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गोवर्धन पूजा कर की खुशहाली व समृद्धि की कामना
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जिनौर में ग्राम नंगली में दिन में गोवर्धन पूजा करते श्रृद्धालु।
- फोटो : BIJNOR
गोवर्धन पूजा कर की खुशहाली और समृद्धि की कामना
बिजनौर। दीपावली से एक दिन बाद बुधवार को जनपद में गोवर्धन पूजा परंपरागत विधि विधान से की गई। गोवर्धन पूजा कर सभी ने खुशहाली व समृद्धि की कामना की। सूर्यग्रहण के कारण गोवर्धन पूजा दीपावली से एक दिन बाद की गई और दोपहर साढ़े तीन बजे तक शुभ मुहूर्त होने के कारण सभी ने जल्द पूजा-अर्चना की।
गोवर्धन पूजा घर व पशु आदि के लिए खुशहाली एवं समृद्धि का प्रतीक है। ग्रामीण अंचल में गोवर्धन की पूजा-अर्चना का ज्यादा महत्व है। किसान, पशुपालकों के यहां इस दिन गोवबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाई जाती है। उसमें किसानों के पशुओं की भी आकृति बनाई जाती है। पूजन के समय किसानों ने छोटे कृषि यंत्र आदि भी रखे और अपने पूरे परिवार के साथ अन्नकूट और गोवर्धन की विधि विधान के साथ पूजा की।
मान्यता है कि इसका शुभारंभ भगवान श्रीकृष्ण ने किया था। इस दिन प्रकृति के आधार के रूप में गोवर्धन पर्वत की पूजा-अर्चना होती है। कुछ लोग इस दिन गाय की पूजा कर उन्हें चारा खिलाया।
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बिजनौर। दीपावली से एक दिन बाद बुधवार को जनपद में गोवर्धन पूजा परंपरागत विधि विधान से की गई। गोवर्धन पूजा कर सभी ने खुशहाली व समृद्धि की कामना की। सूर्यग्रहण के कारण गोवर्धन पूजा दीपावली से एक दिन बाद की गई और दोपहर साढ़े तीन बजे तक शुभ मुहूर्त होने के कारण सभी ने जल्द पूजा-अर्चना की।
गोवर्धन पूजा घर व पशु आदि के लिए खुशहाली एवं समृद्धि का प्रतीक है। ग्रामीण अंचल में गोवर्धन की पूजा-अर्चना का ज्यादा महत्व है। किसान, पशुपालकों के यहां इस दिन गोवबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाई जाती है। उसमें किसानों के पशुओं की भी आकृति बनाई जाती है। पूजन के समय किसानों ने छोटे कृषि यंत्र आदि भी रखे और अपने पूरे परिवार के साथ अन्नकूट और गोवर्धन की विधि विधान के साथ पूजा की।
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मान्यता है कि इसका शुभारंभ भगवान श्रीकृष्ण ने किया था। इस दिन प्रकृति के आधार के रूप में गोवर्धन पर्वत की पूजा-अर्चना होती है। कुछ लोग इस दिन गाय की पूजा कर उन्हें चारा खिलाया।

बिजनौर के ग्राम सालमाबाद में गोवर्धन पूजा करते श्रृद्धालु।- फोटो : BIJNOR

नगीना में में गोवर्धन पूजा करते ग्रामीण।- फोटो : BIJNOR
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