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‘महिलाएं खुद अपने दम पर छू रही हैं अासमान’
Thu, 10 Jan 2019 11:57 PM IST
Deepak Sharma
अमर उजाला ब्यूरो/बिजनौर
अमर उजाला ब्यूरो/बिजनौर
Published by: Deepak Sharma
Updated Thu, 10 Jan 2019 11:57 PM IST
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धामपुर में नाटक के माध्यम से संदेश देतीं छात्राएं।
- फोटो : अमर उजाला
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धामपुर में अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से मिशन अपराजिता अभियान के तहत बृहस्पतिवार को गांव जैतरा स्थित मां शांतिबाई सरस्वती विद्या मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की छात्राओं नेे ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ शीर्षक पर नाटक पेश किया। नाटक के माध्यम से संदेश दिया कि जब तक बेटों के समान बेटियों की शिक्षा पर ध्यान नहीं देंगे, तब तक बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का सपना अधूरा ही रहेगा। इस मौके पर बतौर मुख्य अतिथि प्रभारी शिक्षिका रुद्रेश कुमारी ने कहा कि हम सभी को बेटियों की रक्षा और उनके स्वाभिमान की रक्षा के लिए आगे आना चाहिए। इतिहास गवाह है, नारियां हमेेशा अपराजित रही हैं। इस मौके पर छात्राओं को नारी गरिमा को अक्षुण्ण रखने और उनके चेहरे पर आत्मविश्वासी मुस्कान के लिए हर संभव प्रयास कर सतत सक्रिय रहने की वचनबद्धता की शपथ दिलाई।
बृहस्पतिवार को गांव जैतरा स्थित मां शांतिबाई सरस्वती विद्या मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में अपराजिता अभियान के तहत गोष्ठी का आयोजित की गई, जिसमें विद्यालय की सभी शिक्षिकाओं और छात्राओं ने भाग लिया। इस मौके पर छात्राओं ने बेटियों की शिक्षा पर आधारित लघु नाटिका का प्रदर्शन किया और संदेश दिया कि जब तक हम सभी सजग होकर बेटों के समान बेटियों की शिक्षा दीक्षा पर ध्यान नहीं देंगे, तब तक ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का सपना अधूरा ही रहेगा। इस सपने को पूरा करने के लिए हम सभी को बेटियों को बेटों के समान सुख सुविधाएं देने और उन्हें शिक्षित करने में कंजूसी नहीं करनी चाहिए। विद्यालय का प्रभारी शिक्षिका रूद्रेश कुमारी ने छात्राओं को नारी गरिमा को अक्षुण्ण रखने और उनके चेहरे पर आत्मविश्वासी मुस्कान के लिए हर संभव प्रयास कर सतत सक्रिय रहने की वचनवद्धता की शपथ दिलाई। केंद्र सरकार की ओर से महिलाओं को प्रोत्साहित करने को काफी प्रयास किया जा रहा है। महिलाएं अपने दम पर विश्व में ऊंचाइयों को छू रही हैं। उन्होंने समाज के लोगों से भ्रूण में पल रही कन्या को जन्म से पहले हत्या करने के स्थान पर संरक्षण देकर देश का होनहार बनाने की दिशा में आगे बढ़ने को प्रेरित किया।
कभी हार स्वीकार नहीं की
प्रभारी शिक्षिका रूद्रेश कुमारी ने कहा कि अंग्रेजी शासन में भी रानीलक्ष्मी बाई ने हार स्वीकार नहीं की। महिलाओं ने देश मेें ही नहीं, बल्कि विश्व में नए मुकाम हासिल कर कीर्तिमान स्थापित किए हैं। आगे भी इसी प्रकार से करती रहेगी।
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घर की लक्ष्मी है नारी
शिक्षिका राजकुमारी ने कहा कि नारी हर क्षेत्र में अग्रणी है। नारी ने हर जगह अपनी पहचान बनाई है। सबको नारियों का सम्मान करना चाहिए। नारी घर की लक्ष्मी होती है। शास्त्रों में कहा गया है कि जहां नारियों की पूजा होती है। वहां देवताओं का वास होता है।
नारी का सम्मान करें और बच्चों में भी दें
शिक्षिका प्रतिष्ठा शर्मा का कहना है कि जिस समाज में नारियों का सम्मान हुआ है। उसी समाज की तरक्की हुई है। वह समाज अन्यों से मजबूूत रहा है। अपराजिता का मतलब है, जिसे कभी हराया न जा सके। हम सबको नारी का सम्मान करना चाहिए और बच्चों में इस प्रकार के संस्कार देने चाहिए।
पहले स्वयं बदलें, तभी सोच बदलेगी
शिक्षिका श्वेता रानी ने समाज से अपेक्षा की है कि वे हमेशा नारी का सम्मान करें। उन्हें महत्व दें। सभी को नारी सम्मान की शुरूआत अपने घर, परिवार से करनी चाहिए। सबसे पहले हमें स्वयं में बदलाव लाना पड़ेगा। तभी हम समाज की सोच को बदल सकते हैं।
बगैर नारी के पूजा भी अधूरी
शिक्षिका शीतल अग्रवाल का कहना है कि नारी शब्द अपने में पूर्ण है। आज का युग हो या पुरातन। नारी का स्थान सभी स्थानों पर आगे है। पर्व, त्योहार व अन्य कार्यक्रमों में सर्वप्रथम सदा ही महिलाएं आगे हैं। नारियों में सभी देवियों का वास होता है। नारी को नौ स्वरूपों में पूजा जाता है।
सराहनीय प्रयास है
विद्यालय का छात्रा अजीमा परवीन ने अमर उजाला के इस कार्यक्रम की सराहना की। कहा कि इस कार्यक्रम के आयोजन से उन्हें बहुत प्रेरणा मिली है। इससे महिलाओं को और देश के विकास में बहुत कुछ करने को ऊर्जा मिली है। उन्होंने इस प्रयास के लिए अमर उजाला को धन्यवाद ज्ञापित किया है।
भविष्य में भी आयोजित करने का सुझाव
छात्रा ऋचा चौहान ने अमर उजाला के प्रयास की सराहना कर आगे भी ऐसे कार्यक्रम को अभियान के रूप में आयोजित करने का सुझाव दिया। ऐसे कार्यक्रमों से देेश की खातिर और कुछ बेहतर करने का साहस मिला है।
ऐसे कार्यक्रम हैं अतिमहत्वपूर्ण
छबि रानी का कहना है कि इस कार्यक्रम के आयोजन से महिलाओं को उनके दायित्वों के बोध होता है। नई ऊर्जा और प्रेरणा मिलती है। ऐसे कार्यक्रम नारी जगत के लिए अतिमहत्वपूर्ण है।
महिलाओं को मिलती है ताकत
छात्रा चारू राजपूत ने कार्यक्रम को सराहा। कहा कि इस कार्यक्रम के आयोजन से महिलाअंों को अपनी ताकत और हौसलों के बारे में प्रेरणा मिली है। आगे भी ऐसे कार्यक्रमों को आयोजित करने का सुझाव दिया।
अब कुछ नया करने का प्रयास होगा
छात्रा दीप्ति चौहान का कहना है कि अमर उजाला ने अपराजिता शीर्षक पर कार्यक्रम का आयोजन कर महिलाओं को और नया मुकाम हासिल करने को प्रेरित किया है। नारी गरिमा को बनाए रख और कुछ नया करने का प्रयास होगा, जिससे महिलाओं के नाम का विश्व में और डंका बजे।
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बृहस्पतिवार को गांव जैतरा स्थित मां शांतिबाई सरस्वती विद्या मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में अपराजिता अभियान के तहत गोष्ठी का आयोजित की गई, जिसमें विद्यालय की सभी शिक्षिकाओं और छात्राओं ने भाग लिया। इस मौके पर छात्राओं ने बेटियों की शिक्षा पर आधारित लघु नाटिका का प्रदर्शन किया और संदेश दिया कि जब तक हम सभी सजग होकर बेटों के समान बेटियों की शिक्षा दीक्षा पर ध्यान नहीं देंगे, तब तक ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का सपना अधूरा ही रहेगा। इस सपने को पूरा करने के लिए हम सभी को बेटियों को बेटों के समान सुख सुविधाएं देने और उन्हें शिक्षित करने में कंजूसी नहीं करनी चाहिए। विद्यालय का प्रभारी शिक्षिका रूद्रेश कुमारी ने छात्राओं को नारी गरिमा को अक्षुण्ण रखने और उनके चेहरे पर आत्मविश्वासी मुस्कान के लिए हर संभव प्रयास कर सतत सक्रिय रहने की वचनवद्धता की शपथ दिलाई। केंद्र सरकार की ओर से महिलाओं को प्रोत्साहित करने को काफी प्रयास किया जा रहा है। महिलाएं अपने दम पर विश्व में ऊंचाइयों को छू रही हैं। उन्होंने समाज के लोगों से भ्रूण में पल रही कन्या को जन्म से पहले हत्या करने के स्थान पर संरक्षण देकर देश का होनहार बनाने की दिशा में आगे बढ़ने को प्रेरित किया।
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कभी हार स्वीकार नहीं की
प्रभारी शिक्षिका रूद्रेश कुमारी ने कहा कि अंग्रेजी शासन में भी रानीलक्ष्मी बाई ने हार स्वीकार नहीं की। महिलाओं ने देश मेें ही नहीं, बल्कि विश्व में नए मुकाम हासिल कर कीर्तिमान स्थापित किए हैं। आगे भी इसी प्रकार से करती रहेगी।
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घर की लक्ष्मी है नारी
शिक्षिका राजकुमारी ने कहा कि नारी हर क्षेत्र में अग्रणी है। नारी ने हर जगह अपनी पहचान बनाई है। सबको नारियों का सम्मान करना चाहिए। नारी घर की लक्ष्मी होती है। शास्त्रों में कहा गया है कि जहां नारियों की पूजा होती है। वहां देवताओं का वास होता है।
नारी का सम्मान करें और बच्चों में भी दें
शिक्षिका प्रतिष्ठा शर्मा का कहना है कि जिस समाज में नारियों का सम्मान हुआ है। उसी समाज की तरक्की हुई है। वह समाज अन्यों से मजबूूत रहा है। अपराजिता का मतलब है, जिसे कभी हराया न जा सके। हम सबको नारी का सम्मान करना चाहिए और बच्चों में इस प्रकार के संस्कार देने चाहिए।
पहले स्वयं बदलें, तभी सोच बदलेगी
शिक्षिका श्वेता रानी ने समाज से अपेक्षा की है कि वे हमेशा नारी का सम्मान करें। उन्हें महत्व दें। सभी को नारी सम्मान की शुरूआत अपने घर, परिवार से करनी चाहिए। सबसे पहले हमें स्वयं में बदलाव लाना पड़ेगा। तभी हम समाज की सोच को बदल सकते हैं।
बगैर नारी के पूजा भी अधूरी
शिक्षिका शीतल अग्रवाल का कहना है कि नारी शब्द अपने में पूर्ण है। आज का युग हो या पुरातन। नारी का स्थान सभी स्थानों पर आगे है। पर्व, त्योहार व अन्य कार्यक्रमों में सर्वप्रथम सदा ही महिलाएं आगे हैं। नारियों में सभी देवियों का वास होता है। नारी को नौ स्वरूपों में पूजा जाता है।
सराहनीय प्रयास है
विद्यालय का छात्रा अजीमा परवीन ने अमर उजाला के इस कार्यक्रम की सराहना की। कहा कि इस कार्यक्रम के आयोजन से उन्हें बहुत प्रेरणा मिली है। इससे महिलाओं को और देश के विकास में बहुत कुछ करने को ऊर्जा मिली है। उन्होंने इस प्रयास के लिए अमर उजाला को धन्यवाद ज्ञापित किया है।
भविष्य में भी आयोजित करने का सुझाव
छात्रा ऋचा चौहान ने अमर उजाला के प्रयास की सराहना कर आगे भी ऐसे कार्यक्रम को अभियान के रूप में आयोजित करने का सुझाव दिया। ऐसे कार्यक्रमों से देेश की खातिर और कुछ बेहतर करने का साहस मिला है।
ऐसे कार्यक्रम हैं अतिमहत्वपूर्ण
छबि रानी का कहना है कि इस कार्यक्रम के आयोजन से महिलाओं को उनके दायित्वों के बोध होता है। नई ऊर्जा और प्रेरणा मिलती है। ऐसे कार्यक्रम नारी जगत के लिए अतिमहत्वपूर्ण है।
महिलाओं को मिलती है ताकत
छात्रा चारू राजपूत ने कार्यक्रम को सराहा। कहा कि इस कार्यक्रम के आयोजन से महिलाअंों को अपनी ताकत और हौसलों के बारे में प्रेरणा मिली है। आगे भी ऐसे कार्यक्रमों को आयोजित करने का सुझाव दिया।
अब कुछ नया करने का प्रयास होगा
छात्रा दीप्ति चौहान का कहना है कि अमर उजाला ने अपराजिता शीर्षक पर कार्यक्रम का आयोजन कर महिलाओं को और नया मुकाम हासिल करने को प्रेरित किया है। नारी गरिमा को बनाए रख और कुछ नया करने का प्रयास होगा, जिससे महिलाओं के नाम का विश्व में और डंका बजे।