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एक पैर पर खड़े रहे दिव्यांग, नहीं आए दो डॉक्टर

Thu, 01 Feb 2018 07:08 PM IST
Updated Thu, 01 Feb 2018 07:08 PM IST
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एक पैर पर खड़े रहे दिव्यांग, नहीं आए दो डॉक्टर
फोटो-9 व 10
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दिन भर खड़े रहे दिव्यांग
नहीं आए दो डॉक्टर
विकलांग बोर्ड में अव्यवस्थाएं हावी, कई बिना प्रमाणपत्र बनवाए लौटे
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं।
अफसरों की अनदेखी से विकलांग बोर्ड में अव्यवस्थाएं हावी हो गई हैं। हर गुरुवार दिव्यांगों को सुबह ही प्रमाणपत्र बनवाने के लिए तो बुलवा लिया जाता है पर डॉक्टर पहुंचते ही नहीं। इस गुरुवार भी ऐसा ही हाल रहा। दिव्यांगों ने सुबह से कतार में लगकर डॉक्टर की राह देखी। दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने के लिए घंटों तक कतार में लगे रहे पर तीन में से एक ही डॉक्टर आए। तमाम दिव्यांग बिना परीक्षण कराए ही लौट गए।
जिला अस्पताल मेें महिला अस्पताल के पीछे अचल प्रशिक्षण केंद्र में विकलांग बोर्ड का दफ्तर है। यहां हर गुरुवार को दिव्यांगों के प्रमाणपत्र जारी होते हैं। इसलिए इस दिन यहां दिव्यांगों की काफी भीड़ लगती है। बोर्ड उन्हीं दिव्यांगों का परीक्षण होता है, जिनका ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन होता है। दिव्यांगों को सुबह दस बजे आने के लिए कहा जाता है। गुरुवार दोपहर बोर्ड के कर्मचारी मेज कुर्सी लेकर धूप में बैठे थे। तभी डॉक्टर के नहीं मिलने से परेशान दिव्यांगों ने कर्मचारियों से पूछताछ शुरू की। उन्हें सही जवाब देने की बजाय कर्मचारी अपनी मेज उठाकर कमरे मेें ले गए। काफी देर तक डॉक्टर नहीं आए तो हल्ला मचने पर कर्मचारियों ने जानकारी दी कि डॉक्टर दो बजे के बाद आएंगे। ऐसा कहकर उन्हें कतार में लगा दिया। डॉक्टर के इंतजार में लाइन में खड़े दिव्यांग परेशान हो गए और इनमें से कई बिना परिक्षण कराए लौट गए। दो बजे के बाद भी हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. केके जौहरी ही आए और हड्डी संबंधी प्रमाणपत्र बनाए। जबकि ईएनटी स्पेशलिस्ट एमए सिद्दीकी और नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. देवेंद्र कुमार तो शाम तक नहीं आए। इससे दिव्यांगों को काफी निराशा हुई। पता लगा कि डॉ. सिद्दीकी ने जिला अस्पताल की ओपीडी में बैठकर ही कुछ लोगों की प्रमाणपत्र संबंधी जांच कर ली। तमाम लोगों को इसकी जानकारी ही नहीं हुई।
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लोकवाणी केंद्र भी कर रहे दिव्यांगों से वसूली
प्रमाणपत्र के लिए दिव्यांगों को पहले ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना पड़ता है। गुरुवार को तमाम दिव्यांगों ने सीएमओ दफ्तर के बाहर बने लोकवाड़ी केंद्रों और इंटरनेट कैफे में ऑनलाइन आवेदन कराया। नियमानुसार बीस रुपये में होने वाला पंजीकरण सौ से डेढ़ सौ रुपये में होता है। उसांवा के पिंटू पुत्र भूपी पैरों से लाचार थे तो उसावां के जमालपुर निवासी रामवीर पुत्र ओमप्रकाश नेत्रहीन। इनके आरोप थे कि गरीबी में इतने पैसे कहां से लाकर ऑनलाइन वाले को दें। अधिकारियों को इस पर ध्यान देना चाहिए।
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पहले से तय किया गया है कि हर गुरुवार को विकलांग बोर्ड से संबंधित डॉक्टरों और स्टाफ को समय से पहुंचें। जिला अस्पताल के डॉक्टर को लेकर अक्सर शिकायत आती है। इस बारे में सीएमएस और संबंधित डॉक्टर को नोटिस जारी किया जाएगा। लोकवाणी केंद्रों पर निर्धारित से ज्यादा रकम ली जा रही है तो इस बारे में डीएम को पत्र लिखकर कार्रवाई का अनुरोध किया जाएगा। - डॉ. नेमीचंद्रा, सीएमओ
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