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वाह? ग्राम प्रधान तक के घर में नहीं है शौचालय
Updated Thu, 07 Sep 2017 08:59 PM IST
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कादरचौक।
ग्राम मुगरा टटेई में प्रधान के घर तक में शौचालय नहीं है। गांव के ज्यादातर लोग भी खुले में शौच को जाते हैं। महिलाएं तड़के ही शौच को निकल पड़ती हैं।
ब्लाक मुख्यालय से करीब 10 किमी दूर मुगरा टटेई जो कि वर्ष 2012-13 में लोहिया ग्राम भी रहा है उसकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। ग्राम मुगरा टटेई में मुंशी नगला प्रथम मुंशीनगला द्वितीय गवडूनगला,नब्बीनगला,अंगननगला,पुन्नीनगला,लक्ष्मणनगला, छविनगला जुम्मीनगला समेत नौ मजरे हैं। मुगरा टटेई गैर आबाद गांव है। सभी गांव गंगा के किनारे के हैं। ग्राम पचायत में तीन लोग सरकारी सेवा में हैं, जिनमें दो शिक्षामित्र और एक आंगनबाड़ी है। गांव को 2012-13 में लोहिया गांव घोषित किया गया था। उस समय 503 शौचालय गांव को दिए गए थे, लेकिन उनमें से अधिकतर शौचालय चालू नहीं हैं। मात्र दो शौचालय काम में लिए जा रहे हैं। गांव की लगभग छह हजार आबादी खुले में शौच के लिए जाती है। यहां के प्रधान हबीब अहमद के घर में भी शौचालय नहीं हैं। गांव के ही राशिद ने बताया कि जो शौचालय बने भी हैं वह बहुत ही घटिया किस्म के बनाए गए हैं। किसी में गेट नहीं लगा तो किसी में छत ही नहीं पड़ी है। यह किसी काबिल नहीं हैं। लोगों को गंगा की ओर शौच को जाना पड़ता हैं। पास में ही गन्ने के बड़े-बड़े खेत हैं जहां महिलाएं शौच को जातीं हैं।
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क्या कहते हैं लोग
गंगा किनारे के इन गांव में पानी का वाटर लेवल मात्र छह फुट नीचे हैं। शुष्क शौचालयों का गड्ढा तीन फुट खोदा जाता है । नीचे भी पक्का फर्श नहीं होता है, इस कारण घरों में बने शौचालय से नलों में दूषित पानी आता है।
-गौशान अहमद
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जो शौचालय मिले थे वह बहुत ही घटिया बने थे। उनमें से 70 प्रतिशत बंद हैं। बहुत ही कम ठीक हैं। अधिकतर लोग खुले में ही शौच को जाते हैं। गंगा मात्र 400 मीटर दूर है।
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- अमरीना
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हमें तो शौचालय मिला ही नही हैं, गरीबी के कारण बनवा भी नहीं पा रहे हैं। मजबूरन खुले में शौच को जाना पड़ता है। उन्हें भी यह अच्छा नहीं लगता है।
-जायदा
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शौचालय बनवाने को मैंने ईंट मंगवा ली हैं, जल्दी ही शौचालय बनवा लेंगे। ग्रामीणों के लिए भी और शौचालयों की मांग की गई है। अधिकारियों की अनुमति मिली तो पक्का टैंक बनवाने का प्रयास करेंगे जिससे घरों के नलों का पानी भी खराब न हो। फोटो
- हबीब अहमद, प्रधान
ग्राम मुगरा टटेई में प्रधान के घर तक में शौचालय नहीं है। गांव के ज्यादातर लोग भी खुले में शौच को जाते हैं। महिलाएं तड़के ही शौच को निकल पड़ती हैं।
ब्लाक मुख्यालय से करीब 10 किमी दूर मुगरा टटेई जो कि वर्ष 2012-13 में लोहिया ग्राम भी रहा है उसकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। ग्राम मुगरा टटेई में मुंशी नगला प्रथम मुंशीनगला द्वितीय गवडूनगला,नब्बीनगला,अंगननगला,पुन्नीनगला,लक्ष्मणनगला, छविनगला जुम्मीनगला समेत नौ मजरे हैं। मुगरा टटेई गैर आबाद गांव है। सभी गांव गंगा के किनारे के हैं। ग्राम पचायत में तीन लोग सरकारी सेवा में हैं, जिनमें दो शिक्षामित्र और एक आंगनबाड़ी है। गांव को 2012-13 में लोहिया गांव घोषित किया गया था। उस समय 503 शौचालय गांव को दिए गए थे, लेकिन उनमें से अधिकतर शौचालय चालू नहीं हैं। मात्र दो शौचालय काम में लिए जा रहे हैं। गांव की लगभग छह हजार आबादी खुले में शौच के लिए जाती है। यहां के प्रधान हबीब अहमद के घर में भी शौचालय नहीं हैं। गांव के ही राशिद ने बताया कि जो शौचालय बने भी हैं वह बहुत ही घटिया किस्म के बनाए गए हैं। किसी में गेट नहीं लगा तो किसी में छत ही नहीं पड़ी है। यह किसी काबिल नहीं हैं। लोगों को गंगा की ओर शौच को जाना पड़ता हैं। पास में ही गन्ने के बड़े-बड़े खेत हैं जहां महिलाएं शौच को जातीं हैं।
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क्या कहते हैं लोग
गंगा किनारे के इन गांव में पानी का वाटर लेवल मात्र छह फुट नीचे हैं। शुष्क शौचालयों का गड्ढा तीन फुट खोदा जाता है । नीचे भी पक्का फर्श नहीं होता है, इस कारण घरों में बने शौचालय से नलों में दूषित पानी आता है।
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-गौशान अहमद
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जो शौचालय मिले थे वह बहुत ही घटिया बने थे। उनमें से 70 प्रतिशत बंद हैं। बहुत ही कम ठीक हैं। अधिकतर लोग खुले में ही शौच को जाते हैं। गंगा मात्र 400 मीटर दूर है।
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- अमरीना
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हमें तो शौचालय मिला ही नही हैं, गरीबी के कारण बनवा भी नहीं पा रहे हैं। मजबूरन खुले में शौच को जाना पड़ता है। उन्हें भी यह अच्छा नहीं लगता है।
-जायदा
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शौचालय बनवाने को मैंने ईंट मंगवा ली हैं, जल्दी ही शौचालय बनवा लेंगे। ग्रामीणों के लिए भी और शौचालयों की मांग की गई है। अधिकारियों की अनुमति मिली तो पक्का टैंक बनवाने का प्रयास करेंगे जिससे घरों के नलों का पानी भी खराब न हो। फोटो
- हबीब अहमद, प्रधान