यूपी के दर्जनों गांवों का दर्द: हर साल का यही हाल, जान जोखिम में डालकर नदी पार कर रहे लोग, पढ़ें पूरी रिपोर्ट
हर साल दर्जनों गांवों को यह दर्द झेलना पड़ता है। लोगों को जान जोखिम में डालकर नदी को पार करना पड़ता है। जानिए कैसा है यूपी के इस जिले का हाल।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बिजनौर में हर साल बरसात में मालन नदी की तेज धार दर्जनों गांव की उम्मीदों के पुल को बहाकर ले जाती है। मालन के शांत होने पर फिर से चंदा इकट्ठा कर अस्थाई पुल तैयार करते हैं। साल दर साल यही कहानी चली आ रही है। वहीं 25 दिन पहले भी गांव वालों ने सहयोग कर अस्थाई पुल बनाया जो टूट चुका है। फिलहाल मालन में तेज बहाव चल रहा है, ऐसे में भी ग्रामीण जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर हैं। इसके अलावा इनके पास कोई दूसरा रास्ता भी नहीं है।
नांगलसोती क्षेत्र के पूंडरीकलां-बरमपुर संपर्क मार्ग से पूंडरी खुर्द, बरकातपुर, सबलपुर बीतरा, रायपुर, ताहरपुर, बूढ़पुर, पाडली, नयागांव, भोजपुर, खेड़ी, सीकरी, लच्छीरामपुर, शाहपुर आदि गांवों से बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही होती है। ग्रामीण पूर्व प्रधान सुबोध राजपूत, मगनेश, हिमांशु, रोहिताश, सागर सिंह, दुष्यंत, अरुण कुमार का कहना है कि पिछले पेराई सत्र में बरकातपुर शुगर मिल के सहयोग से ग्रामीणों ने चंदा एकत्रित कर आवाजाही के लिए मालन नदी पर अस्थायी पुल बनाया था, जो दो जुुलाई को नदी के तेज बहाव में बह गया। नदी पर पुल नहीं होने और बरसात में नदी का जलस्तर बढ़ने पर मार्ग पर आवागमन ठप हो जाता है।
वहीं ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर नदी के चार फीट पानी से होकर गुजरना पड़ता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मालन नदी पर पुल बनाने की मांग की है। पूंडरीकलां निवासी राजेंद्र सिंह ने बताया कि मालन नदी को पार करना जोखिम भरा है, लेकिन पशुओं के चारे के लिए ग्रामीणों को नदी पार जाना पड़ता है।
हर साल चंदा एकत्रित कर अस्थायी पुल बनाते हैं ग्रामीण
गांव पूंडरीकलां और आसपास के गांव के किसान गन्ना ढुलाई के लिए प्रत्येक वर्ष बरसात के बाद चंदा एकत्रित कर मालन नदी पर अस्थायी पुल बनाते हैं। बरसात में मालन नदी का जलस्तर बढ़ने से अस्थायी पुल बह जाता है और पूंडरीकलां-बरमपुर मार्ग पर आवागमन ठप हो जाता है। पूर्व प्रधान सुबोध राजपूत ने बताया कि दो जुलाई को पुल के बहने के बाद क्षेत्रीय किसानों ने अस्थायी पुल निर्माण के लिए चंदा एकत्रित करना शुरू कर दिया है। क्षेत्र के किसानों से उनकी इच्छानुसार चंदा लिया जाता है।
यह भी पढ़ें: भारत की दिलचस्प कहानी: 75 साल पुराना तिरंगा देख आंखों में आ गए आंसू, हस्तिनापुर के परिवार को आप भी करेंगे सलाम
ग्रामीणों की सुविधा के लिए पूंडरीकलां-बरमपुर संपर्क मार्ग पर पुल बनवाना अति आवश्यक है। - सुबोध राजपूत, पूर्व प्रधान पूंडरीकलां