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योगी आदित्यनाथ ने तोड़ा मिथक
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योगी आदित्यनाथ ने तोड़ा मिथक
बिजनौर। विधानसभा चुनाव के नतीजों से कई मिथक टूटे हैं। चुनाव के दौरान बिजनौर आने वाले मुख्यमंत्री को दोबारा कुर्सी नहीं मिलने का मिथक योगी आदित्यनाथ ने तोड़ा। साथ ही चुनाव में भाजपा के के चार प्रत्याशियों को जीत दिलाने में कामयाब रहे। योगी चुनाव के दौरान जिले में एक नहीं चार बार आए।
सूबे के कई मुख्यमंत्री ने विधानसभा चुनाव के दौरान जिले में आकर जन सभाएं की। इसके बाद वे मुख्यमंत्री विधानसभा चुनाव हार गए तथा सत्ता से हाथ धोना पड़ा। इसके बाद मुख्यमंत्री चुनाव में बिजनौर आने से डरने लगे। क्योंकि यह कहा जाने लगा था कि जो मुख्यमंत्री चुनाव के दौरान बिजनौर आता है उसकी पार्टी चुनाव हार जाती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चुनाव के दौरान एक नहीं चार बार बिजनौर जिले में आए। योगी आदित्यनाथ ने बिजनौर, नजीबाबाद व धामपुर में चुनावी सभा की थी। तभी से लोग बिजनौर में आने वाले मुख्यमंत्री की पार्टी की जीत को लेकर तरह तरह की टीका टिप्पणी करने लगे थे। परंतु विधानसभा के नतीजों से लोगों के कयास निर्मूल साबित हुए हैं। भाजपा ने जिले में प्रत्याशियों की जीत का अपना पुराना रिकॉर्ड बरकरार रखा है। हालांकि इसमें चांदपुर सीट भाजपा के हाथ से फिसल गई। साथ ही सूबे में प्रचंड बहुमत से दोबारा सरकार बनाई है।
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बिजनौर। विधानसभा चुनाव के नतीजों से कई मिथक टूटे हैं। चुनाव के दौरान बिजनौर आने वाले मुख्यमंत्री को दोबारा कुर्सी नहीं मिलने का मिथक योगी आदित्यनाथ ने तोड़ा। साथ ही चुनाव में भाजपा के के चार प्रत्याशियों को जीत दिलाने में कामयाब रहे। योगी चुनाव के दौरान जिले में एक नहीं चार बार आए।
सूबे के कई मुख्यमंत्री ने विधानसभा चुनाव के दौरान जिले में आकर जन सभाएं की। इसके बाद वे मुख्यमंत्री विधानसभा चुनाव हार गए तथा सत्ता से हाथ धोना पड़ा। इसके बाद मुख्यमंत्री चुनाव में बिजनौर आने से डरने लगे। क्योंकि यह कहा जाने लगा था कि जो मुख्यमंत्री चुनाव के दौरान बिजनौर आता है उसकी पार्टी चुनाव हार जाती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चुनाव के दौरान एक नहीं चार बार बिजनौर जिले में आए। योगी आदित्यनाथ ने बिजनौर, नजीबाबाद व धामपुर में चुनावी सभा की थी। तभी से लोग बिजनौर में आने वाले मुख्यमंत्री की पार्टी की जीत को लेकर तरह तरह की टीका टिप्पणी करने लगे थे। परंतु विधानसभा के नतीजों से लोगों के कयास निर्मूल साबित हुए हैं। भाजपा ने जिले में प्रत्याशियों की जीत का अपना पुराना रिकॉर्ड बरकरार रखा है। हालांकि इसमें चांदपुर सीट भाजपा के हाथ से फिसल गई। साथ ही सूबे में प्रचंड बहुमत से दोबारा सरकार बनाई है।
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