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तीसरी लहर से लड़ने की तैयारी पर फिर सकता है पानी
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तीसरी लहर से लड़ने की तैयारी पर फिर सकता है पानी
बिजनौर। कोरोना से लड़ाई की तैयारियों के बीच एक बार फिर से जिला अस्पताल में स्टाफ की कमी का ग्रहण लग सकता है। जिला अस्पताल में अस्थायी तौर पर रखी गईं 12 नर्स का सेवाकाल दिसंबर में ही समाप्त हो रहा है। इन्हें कोरोना की दूसरी लहर के समय नियुक्त किया गया था। अब इन नर्स की जगह किनकी ड्यटी लगाई जाएगी, यह भी स्पष्ट नहीं है।
जिला अस्पताल में जिले का एकमात्र कोविड एल-टू वार्ड बनाया गया है। 70 ऑक्सीजनयुक्त बेड रखे गए हैं। पहली बार बच्चों के लिए भी पीकू वार्ड बनाया गया है। कोरोना की दूसरी लहर में भी अस्पताल में तैयारियां की गई थीं, लेकिन तब स्टाफ की किल्लत आड़े आ गई थी। जिला अस्पताल में वेंटिलेटर को चलाने के लिए स्टाफ तक नहीं था। बाद में स्टाफ तैनात कर उन्हें वेंटिलेटर चलाने का प्रशिक्षण दिया गया। अब कोरोना की संभावित लहर से लड़ने की तैयारी की जा रही है, लेकिन स्टाफ की कमी फिर से इन तैयारियों के आड़े आती हुई दिख रही है। कोरोना की दूसरी लहर के समय जिला अस्पताल में 12 नर्सें रखी गई थीं। इन नर्स को वेंटिलेटर चलाने का भी प्रशिक्षण दिया जा चुका है। अब इनका सेवाकाल दिसंबर में समाप्त हो रहा है। विभाग इन नर्स में से छह को सामान्य मरीजों और छह को कोविड एल-टू वार्ड में शिफ्ट करने की योजना बना रहा था। ऐसे में फिर से स्टाफ की कमी जिला अस्पताल प्रशासन के लिए परेशानी का सबब बन सकती है। जिला अस्पताल में पहले से ही चिकित्सकों व अन्य स्टाफ का टोटा है।
नहीं मांगा गया प्रस्ताव
एनएचएम प्रभारी डॉ.पीके गुप्ता के अनुसार जिला अस्पताल में रखीं गईं स्टाफ नर्स की सेवाकाल बढ़ाने के लिए शासन से प्रस्ताव अभी नहीं मांगा गया है। प्रस्ताव मांगने पर स्टाफ नर्स की सेवा अवधि बढ़ाने की कार्यवाही की जाएगी।
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बिजनौर। कोरोना से लड़ाई की तैयारियों के बीच एक बार फिर से जिला अस्पताल में स्टाफ की कमी का ग्रहण लग सकता है। जिला अस्पताल में अस्थायी तौर पर रखी गईं 12 नर्स का सेवाकाल दिसंबर में ही समाप्त हो रहा है। इन्हें कोरोना की दूसरी लहर के समय नियुक्त किया गया था। अब इन नर्स की जगह किनकी ड्यटी लगाई जाएगी, यह भी स्पष्ट नहीं है।
जिला अस्पताल में जिले का एकमात्र कोविड एल-टू वार्ड बनाया गया है। 70 ऑक्सीजनयुक्त बेड रखे गए हैं। पहली बार बच्चों के लिए भी पीकू वार्ड बनाया गया है। कोरोना की दूसरी लहर में भी अस्पताल में तैयारियां की गई थीं, लेकिन तब स्टाफ की किल्लत आड़े आ गई थी। जिला अस्पताल में वेंटिलेटर को चलाने के लिए स्टाफ तक नहीं था। बाद में स्टाफ तैनात कर उन्हें वेंटिलेटर चलाने का प्रशिक्षण दिया गया। अब कोरोना की संभावित लहर से लड़ने की तैयारी की जा रही है, लेकिन स्टाफ की कमी फिर से इन तैयारियों के आड़े आती हुई दिख रही है। कोरोना की दूसरी लहर के समय जिला अस्पताल में 12 नर्सें रखी गई थीं। इन नर्स को वेंटिलेटर चलाने का भी प्रशिक्षण दिया जा चुका है। अब इनका सेवाकाल दिसंबर में समाप्त हो रहा है। विभाग इन नर्स में से छह को सामान्य मरीजों और छह को कोविड एल-टू वार्ड में शिफ्ट करने की योजना बना रहा था। ऐसे में फिर से स्टाफ की कमी जिला अस्पताल प्रशासन के लिए परेशानी का सबब बन सकती है। जिला अस्पताल में पहले से ही चिकित्सकों व अन्य स्टाफ का टोटा है।
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नहीं मांगा गया प्रस्ताव
एनएचएम प्रभारी डॉ.पीके गुप्ता के अनुसार जिला अस्पताल में रखीं गईं स्टाफ नर्स की सेवाकाल बढ़ाने के लिए शासन से प्रस्ताव अभी नहीं मांगा गया है। प्रस्ताव मांगने पर स्टाफ नर्स की सेवा अवधि बढ़ाने की कार्यवाही की जाएगी।
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