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घरों में चीत्कार, गांव में सन्नाटा
Updated Mon, 17 Sep 2018 01:57 AM IST
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बदायूं/ सिलहरी। गाजियाबाद-हापुड़ हाईवे पर हुए हादसे की सूचना मिलने के बाद रविवार को तीनों घरों में कोहराम मचा रहा। हादसे का पता लगने पर गुराई गांव में मातम छा गया, जिससे गलियों में सन्नाटा पसरा रहा। पड़ोसी, रिश्तेदार और गांव वाले पीड़ित परिवारों को ढाढ़स बंधाने में लगे रहे। शाम को तीनों शव गुराई गांव लाए गए तो पूरा गांव रो पड़ा।
गुराई निवासी नरेंद्र कुमार उर्फ रवि पटेल बसपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक रामसेवक सिंह के रिश्तेदार थे। उनका बड़ा कारोबार है। गांव के पास में उनका भट्ठा है। गांव तो क्या आस-पास इलाके में शायद ही कोई होगा, जो उनसे परिचित न रहा। साथ ही पूर्व विधायक रामसेवक सिंह पटेल के रिश्तेदार होने के नाते उनकी अच्छी पहचान थी। एक बार उन्होंने जिला पंचायत सदस्य पद के लिए चुनाव भी लड़ा था। उनके दो बेटे और एक बेटी है, जिसकी शादी हो चुकी है। पूर्व विधायक रामसेवक सिंह पटेल के बराबर में उनकी कोठी है।
वहीं ग्राम प्रधान रवेंद्र (रविंद्र) भी खुशमिजाज थे। लोगों के बुरे वक्त में काम आए, इसलिए गांव वालों के चहेते रहे और प्रधानी का चुनाव भी जीते। उनके एक बेटा और एक बेटी है।
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हादसे में शिकार हुए विजेंद्र राठौर के भी दो बच्चे हैं। बेटा हर्षित और बेटी खुशी है।
इस हादसे की जानकारी परिवार वालों को रात करीब तीन बजे मिली। तभी मृतकों के घरों में कोहराम मच गया। इससे आस-पास के लोग जाग गए। कुछ ही देर में यह खबर गांव में आग की तरह फैल गई, जिसने भी सुना कि लोग उनके घरों की ओर दौड़ पड़े। परिवार वाले उसी समय हापुड़ के लिए निकल गए थे लेकिन मृतकों के घर लोगों की भीड़ कम नहीं हुई। दिनभर आने-जाने वाले लोगों की लाइन लगी रही। रात आठ बजे तीनों शव एक साथ गांव पहुंचे कि उन्हें देखने वाले भी रो पड़े। देर रात तक तीनों घरों में चीत्कार मची रही है। उनके परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हाल है।
भट्ठे पर होगा रवि का अंतिम संस्कार
बसपा नेता रवि पटेल के शव का भट्ठे पर ही अंतिम संस्कार होगा। उनके घर जुटे रिश्तेदारों और परिवार वालों ने इसका फैसला लिया है। परिजनों का कहना है कि इस हादसे ने पूरे परिवार की खुशियां छीन ली हैं। दूसरी जगह अंतिम संस्कार करके वह रवि पटेल की याद को खोना नहीं चाहते।
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गुराई निवासी नरेंद्र कुमार उर्फ रवि पटेल बसपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक रामसेवक सिंह के रिश्तेदार थे। उनका बड़ा कारोबार है। गांव के पास में उनका भट्ठा है। गांव तो क्या आस-पास इलाके में शायद ही कोई होगा, जो उनसे परिचित न रहा। साथ ही पूर्व विधायक रामसेवक सिंह पटेल के रिश्तेदार होने के नाते उनकी अच्छी पहचान थी। एक बार उन्होंने जिला पंचायत सदस्य पद के लिए चुनाव भी लड़ा था। उनके दो बेटे और एक बेटी है, जिसकी शादी हो चुकी है। पूर्व विधायक रामसेवक सिंह पटेल के बराबर में उनकी कोठी है।
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वहीं ग्राम प्रधान रवेंद्र (रविंद्र) भी खुशमिजाज थे। लोगों के बुरे वक्त में काम आए, इसलिए गांव वालों के चहेते रहे और प्रधानी का चुनाव भी जीते। उनके एक बेटा और एक बेटी है।
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हादसे में शिकार हुए विजेंद्र राठौर के भी दो बच्चे हैं। बेटा हर्षित और बेटी खुशी है।
इस हादसे की जानकारी परिवार वालों को रात करीब तीन बजे मिली। तभी मृतकों के घरों में कोहराम मच गया। इससे आस-पास के लोग जाग गए। कुछ ही देर में यह खबर गांव में आग की तरह फैल गई, जिसने भी सुना कि लोग उनके घरों की ओर दौड़ पड़े। परिवार वाले उसी समय हापुड़ के लिए निकल गए थे लेकिन मृतकों के घर लोगों की भीड़ कम नहीं हुई। दिनभर आने-जाने वाले लोगों की लाइन लगी रही। रात आठ बजे तीनों शव एक साथ गांव पहुंचे कि उन्हें देखने वाले भी रो पड़े। देर रात तक तीनों घरों में चीत्कार मची रही है। उनके परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हाल है।
भट्ठे पर होगा रवि का अंतिम संस्कार
बसपा नेता रवि पटेल के शव का भट्ठे पर ही अंतिम संस्कार होगा। उनके घर जुटे रिश्तेदारों और परिवार वालों ने इसका फैसला लिया है। परिजनों का कहना है कि इस हादसे ने पूरे परिवार की खुशियां छीन ली हैं। दूसरी जगह अंतिम संस्कार करके वह रवि पटेल की याद को खोना नहीं चाहते।