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‘अम्मा की जान बचाने गए थे, लाश लेकर लौटे’
Updated Tue, 16 Jan 2018 12:07 AM IST
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सोमवार को बाबा कॉलोनी में बरेली अस्पताल में हुए हादसे की जानकारी देते मृतका मंगला के परिवार वाले।
- फोटो : अमर उजाला
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बदायूं। बरेली के साईं हास्पिटल अग्निकांड में मरी दोनों महिलाएं बदायूं जिले की थीं। इनमें से एक मूसाझाग के गांव मोहम्मद नगर सुलरा की निवासी राजबाला तो दूसरी वृद्धा मंगला देवी शहर की बाबा कॉलोनी की थीं। मंगला के परिवार वाले उनके शव को बिना पोस्टमार्टम ले आए। उन्होंने अस्पताल में हुई विभीषिका की आंखों देखी दास्तां बताई। बदायूं के इन्हीं लोगों की बदौलत अस्पताल की आईसीयू में फंसे कई मरीजों की जान बच सकी।
बाबा कॉलोनी में एक छोर पर बने मंगला देवी (65) के घर पर सोमवार दोपहर भारी भीड़ जमा थी। घर की महिलाएं बरामदे में उनका झुलसा हुआ शव रखकर विलाप कर रहीं थीं। परिवार का व्यवहार ही था जो बस्ती के मुस्लिम परिवारों की कई महिलाएं भी यहां शोक जताने पहुंचीं। मंगला देवी की विवाहित बेटी सोनू ने बताया कि मां को गुर्दे में सिकुड़न की बीमारी थी। बारह साल से र्साइं हास्पिटल से उनकी दवा चल रही थी। दो या तीन महीने बाद उन्हें अस्पताल में डायलिसिस आदि के लिए ले जाते थे। परिवार की आर्थिक हालत अच्छी नहीं है पर अम्मा सबको प्यारी थीं। इसलिए किसी भी तरह रकम जुटाकर उनका इलाज करा रहे थे। इस बार छह जनवरी को अम्मा को अस्पताल ले गए थे। तब से उन्हें वेंटीलेटर पर रखा गया था। रविवार रात बारह बजे उनकी तबीयत बिगड़ी तो स्टाफ आईसीयू में ले गया। परिवार के चौदह लोग अस्पताल में थे। सभी आईसीयू के बाहर बिस्तर बिछाकर बैठ गए। कई बार कहा पर किसी स्टाफ ने उन्हें अम्मा को नहीं देखने दिया। अंदर से आईसीयू का गेट लॉक कर लिया। वह लोग अम्मा के सही होने की प्रार्थना कर रहे थे। सुबह चार बजे अस्पताल का एक कर्मचारी दूसरी ओर से भागता हुआ आया और अंदर आग लगने की सूचना दी। अंदर से धुआं उठ रहा था तो आग की लपटें भी दिखीं। तब उन लोगों ने आईसीयू के मेन गेट को धक्का देकर खोलने की कोशिश की। गेट नहीं खुला तो फायर सिलेंडर उठाकर आग बुझाने की कोशिश की। यह खाली निकला। तब उन्होंने फायर सिलेंडर उठाकर गेट के शीशे में दे मारा। तब टूटे गेट से होकर वह अंदर गए। वहां काफी धुआं और अंधेरा था। अम्मा तक पहुंचने से पहले जो लोग मिले, उन्हें बेड से खींचकर बाहर पहुंचाया। जब तक अम्मा मिलीं, वह दम तोड़ चुकी थीं। उनका शरीर पूरी तरह जल चुका था। वह लोग शव लेकर बाहर निकले। इससे पहले आईसीयू के कर्मचारी दूसरे गेट से निकल भागे। अंदर उन्हें शराब के खाली क्वार्टर मिले जो उन्होंने पुलिस और मीडिया वालों को दिखाए। मंगला देवी के बेटे नीरज उर्फ कल्लू भी उदास बैठे थे। उन्होंने बताया कि अब तक अम्मा के इलाज में लाखों रुपया लगा चुके हैं। उम्मीद थी कि अम्मा हमेशा की तरह फिर सही हो जाएंगी पर इस हादसे ने उनके घर की मुखिया को उनसे छीन लिया।
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बड़ा परिवार है मंगला का
बदायूं। मंगला देवी के पति की मौत कई साल पहले हो गई थी। उनका काफी बड़ा परिवार है। तीन बेटों में से एक की कई साल पहले बीमारी से मौत हो चुकी है। दो बेटे नीरज और मटरू टेंपो चलाते हैं। इसके अलावा उनकी छह बेटियां हैं। इन सभी की शादी हो चुकी है। भरा-पूरा परिवार उन्हें बहुत चाहता था। उनकी मौत के बाद सभी के चेहरे उदास थे।
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हमें नहीं करानी और दुर्दशा
बदायूं। मंगला के पुत्र मटरू ने बताया कि उनकी मां के शव की पहले ही काफी दुर्दशा हो चुकी है। इसलिए उन्होंने पोस्टमार्टम कराने से इंकार किया और शव ले आए। बताया कि वह कोई कानूनी कार्रवाई करना नहीं चाहते। उनकी मां की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों को ऊपरवाला ही सजा देगा।
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बाबा कॉलोनी में एक छोर पर बने मंगला देवी (65) के घर पर सोमवार दोपहर भारी भीड़ जमा थी। घर की महिलाएं बरामदे में उनका झुलसा हुआ शव रखकर विलाप कर रहीं थीं। परिवार का व्यवहार ही था जो बस्ती के मुस्लिम परिवारों की कई महिलाएं भी यहां शोक जताने पहुंचीं। मंगला देवी की विवाहित बेटी सोनू ने बताया कि मां को गुर्दे में सिकुड़न की बीमारी थी। बारह साल से र्साइं हास्पिटल से उनकी दवा चल रही थी। दो या तीन महीने बाद उन्हें अस्पताल में डायलिसिस आदि के लिए ले जाते थे। परिवार की आर्थिक हालत अच्छी नहीं है पर अम्मा सबको प्यारी थीं। इसलिए किसी भी तरह रकम जुटाकर उनका इलाज करा रहे थे। इस बार छह जनवरी को अम्मा को अस्पताल ले गए थे। तब से उन्हें वेंटीलेटर पर रखा गया था। रविवार रात बारह बजे उनकी तबीयत बिगड़ी तो स्टाफ आईसीयू में ले गया। परिवार के चौदह लोग अस्पताल में थे। सभी आईसीयू के बाहर बिस्तर बिछाकर बैठ गए। कई बार कहा पर किसी स्टाफ ने उन्हें अम्मा को नहीं देखने दिया। अंदर से आईसीयू का गेट लॉक कर लिया। वह लोग अम्मा के सही होने की प्रार्थना कर रहे थे। सुबह चार बजे अस्पताल का एक कर्मचारी दूसरी ओर से भागता हुआ आया और अंदर आग लगने की सूचना दी। अंदर से धुआं उठ रहा था तो आग की लपटें भी दिखीं। तब उन लोगों ने आईसीयू के मेन गेट को धक्का देकर खोलने की कोशिश की। गेट नहीं खुला तो फायर सिलेंडर उठाकर आग बुझाने की कोशिश की। यह खाली निकला। तब उन्होंने फायर सिलेंडर उठाकर गेट के शीशे में दे मारा। तब टूटे गेट से होकर वह अंदर गए। वहां काफी धुआं और अंधेरा था। अम्मा तक पहुंचने से पहले जो लोग मिले, उन्हें बेड से खींचकर बाहर पहुंचाया। जब तक अम्मा मिलीं, वह दम तोड़ चुकी थीं। उनका शरीर पूरी तरह जल चुका था। वह लोग शव लेकर बाहर निकले। इससे पहले आईसीयू के कर्मचारी दूसरे गेट से निकल भागे। अंदर उन्हें शराब के खाली क्वार्टर मिले जो उन्होंने पुलिस और मीडिया वालों को दिखाए। मंगला देवी के बेटे नीरज उर्फ कल्लू भी उदास बैठे थे। उन्होंने बताया कि अब तक अम्मा के इलाज में लाखों रुपया लगा चुके हैं। उम्मीद थी कि अम्मा हमेशा की तरह फिर सही हो जाएंगी पर इस हादसे ने उनके घर की मुखिया को उनसे छीन लिया।
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बड़ा परिवार है मंगला का
बदायूं। मंगला देवी के पति की मौत कई साल पहले हो गई थी। उनका काफी बड़ा परिवार है। तीन बेटों में से एक की कई साल पहले बीमारी से मौत हो चुकी है। दो बेटे नीरज और मटरू टेंपो चलाते हैं। इसके अलावा उनकी छह बेटियां हैं। इन सभी की शादी हो चुकी है। भरा-पूरा परिवार उन्हें बहुत चाहता था। उनकी मौत के बाद सभी के चेहरे उदास थे।
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हमें नहीं करानी और दुर्दशा
बदायूं। मंगला के पुत्र मटरू ने बताया कि उनकी मां के शव की पहले ही काफी दुर्दशा हो चुकी है। इसलिए उन्होंने पोस्टमार्टम कराने से इंकार किया और शव ले आए। बताया कि वह कोई कानूनी कार्रवाई करना नहीं चाहते। उनकी मां की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों को ऊपरवाला ही सजा देगा।