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सोत नदी के फाटों पर कई असरदार लोगों का कब्जा

Wed, 23 Aug 2017 11:59 PM IST
Updated Wed, 23 Aug 2017 11:59 PM IST
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सोत नदी के फाटों पर कई असरदार लोगों का कब्जा

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अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। शहर के पूरब से होकर बहने वाली सोत नदी के दोनों फाटों पर कई नेताओं और असरदार लोगों ने कब्जा करके अवैध निर्माण कर लिया है। कई बार अवैध कब्जे हटवाने की मांग उठी। प्रशासन ने भी सोत को अतिक्रमण मुक्त कराने में दिलचस्पी दिखाई, लेकिन मुहिम आगेे नहीं बढ़ सकी। इसकी एक वजह यह भी है कि अवैध कब्जा कर व्यावसायिक निर्माण कराने वालो में कई असरदार लोगों के साथ नेता भी शामिल हैं।
सदा नीरा कही जाने वाली सोत नदी के फाटों पर लालपुल के पास अवैध कब्जे कर निर्माण कराने का दौर करीब दो दशक पहले शुरू हुआ था। सत्तारूढ़ पार्टियों से जुड़े लोग कब्जा कर अवैध निर्माण कराते गए। विरोध भी हुआ, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। शहर में सोत नदी के दोनों फाटों पर होटल, मैरिज लॉन और वर्कशॉप बन चुके हैं। जिस सोत नदी की चौड़ाई लालपुल के पास करीब 50 मीटर हुआ करती थी, अब वह घटकर पांच मीटर से भी कम रह गई है। 13 अगस्त 2016 को तत्कालीन डीएम पवन कुमार के आदेश पर सोत नदी की जमीन पर एक नेता के व्यावसायिक निर्माण को रुकवा दिया गया था। इसके बाद लोगों को लगा कि शायद अब सोत नदी अतिक्रमण मुक्त हो जाए, लेकिन मुहिम थमी रह गई। सोत नदी के फाटों की राजस्व विभाग ने कई बार नपत कराई। नेताओं के बीच जब शीत युद्ध हुआ तो प्रशासन ने सितंबर 2015 में एक नेता के अवैध निर्माण को ध्वस्त भी कराया। बाद में यहां फिर से निर्माण कर लिया गया।
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चार महीने में सोत का रिकार्ड नहीं तलाश सका राजस्व विभाग
बदायूं। मुख्यमंत्री बनने के बाद मुख्यमंत्री नेे एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स का गठन किया तो लगा कि अब सोत नदी अतिक्रमण मुक्त होगी। चार महीने पहले जिले में अवैध कब्जे हटाने की मुहिम सोत नदी से ही शुरू की गई। लेकिन रिकार्ड गायब होने की वजह से सोत से अवैध अतिक्रमण हटाया नहीं जा सका। गौर करने वाली बात यह है कि जांच के दौरान सोत नदी के 63 साल पुराने रिकार्ड में भी गड़बड़ियां मिलीं। इसके अलावा सोत नदी के कई रिकार्ड गायब मिले। ऐसे में अब तक सोत नदी को कब्जा मुक्त नहीं कराया जा सका।
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सोत के फाटों पर ज्यादातर व्यावसायिक निर्माण
बदायूं। शहर से सटकर बहने वाली सोत नदी के दोनों फाटों पर आधा दर्जन से ज्यादा अवैध निर्माण हुए हैं। गौर करने वाली बात यह है कि सिंचाई विभाग की इस जमीन पर ज्यादातर निर्माण व्यावसायिक हैं। प्रशासन और राजस्व विभाग अगर सोत नदी को अतिक्रमण मुक्त कराने को लेकर गंभीर होते तो अब तक अवैध निर्माण हटाकर सदानीरा सोत को अतिक्रमण मुक्त कराया जा सकता था।
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जिले में 20 भूमाफिया का सैकड़ों एकड़ जमीनों पर कब्जा
बदायूं। पिछले दिनों सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी से सामने आया था कि प्रशासन ने अब तक जिले में 20 भूमाफियाओं को चिह्नित किया है। इनका सैकड़ों बीघा जमीनों पर कब्जा है। कई ने निर्माण करा लिए हैं। गौर करने वाली बात यह है कि एंटी भू माफिया टास्क फोर्स ने अब तक किसी भी भू माफिया के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई नहीं की है। सरकारी जमीनों को भी कब्जा मुक्त नहीं कराया गया है।

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वर्जन-
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सिंचाई विभाग की जमीनों पर अवैध कब्जों के संबंध में अभी सरकार का कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। अगर आदेश मिलता है तो कार्रवाई की जाएगी। जहां नदियों या नहरों के फाट अवैध कब्जे में हैं उनको हटवाया जाएगा।
-शेर बहादुर सिंह, अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग
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