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Bijnor News: एनओसी के फेर में अटका बिजनौर रावली मार्ग का चौड़ीकरण
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खस्ताहाल हुई बिजनौर-रावली रोड़।
- हस्तिनापुर वन्य जीव अभ्यारण्य होने की वजह से वन विभाग ने जता दी थी आपत्ति
- महीनों से थमा हुआ है चौड़ीकरण का काम
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। बिजनौर-रावली मार्ग का चौड़ीकरण अधर में लटका हुआ है। निर्माण चालू तो हुआ था, मगर वन विभाग की आपत्ति ने विराम लगा दिया। अब महीनों से सड़क का निर्माण बंद है। इसके लिए भारत सरकार से एनओसी मिलने का इंतजार किया जा रहा है। एनओसी की प्रक्रिया लखनऊ स्तर पर चल रही है।
गंगा और मालन के संगम पर रावली में कण्व ऋषि का आश्रम है। प्रशासन ने इस जगह के सुंदरीकरण और अन्य विकास योजनाओं के लिए परियोजना तैयार की थी। इसी क्रम में इस पर्यटन स्थल तक बेहतर सड़क मुहैया कराना भी शामिल रहा। रावली तक जाने वाली सड़क के चौड़ीकरण के प्रस्ताव को पिछले साल ही मंजूरी मिल गई थी। सड़क के चौड़ीकरण पर 18 करोड़ रुपये की लागत आनी है।
बता दें कि यह सड़क तीन मीटर चौड़ी है। जगह जगह मार्ग में गड्ढे भी बने हुए हैं। अब साढ़े आठ किलोमीटर लंबी इस सड़क की चौड़ाई बढ़ाते हुए सात मीटर करने के लिए निर्माण चालू कर दिया गया था। सड़क के दोनों ओर पत्थर डालने के लिए कुछ जगहों पर काम हुआ तो वन विभाग ने आपत्ति जता दी। क्योंकि बिजनौर से रावली तक जाने वाली सड़क हस्तिनापुर वन्य जीव अभ्यारण्य क्षेत्र में आती है। ऐसे में सड़क के चौड़ीकरण का काम रुकवा दिया गया था। बात नहीं बनने पर लोक निर्माण विभाग की ओर से एनओसी लेने की प्रक्रिया को शुरू किया गया। अब एनओसी मिलने का इंतजार है। एनओसी मिलने के बाद ही सड़क का चौड़ीकरण हो सकेगा।
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बैराज बनने से कम हुई इस सड़क की उपयोगिता
बिजनौर-रावली रोड कभी पानीपत-खटीमा मार्ग का हिस्सा हुआ करती थी। इसी मार्ग से मुजफ्फरनगर और बिजनौर के बीच आवाजाही होती थी। बताते हैं कि गंगा नदी पर लकड़ी का पुल बना होता था। इससे बस भी निकल जाया करती थी। बिजनौर बैराज बनने के बाद रावली रोड उपेक्षित हो गई।
फिलहाल बिजनौर से रावली तक मार्ग के चौड़ीकरण का काम बंद है। भारत सरकार से एनओसी मिलने के बाद काम चालू कर दिया जाएगा। इस मार्ग के चौड़ीकरण पर 18 करोड़ रुपये की लागत आएगी। - एसके राव, अधिशासी अभियंता लोनिवि
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- महीनों से थमा हुआ है चौड़ीकरण का काम
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। बिजनौर-रावली मार्ग का चौड़ीकरण अधर में लटका हुआ है। निर्माण चालू तो हुआ था, मगर वन विभाग की आपत्ति ने विराम लगा दिया। अब महीनों से सड़क का निर्माण बंद है। इसके लिए भारत सरकार से एनओसी मिलने का इंतजार किया जा रहा है। एनओसी की प्रक्रिया लखनऊ स्तर पर चल रही है।
गंगा और मालन के संगम पर रावली में कण्व ऋषि का आश्रम है। प्रशासन ने इस जगह के सुंदरीकरण और अन्य विकास योजनाओं के लिए परियोजना तैयार की थी। इसी क्रम में इस पर्यटन स्थल तक बेहतर सड़क मुहैया कराना भी शामिल रहा। रावली तक जाने वाली सड़क के चौड़ीकरण के प्रस्ताव को पिछले साल ही मंजूरी मिल गई थी। सड़क के चौड़ीकरण पर 18 करोड़ रुपये की लागत आनी है।
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बता दें कि यह सड़क तीन मीटर चौड़ी है। जगह जगह मार्ग में गड्ढे भी बने हुए हैं। अब साढ़े आठ किलोमीटर लंबी इस सड़क की चौड़ाई बढ़ाते हुए सात मीटर करने के लिए निर्माण चालू कर दिया गया था। सड़क के दोनों ओर पत्थर डालने के लिए कुछ जगहों पर काम हुआ तो वन विभाग ने आपत्ति जता दी। क्योंकि बिजनौर से रावली तक जाने वाली सड़क हस्तिनापुर वन्य जीव अभ्यारण्य क्षेत्र में आती है। ऐसे में सड़क के चौड़ीकरण का काम रुकवा दिया गया था। बात नहीं बनने पर लोक निर्माण विभाग की ओर से एनओसी लेने की प्रक्रिया को शुरू किया गया। अब एनओसी मिलने का इंतजार है। एनओसी मिलने के बाद ही सड़क का चौड़ीकरण हो सकेगा।
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बैराज बनने से कम हुई इस सड़क की उपयोगिता
बिजनौर-रावली रोड कभी पानीपत-खटीमा मार्ग का हिस्सा हुआ करती थी। इसी मार्ग से मुजफ्फरनगर और बिजनौर के बीच आवाजाही होती थी। बताते हैं कि गंगा नदी पर लकड़ी का पुल बना होता था। इससे बस भी निकल जाया करती थी। बिजनौर बैराज बनने के बाद रावली रोड उपेक्षित हो गई।
फिलहाल बिजनौर से रावली तक मार्ग के चौड़ीकरण का काम बंद है। भारत सरकार से एनओसी मिलने के बाद काम चालू कर दिया जाएगा। इस मार्ग के चौड़ीकरण पर 18 करोड़ रुपये की लागत आएगी। - एसके राव, अधिशासी अभियंता लोनिवि