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श्रद्धा से मनाई गई देवोत्थानी एकादशी
Updated Tue, 31 Oct 2017 11:57 PM IST
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गन्ना खरीदते श्रद्धालु।
- फोटो : अमर उजाला
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बदायूं। व्रत, सत्यनारायण कथा के श्रवण तथा और भगवान विष्णु की पूजा के साथ मंगलवार को श्रद्धा के साथ देवोत्थानी एकादशी मनाई गई। दिनभर गन्ना, सिंघाड़ा और शकरकंद की खरीदारी होती रही। ग्रामीणांचल में खेत, फसलों को कीट-पतंगों और रोग से बचाने के लिए शाम को मशाल जलाए गए।
देवोत्थानी एकादशी के लिए एक दिन पहले से ही तैयारियां शुरू हो गई थी। शहर के प्रमुख चौराहों पर गन्ने, सिंघाड़े, शकरकंद और सुथनी की जमकर की खरीद-फरोख्त हुई। मंगलवार को सुबह से ही श्रद्धालुओं ने व्रत रखा। दोपहर बाद कई लोगों ने सत्यनारायण व्रत कथा का श्रवण किया। मान्यता है कि एकादशी को गन्ना चूसने से दांत में रोग नहीं होते। इसी परंपरा को निभाते हुए लोगों ने जमकर गन्ना खरीदा। दिनभर साइकिल, बाइक और वाहनों पर लोग गन्ना लाते-ले-जाते दिखे। व्रतधारियों ने सिंघाड़ा और शकरकंद का फलाहार किया। भगवान विष्णु का विशेष पूजन-अर्चन किया गया, जिसमें नए अन्न का अर्पण किया गया। कथा श्रवण के साथ आरती पूजन के बाद चरणामृत और प्रसाद बांटा गया। शाम होते ही ग्रामीणांचल में बच्चों ने टायर और घास-फूस से मशाल बनाए और उन्हें घूम-घूमकर खेत और फसलों के आसपास जलाया गया।
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देवोत्थानी एकादशी के लिए एक दिन पहले से ही तैयारियां शुरू हो गई थी। शहर के प्रमुख चौराहों पर गन्ने, सिंघाड़े, शकरकंद और सुथनी की जमकर की खरीद-फरोख्त हुई। मंगलवार को सुबह से ही श्रद्धालुओं ने व्रत रखा। दोपहर बाद कई लोगों ने सत्यनारायण व्रत कथा का श्रवण किया। मान्यता है कि एकादशी को गन्ना चूसने से दांत में रोग नहीं होते। इसी परंपरा को निभाते हुए लोगों ने जमकर गन्ना खरीदा। दिनभर साइकिल, बाइक और वाहनों पर लोग गन्ना लाते-ले-जाते दिखे। व्रतधारियों ने सिंघाड़ा और शकरकंद का फलाहार किया। भगवान विष्णु का विशेष पूजन-अर्चन किया गया, जिसमें नए अन्न का अर्पण किया गया। कथा श्रवण के साथ आरती पूजन के बाद चरणामृत और प्रसाद बांटा गया। शाम होते ही ग्रामीणांचल में बच्चों ने टायर और घास-फूस से मशाल बनाए और उन्हें घूम-घूमकर खेत और फसलों के आसपास जलाया गया।
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