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यूपी के दर्जनों गांवों का दर्द: हर साल का यही हाल, जान जोखिम में डालकर नदी पार कर रहे लोग, पढ़ें पूरी रिपोर्ट

Thu, 28 Jul 2022 05:43 PM IST
मेरठ ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, बिजनौर
अमर उजाला ब्यूरो, बिजनौर Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Thu, 28 Jul 2022 05:43 PM IST
सार

हर साल दर्जनों गांवों को यह दर्द झेलना पड़ता है। लोगों को जान जोखिम में डालकर नदी को पार करना पड़ता है। जानिए कैसा है यूपी के इस जिले का हाल।

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Vehicles landing in Malan river and life in danger
बिजनौर में जान जोखिम में डालकर नदी पार कर रहे लोग। - फोटो : amar ujala

विस्तार

बिजनौर में हर साल बरसात में मालन नदी की तेज धार दर्जनों गांव की उम्मीदों के पुल को बहाकर ले जाती है। मालन के शांत होने पर फिर से चंदा इकट्ठा कर अस्थाई पुल तैयार करते हैं। साल दर साल यही कहानी चली आ रही है। वहीं 25 दिन पहले भी गांव वालों ने सहयोग कर अस्थाई पुल बनाया जो टूट चुका है। फिलहाल मालन में तेज बहाव चल रहा है, ऐसे में भी ग्रामीण जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर हैं। इसके अलावा इनके पास कोई दूसरा रास्ता भी नहीं है।

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नांगलसोती क्षेत्र के पूंडरीकलां-बरमपुर संपर्क मार्ग से पूंडरी खुर्द, बरकातपुर, सबलपुर बीतरा, रायपुर, ताहरपुर, बूढ़पुर, पाडली, नयागांव, भोजपुर, खेड़ी, सीकरी, लच्छीरामपुर, शाहपुर आदि गांवों से बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही होती है। ग्रामीण पूर्व प्रधान सुबोध राजपूत, मगनेश, हिमांशु, रोहिताश, सागर सिंह, दुष्यंत, अरुण कुमार का कहना है कि पिछले पेराई सत्र में बरकातपुर शुगर मिल के सहयोग से ग्रामीणों ने चंदा एकत्रित कर आवाजाही के लिए मालन नदी पर अस्थायी पुल बनाया था, जो दो जुुलाई को नदी के तेज बहाव में बह गया। नदी पर पुल नहीं होने और बरसात में नदी का जलस्तर बढ़ने पर मार्ग पर आवागमन ठप हो जाता है।
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वहीं ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर नदी के चार फीट पानी से होकर गुजरना पड़ता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मालन नदी पर पुल बनाने की मांग की है। पूंडरीकलां निवासी राजेंद्र सिंह ने बताया कि मालन नदी को पार करना जोखिम भरा है, लेकिन पशुओं के चारे के लिए ग्रामीणों को नदी पार जाना पड़ता है।

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हर साल चंदा एकत्रित कर अस्थायी पुल बनाते हैं ग्रामीण
गांव पूंडरीकलां और आसपास के गांव के किसान गन्ना ढुलाई के लिए प्रत्येक वर्ष बरसात के बाद चंदा एकत्रित कर मालन नदी पर अस्थायी पुल बनाते हैं। बरसात में मालन नदी का जलस्तर बढ़ने से अस्थायी पुल बह जाता है और पूंडरीकलां-बरमपुर मार्ग पर आवागमन ठप हो जाता है। पूर्व प्रधान सुबोध राजपूत ने बताया कि दो जुलाई को पुल के बहने के बाद क्षेत्रीय किसानों ने अस्थायी पुल निर्माण के लिए चंदा एकत्रित करना शुरू कर दिया है। क्षेत्र के किसानों से उनकी इच्छानुसार चंदा लिया जाता है।

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ग्रामीणों की सुविधा के लिए पूंडरीकलां-बरमपुर संपर्क मार्ग पर पुल बनवाना अति आवश्यक है। - सुबोध राजपूत, पूर्व प्रधान पूंडरीकलां

 

 

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