19 Jun 2023 01:23 AM IST
विज्ञापन
महिला अस्पताल का एसएनसीयू वार्ड।
बदायूं। गर्भावस्था के दौरान पौष्टिक आहार न लेने और चिकित्सक की समय-समय पर सलाह न लेने का असर कोख में पल रहे शिशुओं पर पड़ रहा है। प्रसव के बाद तमाम नवजातों मां की गोद से पहले मशीन में रखा जा रहा है। जिला महिला अस्पताल के एसएनसीयू (स्पेशल न्यूबाॅर्न केयर यूनिट) के ही रिकार्ड पर गौर करें तो यहां एक महीने में 140 नवजात भर्ती किए गए हैं, जिनमें सबसे ज्यादा वह बच्चे हैं, जिनका सामान्य से वजन कम है। ऐसे नवजातों का यहां इलाज तो किया जा रहा है, लेकिन कई की जान काे खतरा भी बताया जा रहा है।
गर्भावस्था के दौरान लापरवाही का भुगत रहे अंजाम
एसएनसीयू वार्ड में जो नवजात आ रहे हैं, उनकी बीमारी के पीछे की वजह माताओं की ओर से गर्भावस्था के दौरान बरती गई लापरवाही बताई जा रही है। स्त्री रोग विशेषज्ञ से लेकर बाल रोग विशेषज्ञ भी यह बता रहे हैं कि गर्भावस्था के दौरान नियमित जांचें न होना, पौष्टिक आहार न लेने का असर बच्चे पर पड़ता है। इस वजह से बच्चे कमजोर पैदा हो रहे हैं। कम समय में पैदा होने वाले बच्चे सांस की परेशानी से ग्रसित हैं।
दो-दो अस्पतालों के लगा रहे चक्कर
एसएनसीयू में भर्ती कई नवजात ऐसे हैं, जिनकी मां दूसरे अस्पतालों में भर्ती हैं। ऐसे में उनके पिरजनों को दो-दो अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। एसएनसीयू में वह बच्चे की वजह से रुकते हैं तो दूसरे अस्पताल में प्रसूता का ख्याल भी रखना पड़ता है।
विज्ञापन
कम समय में पैदा हो रहे बच्चों के फेफड़े नहीं हो पाते विकसित
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ व एसएनसीयू प्रभारी डॉ. संदीप वार्ष्णेय ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान माताओं को पौष्टिक आहार न मिलने का असर कोख में पल रहे बच्चे पर पड़ता है। साथ ही गांव-देहात में नियमित तौर पर चेकअप नहीं कराए जाते हैं। इस वजह से पता नहीं चल पाता कि कोख में पल रहे बच्चे का स्वास्थ्य कैसा है। अधिकांश बच्चे एसएनसीयू में ऑक्सीजन की कमी के शिकार आ रहे हैं। हालांकि हम पूरी कोशिश करते हैं कि बच्चे को पूरी तरह से स्वस्थ होने के बाद ही उनके घर भेजें।
विज्ञापन
गर्भावस्था के दौरान लापरवाही का भुगत रहे अंजाम
एसएनसीयू वार्ड में जो नवजात आ रहे हैं, उनकी बीमारी के पीछे की वजह माताओं की ओर से गर्भावस्था के दौरान बरती गई लापरवाही बताई जा रही है। स्त्री रोग विशेषज्ञ से लेकर बाल रोग विशेषज्ञ भी यह बता रहे हैं कि गर्भावस्था के दौरान नियमित जांचें न होना, पौष्टिक आहार न लेने का असर बच्चे पर पड़ता है। इस वजह से बच्चे कमजोर पैदा हो रहे हैं। कम समय में पैदा होने वाले बच्चे सांस की परेशानी से ग्रसित हैं।
विज्ञापन
दो-दो अस्पतालों के लगा रहे चक्कर
एसएनसीयू में भर्ती कई नवजात ऐसे हैं, जिनकी मां दूसरे अस्पतालों में भर्ती हैं। ऐसे में उनके पिरजनों को दो-दो अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। एसएनसीयू में वह बच्चे की वजह से रुकते हैं तो दूसरे अस्पताल में प्रसूता का ख्याल भी रखना पड़ता है।
विज्ञापन
कम समय में पैदा हो रहे बच्चों के फेफड़े नहीं हो पाते विकसित
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ व एसएनसीयू प्रभारी डॉ. संदीप वार्ष्णेय ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान माताओं को पौष्टिक आहार न मिलने का असर कोख में पल रहे बच्चे पर पड़ता है। साथ ही गांव-देहात में नियमित तौर पर चेकअप नहीं कराए जाते हैं। इस वजह से पता नहीं चल पाता कि कोख में पल रहे बच्चे का स्वास्थ्य कैसा है। अधिकांश बच्चे एसएनसीयू में ऑक्सीजन की कमी के शिकार आ रहे हैं। हालांकि हम पूरी कोशिश करते हैं कि बच्चे को पूरी तरह से स्वस्थ होने के बाद ही उनके घर भेजें।