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ऐसे तो गोशाला गेट पर दमतोड़ देगीं तस्करों के चंगुल से बरामद गायें
Updated Wed, 27 Dec 2017 01:03 AM IST
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बीमार गाय।
- फोटो : अमर उजाला
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उझानी (बदायूं)। पहले से ओवरलोड हो चुकी गोशाला के लिए माल-मुकद्मा में बरामद गो-वंशीय पशु मुसीबत बन गए हैं। बरामद पशुओं में खासकर गायों की हालत ऐसी नहीं होती कि वे ठीक से चल भी पाएं। ऊपर से तस्कर उन्हें वाहनों में लोड करते समय क्रूरता की हदें तोड़ देते हैं। यहां तक कि उन्हें नशे के इंजेक्शन लगाने से भी गुरेज नहीं किया जाता। कुछ ऐसी ही हालत के गो-वंशीय अलापुर पुलिस ने तीन दिन पहले पकड़े। इनमें 11 बीमार गायों को गोशाला प्रबंधन ने सुपुर्दगी में लेने से इंकार कर दिया तो पुलिस कर्मी गेट पर ही छोड़ गए। बाद में गोशाला प्रबंधन ही आगे आया और गायों का इलाज शुरू कराया।
श्री कामधेनु गोशाला के गेट पर मंगलवार सुबह चार-पांच गाएं तड़पती मिलीं। उन्हें देखने के लिए राहगीरों के कदम भी थमे लेकिन हर कोई उन पर एक नजर डालने के बाद चलता बना। गेट पर तड़पती गायों के बारे में गोशाला के कर्मचारी की मानें तो इनमें ऐसी एक भी गाय ऐसी नहीं थी जिसकी हालत ठीक हो। इन्हें गोशाला के अंदर इसलिए भी नहीं लिया गया कि बीमारी की वजह से दूसरे पशुओं में इंफेक्शन फैलने का डर था। तीन दिन पहले अलापुर पुलिस एक वाहन से 26 गायों को लेकर आई थी। इनमें 15 की हालत ठीक थी जिन्हें गोशाला ने अपनी सुपुर्दगी में ले लिया। बाकी बची 11 गायों को वापस ले जाने की सलाह दी गई लेकिन पुलिस ने उन्हें गेट पर ही छोड़ दिया।
बीमार 11 गायों में सोमवार शाम एक की मौत भी हो गई। जब कोई आगे नहीं आया तो गोशाला प्रबंधन ने गेट पर छोड़ी गईं बीमार गायों का पशु चिकित्सक विवेक कुमार से इलाज शुरू कराया।
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इससे पहले 12 दिसंबर को कुंवरगांव पुलिस ने 21 गो-वंशीय पशुुओं को गोशाला के हवाले किया था। उनमें भी छह-सात बीमार थे।
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पच्चीस रुपये में कैसे भरेगा गायों का पेट
उझानी। तस्करों के चंगुल से बरामद गाय, बछड़ों और बैल के लिए सुपुर्दगी में देने के अलावा पुलिस के सामने कोई दूसरा विकल्प नहीं होता। आरोपियों का मालिकाना हक साबित होने पर उन्हें रिलीज करने का समय आता है तो कोर्ट प्रति पशु पर खाना खर्चा का आकलन कर रुपये गोशाला को मुहैया कराने का आदेश करता है। पिछले महीने माल-मुकदमा के जो पशु रिलीज किए, उसमें प्रति पशु 25 रुपया गोशाला को अवमुक्त किया गया। इसके विपरीत गोशाला प्रबंधक रतन जिंदल ने बताया कि प्रति गाय पर चारा और देखभाल के रूप में प्रतिदिन 75 रुपया खर्च हो जाता है। वैसे भी, गोशाला में करीब 200 पशुओं के रहने की क्षमता है। इस समय 250 से अधिक गाय, बछड़े और बैल गोशाला में हैं।
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वर्जन
गोशाला में बीमार पशुओं के बारे में जब भी उन्हें सूचना मिलती है, मौके पर पहुंचकर इलाज किया जाता है। सोमवार और मंगलवार को भी गोशाला के गेट पर बीमार गायों का इलाज किया। जो गाए बीमार हैं, उनमें तीन-चार की हालत नाजुक बनी हुई है।
- विवेक कुमार, पशु चिकित्साधिकारी।
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वर्जन
गोशाला के लिए वर्ष-2014 से कोई अनुदान नहीं मिला है। जबकि पुलिस बरामद पशुओं को भेजती रहती है। गोशाला ओवरलोड बताकर पशु लेने से इंकार पर भी पुलिस नहीं मानती। अनाज मंडी के व्यापारियों के अंशदान और दानदाताओं के जरिए ही पशुओं को चारा मुहैया कराया जा रहा है।
-रतन जिंदल, अध्यक्ष गोशाला कमेटी।
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श्री कामधेनु गोशाला के गेट पर मंगलवार सुबह चार-पांच गाएं तड़पती मिलीं। उन्हें देखने के लिए राहगीरों के कदम भी थमे लेकिन हर कोई उन पर एक नजर डालने के बाद चलता बना। गेट पर तड़पती गायों के बारे में गोशाला के कर्मचारी की मानें तो इनमें ऐसी एक भी गाय ऐसी नहीं थी जिसकी हालत ठीक हो। इन्हें गोशाला के अंदर इसलिए भी नहीं लिया गया कि बीमारी की वजह से दूसरे पशुओं में इंफेक्शन फैलने का डर था। तीन दिन पहले अलापुर पुलिस एक वाहन से 26 गायों को लेकर आई थी। इनमें 15 की हालत ठीक थी जिन्हें गोशाला ने अपनी सुपुर्दगी में ले लिया। बाकी बची 11 गायों को वापस ले जाने की सलाह दी गई लेकिन पुलिस ने उन्हें गेट पर ही छोड़ दिया।
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बीमार 11 गायों में सोमवार शाम एक की मौत भी हो गई। जब कोई आगे नहीं आया तो गोशाला प्रबंधन ने गेट पर छोड़ी गईं बीमार गायों का पशु चिकित्सक विवेक कुमार से इलाज शुरू कराया।
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इससे पहले 12 दिसंबर को कुंवरगांव पुलिस ने 21 गो-वंशीय पशुुओं को गोशाला के हवाले किया था। उनमें भी छह-सात बीमार थे।
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पच्चीस रुपये में कैसे भरेगा गायों का पेट
उझानी। तस्करों के चंगुल से बरामद गाय, बछड़ों और बैल के लिए सुपुर्दगी में देने के अलावा पुलिस के सामने कोई दूसरा विकल्प नहीं होता। आरोपियों का मालिकाना हक साबित होने पर उन्हें रिलीज करने का समय आता है तो कोर्ट प्रति पशु पर खाना खर्चा का आकलन कर रुपये गोशाला को मुहैया कराने का आदेश करता है। पिछले महीने माल-मुकदमा के जो पशु रिलीज किए, उसमें प्रति पशु 25 रुपया गोशाला को अवमुक्त किया गया। इसके विपरीत गोशाला प्रबंधक रतन जिंदल ने बताया कि प्रति गाय पर चारा और देखभाल के रूप में प्रतिदिन 75 रुपया खर्च हो जाता है। वैसे भी, गोशाला में करीब 200 पशुओं के रहने की क्षमता है। इस समय 250 से अधिक गाय, बछड़े और बैल गोशाला में हैं।
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वर्जन
गोशाला में बीमार पशुओं के बारे में जब भी उन्हें सूचना मिलती है, मौके पर पहुंचकर इलाज किया जाता है। सोमवार और मंगलवार को भी गोशाला के गेट पर बीमार गायों का इलाज किया। जो गाए बीमार हैं, उनमें तीन-चार की हालत नाजुक बनी हुई है।
- विवेक कुमार, पशु चिकित्साधिकारी।
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वर्जन
गोशाला के लिए वर्ष-2014 से कोई अनुदान नहीं मिला है। जबकि पुलिस बरामद पशुओं को भेजती रहती है। गोशाला ओवरलोड बताकर पशु लेने से इंकार पर भी पुलिस नहीं मानती। अनाज मंडी के व्यापारियों के अंशदान और दानदाताओं के जरिए ही पशुओं को चारा मुहैया कराया जा रहा है।
-रतन जिंदल, अध्यक्ष गोशाला कमेटी।