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गुलशन-ए-हिंद को लहू से सींचा है हमने...
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गुलशन-ए-हिंद को लहू से सींचा है हमने...
नूरपुर। रविवार रात खालसा इंटर कॉलेज के मैदान में ऑल इंडिया मुशायरा व कवि सम्मेलन आयोजित हुआ। कार्यक्रम में शायरों ने अपने कलामों से श्रोताओं को पूरी रात बांधे रखा।
मुशायरे का आगाज वसीम खान व फजलुर्रहमान ने शमा रोशन कर किया। कार्यक्रम का शुभारंभ नात-ए-पाक से हुआ। शायरों ने एक से बढ़कर एक कलाम पेश किए। मौसम गोपालपुरी ने फरमाया कि ‘गुलशन-ए-हिंद को सींचा है लहू से हमने, बीज नफरत के किसी को बोने नहीं देंगे, जिस्म के टुकड़े कितने ही हो जाएं हमारे, वतन के टुकड़े हम होने नहीं देंगे’। असरारुल हक ने कहा कि हाथ मिल जाते हैं, लेकिन दिल नहीं मिलते, कभी एक जगह दरिया और साहिल नहीं मिलते। सरिता जैन ने सुनाया ‘मैं थक जाती हूं बातें करती-करती, तेरी तस्वीर कितना बोलती है’। सरदार गुरुचरण ने कहा कि ‘जान दे दी शहीदों ने किस शान से सर झुका है उन्हीं के नमन के लिए, मेरे खिलते चमन, महकते वतन हम जिएंगे मरेंगे वतन के लिए’। फैयाज फैजी ने कहा कि ‘बनकर आऊंगा किसी रोज सियासी लीडर, आग बस्ती में लगाऊंगा और चला जाऊंगा। निखत मुरादाबादी ने कहा ‘तेरे जाने से सांस थमने लगी, जिंदगी आज बन गई सजा’। बिलाल सहारनपुरी ने फरमाया कि ‘जो ताल्लुक है फूल का खुशबू के साथ, वही रिश्ता है मुसलमां का हिंदू के साथ’। मुशायरे की सदारत हाजी उस्मान अंसारी व निजामत मोईन शादाब ने की। हाजी जियाउद्दीन अंसारी, राजेंद्र सिंह, इलियास, महमूद मिकरानी, रिजवान अंसारी, इसरार नबी, नईम अहमद, मुजाहिद फारुकी आदि मौजूद रहे।
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नूरपुर। रविवार रात खालसा इंटर कॉलेज के मैदान में ऑल इंडिया मुशायरा व कवि सम्मेलन आयोजित हुआ। कार्यक्रम में शायरों ने अपने कलामों से श्रोताओं को पूरी रात बांधे रखा।
मुशायरे का आगाज वसीम खान व फजलुर्रहमान ने शमा रोशन कर किया। कार्यक्रम का शुभारंभ नात-ए-पाक से हुआ। शायरों ने एक से बढ़कर एक कलाम पेश किए। मौसम गोपालपुरी ने फरमाया कि ‘गुलशन-ए-हिंद को सींचा है लहू से हमने, बीज नफरत के किसी को बोने नहीं देंगे, जिस्म के टुकड़े कितने ही हो जाएं हमारे, वतन के टुकड़े हम होने नहीं देंगे’। असरारुल हक ने कहा कि हाथ मिल जाते हैं, लेकिन दिल नहीं मिलते, कभी एक जगह दरिया और साहिल नहीं मिलते। सरिता जैन ने सुनाया ‘मैं थक जाती हूं बातें करती-करती, तेरी तस्वीर कितना बोलती है’। सरदार गुरुचरण ने कहा कि ‘जान दे दी शहीदों ने किस शान से सर झुका है उन्हीं के नमन के लिए, मेरे खिलते चमन, महकते वतन हम जिएंगे मरेंगे वतन के लिए’। फैयाज फैजी ने कहा कि ‘बनकर आऊंगा किसी रोज सियासी लीडर, आग बस्ती में लगाऊंगा और चला जाऊंगा। निखत मुरादाबादी ने कहा ‘तेरे जाने से सांस थमने लगी, जिंदगी आज बन गई सजा’। बिलाल सहारनपुरी ने फरमाया कि ‘जो ताल्लुक है फूल का खुशबू के साथ, वही रिश्ता है मुसलमां का हिंदू के साथ’। मुशायरे की सदारत हाजी उस्मान अंसारी व निजामत मोईन शादाब ने की। हाजी जियाउद्दीन अंसारी, राजेंद्र सिंह, इलियास, महमूद मिकरानी, रिजवान अंसारी, इसरार नबी, नईम अहमद, मुजाहिद फारुकी आदि मौजूद रहे।
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