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जहां बहती थी गंगा की धारा, वहां डाला जा रहा गंदा नाला
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बिजनौर में विदुर कुटी पर गंगा में जाता गंदे पानी का नाला।
- फोटो : BIJNOR
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जहां बहती थी गंगा की धारा, वहां डाला जा रहा गंदा नाला
गंज दारानगर (बिजनौर)। गंगा किनारे भगवान श्रीकृष्ण को बथुए का भोग लगाने वाली महात्मा विदुर की तपोभूमि विदुर कुटी बदहाली पर आंसू बहा रही है। हाल यह है कि देश के प्रमुख स्थानों में शामिल विदुर कुटी के पास जहां कभी पहले गंगा की धारा बहती थी वहां पर गांव का गंदा नाला डाला जा रहा है। विकास के नाम पर किए गए कार्य बदहाल हो चुुके हैं। केवल कागजों में ही यहां का विकास किया गया। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर भी यहां की सुध लेने वाला कोई नहीं है।
जिला बिजनौर महात्मा विदुर की तपोभूमि है। वह हस्तिनापुर के महामंत्री थे। विदुर कुटी से दूसरी ओर गंगा पार हस्तिनापुर है। कौरव और पांडवों के बीच कलह से परेशान होकर वह हस्तिनापुर से गंगा पार करके गंज दारानगर के पास आ गए थे। यहां गंगा किनारे आश्रम बनाकर रहे। महाभारत युद्ध से पूर्व जब संधि प्रस्ताव लेकर भगवान श्रीकृष्ण हस्तिनापुर आए तो उन्होंने दुर्योधन के यहां भोजन करने से मना कर दिया था। तब उन्होंने महत्मा विदुर के आश्रम में पहुंचकर बथुए का साग खाया था। यहां पूरे वर्ष बथुआ उगता है। विदुर कुटी को पर्यटन स्थल में शामिल करने के लिए सपा सरकार में इसे महाभारत सर्किट में शामिल किया गया। 2007 में बसपा सरकार में इसका सुंदरीकरण हुआ। 85 लाख की लागत से यहां बिजनौर चांदपुर मार्ग के तिराहे पर गेट बना। कैंटीन, शौचालय काम्पलैक्स बना। विदुरकुटी पर लाइट लगी। सरकारी काम था तो ठेके जनप्रतिनिधि अपने चहेतों को दिला रह थे। तो खाना पूरी ही हुई। 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान के तहत यहां सफाई हुई। ग्राम सभा की ओर से बैंच आदि लगीं। देखरेख के अभाव में यहां चारों ओर बदहाली ही बदहाली है। गंगा की धारा यहां से कई किलोमीटर दूर चली गई, लेकिन इसे यहां लाने के प्रयास नहीं हुए। जहां गंगा की धारा बहती थी वहां पर गांव का गंदा नाला डाला जा रहा है। कई बार मांग उठी पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। कभी यहां कार्तिक पूर्णिमा पर मेला लगता था। लाखों श्रद्धालु आते थे। गंगा यहां से क्या गई कि यहां कि रौनक चली गई।
गंगा ही है विदुर कुटी की आत्मा
विदुर सेवा आश्रम ट्रस्ट के अध्यक्ष अरविंद शास्त्री का कहना है कि विदुर कुटी पर जनता से जोड़ने के लिए जरूरी है कि यहां 12 माह गंगा रहे। दूसरे यहां विकास कराने के साथ जरूरी है कि उसकी देख रेख की व्यवस्था हो। विदुर मंदिर के पुजारी राजू पंडित का कहना है कि इस स्थल के विकास के लिए यहां घाट पर गंगा का आना जरूरी है। जिला पंचायत राज अधिकारी सतीश कुमार का कहना है कि उन्हें विदुर कुटी के सामने गांव का गंदा पानी डाले जाने की जानकारी नहीं है। वे मामले को दिखवाएंगे।
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शासन तक पहुंचाया जाएगा मामला
गंगा विचार मंच के जिला संयोजक सौरभ सिंघल का कहना है कि वे इस मामले को शासन, प्रशासन के सामने उठाएंगे। यह श्रद्धा का विषय है। मंदिर के सामने गांव वालों को भी गंदा पानी नहीं बहाना चाहिए। ग्राम प्रधान वीरेंद्र शर्मा का कहना है कि पहले गांव का पानी मंदिर की ओर ही जाता था। उन्होंने पानी को गांव की ओर कटवाया है। वहीं, एडीओ पंचायत सुरेंद्र कुमार का कहना है कि मंदिर के पास गंदा पानी नहीं है। अगर कहीं ऐसा है तो समस्या का समाधान कराया जाएगा।
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गंज दारानगर (बिजनौर)। गंगा किनारे भगवान श्रीकृष्ण को बथुए का भोग लगाने वाली महात्मा विदुर की तपोभूमि विदुर कुटी बदहाली पर आंसू बहा रही है। हाल यह है कि देश के प्रमुख स्थानों में शामिल विदुर कुटी के पास जहां कभी पहले गंगा की धारा बहती थी वहां पर गांव का गंदा नाला डाला जा रहा है। विकास के नाम पर किए गए कार्य बदहाल हो चुुके हैं। केवल कागजों में ही यहां का विकास किया गया। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर भी यहां की सुध लेने वाला कोई नहीं है।
जिला बिजनौर महात्मा विदुर की तपोभूमि है। वह हस्तिनापुर के महामंत्री थे। विदुर कुटी से दूसरी ओर गंगा पार हस्तिनापुर है। कौरव और पांडवों के बीच कलह से परेशान होकर वह हस्तिनापुर से गंगा पार करके गंज दारानगर के पास आ गए थे। यहां गंगा किनारे आश्रम बनाकर रहे। महाभारत युद्ध से पूर्व जब संधि प्रस्ताव लेकर भगवान श्रीकृष्ण हस्तिनापुर आए तो उन्होंने दुर्योधन के यहां भोजन करने से मना कर दिया था। तब उन्होंने महत्मा विदुर के आश्रम में पहुंचकर बथुए का साग खाया था। यहां पूरे वर्ष बथुआ उगता है। विदुर कुटी को पर्यटन स्थल में शामिल करने के लिए सपा सरकार में इसे महाभारत सर्किट में शामिल किया गया। 2007 में बसपा सरकार में इसका सुंदरीकरण हुआ। 85 लाख की लागत से यहां बिजनौर चांदपुर मार्ग के तिराहे पर गेट बना। कैंटीन, शौचालय काम्पलैक्स बना। विदुरकुटी पर लाइट लगी। सरकारी काम था तो ठेके जनप्रतिनिधि अपने चहेतों को दिला रह थे। तो खाना पूरी ही हुई। 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान के तहत यहां सफाई हुई। ग्राम सभा की ओर से बैंच आदि लगीं। देखरेख के अभाव में यहां चारों ओर बदहाली ही बदहाली है। गंगा की धारा यहां से कई किलोमीटर दूर चली गई, लेकिन इसे यहां लाने के प्रयास नहीं हुए। जहां गंगा की धारा बहती थी वहां पर गांव का गंदा नाला डाला जा रहा है। कई बार मांग उठी पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। कभी यहां कार्तिक पूर्णिमा पर मेला लगता था। लाखों श्रद्धालु आते थे। गंगा यहां से क्या गई कि यहां कि रौनक चली गई।
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गंगा ही है विदुर कुटी की आत्मा
विदुर सेवा आश्रम ट्रस्ट के अध्यक्ष अरविंद शास्त्री का कहना है कि विदुर कुटी पर जनता से जोड़ने के लिए जरूरी है कि यहां 12 माह गंगा रहे। दूसरे यहां विकास कराने के साथ जरूरी है कि उसकी देख रेख की व्यवस्था हो। विदुर मंदिर के पुजारी राजू पंडित का कहना है कि इस स्थल के विकास के लिए यहां घाट पर गंगा का आना जरूरी है। जिला पंचायत राज अधिकारी सतीश कुमार का कहना है कि उन्हें विदुर कुटी के सामने गांव का गंदा पानी डाले जाने की जानकारी नहीं है। वे मामले को दिखवाएंगे।
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शासन तक पहुंचाया जाएगा मामला
गंगा विचार मंच के जिला संयोजक सौरभ सिंघल का कहना है कि वे इस मामले को शासन, प्रशासन के सामने उठाएंगे। यह श्रद्धा का विषय है। मंदिर के सामने गांव वालों को भी गंदा पानी नहीं बहाना चाहिए। ग्राम प्रधान वीरेंद्र शर्मा का कहना है कि पहले गांव का पानी मंदिर की ओर ही जाता था। उन्होंने पानी को गांव की ओर कटवाया है। वहीं, एडीओ पंचायत सुरेंद्र कुमार का कहना है कि मंदिर के पास गंदा पानी नहीं है। अगर कहीं ऐसा है तो समस्या का समाधान कराया जाएगा।

बिजनौर में विदुर कुटी पर खस्ता हाल में कैंटीन।- फोटो : BIJNOR

बिजनौर में विदुर कुटी पर बिजली के टूटे फैंसी लाइट।- फोटो : BIJNOR

बिजनौर में विदुर कुटी पर पार्क से गायब हुई रेलिंग और टूटी पड़ी बेंच।- फोटो : BIJNOR