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भारत की दिलचस्प कहानी: 75 साल पुराना तिरंगा देख आंखों में आ गए आंसू, हस्तिनापुर के परिवार को आप भी करेंगे सलाम

Thu, 28 Jul 2022 08:56 AM IST
कपिल kapil रविंद्र चौहान, संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
रविंद्र चौहान, संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Thu, 28 Jul 2022 08:56 AM IST
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People were surprised when the 75 year old tricolor was displayed in Pune at the Amrit Festival of Independenc
तिरंगा। - फोटो : amar ujala

खादी के जिस तिरंगे को नवंबर 1946 में पंडित जवाहर लाल नेहरू ने मेरठ के विक्टोरिया पार्क में फहराया था, उसे 75 साल बाद पुणे में आयोजित अमृत महोत्सव में पहली बार सार्वजनिक किया गया है। तिरंगे को देखने के लिए पहुंचे हजारों लोग उत्साहित हो गए। वहीं 75 साल पुराना तिरंगा देख लोगों की आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने यही कहा कि हस्तिनापुर के नागर परिवार का शुक्रिया, जिन्होंने इस धरोहर को अब तक संजोकर रखा है।



आजादी से पहले मेरठ में 23 से 26 नवंबर 1946 तक कांग्रेस का अधिवेशन हुआ। तब पंडित जवाहर लाल नेहरू ने यह तिरंगा यहां विक्टोरिया पार्क में फहराया था। नौ गुणा 14 फीट के इस झंडे में चरखे की छवि है। पंडित नेहरू ने इसकी हिफाजत की जिम्मेदारी हस्तिनापुर के कर्नल गणपत राम नागर को सौंपी थी। इसके बाद से ही ये झंडा नागर परिवार ने संभालकर रखा हुआ है।

People were surprised when the 75 year old tricolor was displayed in Pune at the Amrit Festival of Independenc
आजादी का अमृत महोत्सव के तहत पुणे में आयोजित कार्यक्रम। - फोटो : amar ujala

नेताजी सुभाष चंद बोस की 125वीं जयंती, आजादी के अमृत महोत्सव, 1971 के भारत-पाक युद्ध के 50 वर्ष पूरे होने और कारगिल विजय दिवस के उपलक्ष्य में 24 से 26 जुलाई तक महाराष्ट्र के पुणे के पिंपरी चिंचवाड़ कॉलेज में इस तिरंगे का सार्वजनिक प्रदर्शन किया गया है। गणपत राम नागर के पौत्र देव नागर ने बताया कि हस्तिनापुर से बाहर पुणे में इस झंडे का सार्वजनिक प्रदर्शन पहली बार किया गया। इसी ध्वज को मामूली बदलाव के साथ राष्ट्रीय ध्वज स्वीकार किया गया था। इसमें चरखे की जगह चक्र ने ले ली है। देव नागर बुधवार को तिरंगा लेकर पुणे से देहरादून पहुंच गए।

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तिरंगा। - फोटो : amar ujala

नेहरू ने गणपत राम को सौंपा था ध्वज
मूल रूप से मेरठ के केसरगंज निवासी कर्नल गणपत राम नागर का जन्म 16 अगस्त 1905 को पंडित विष्णु नागर के घर हुआ था। मेरठ कॉलेज मेरठ से पढ़ाई के दौरान वह विदेश चले गए। सन 1929 में वहां ब्रिटिश आर्मी में किंग अफसर के पद पर नियुक्त हुए। 1939 में सिंगापुर के पतन के बाद आजाद हिंद फौज में भर्ती हो गए। सुभाष चंद्र बोस के काफी नजदीक होने पर उन्हें मेजर जनरल के पद से नवाजा गया। वे मलाया की थर्ड डिविजन के कमांडर रहे।

 

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फाइल फोटो। - फोटो : amar ujala

पुरखों की विरासत है ये झंडा: गुरु नागर
गणपत राम के पौत्र गुरु नागर हस्तिनापुर की डिफेंस कॉलोनी में रहते हैं। गुरु के जुड़वां भाई देव देहरादून के चाणक्य पब्लिक स्कूल में डायरेक्टर हैं। वही इस ऐतिहासिक तिरंगे को लेकर पुणे गए थे। गुरु नागर बताते हैं कि उनकी उम्र नौ-दस साल की होगी तब दादा जी ने ध्वज के बारे में जानकारी दी थी। बताया था कि यह झंडा पंडित नेहरू ने फहराया था, इसे हमेशा संभालकर रखना। गुरु नागर बताते हैं कि उनके पिता सूरज नाथ नागर कुमायूं रेजीमेंट में 1950 से 1975 तक कर्नल के पद पर रहे। पहले उन्होंने झंडे की देखभाल की। उनके बाद अब वह और उनकी पत्नी अंजू इसकी देखभाल करते हैं।

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मेजर गणपत राम नागर - फोटो : amar ujala

गुरु नागर बताते हैं कि तिरंगे को पॉलीथिन में रखते हैं। समय-समय पर धूप में रखते हैं। कई बार इस झंडे को लेने के लिए राजनीतिक दलों के लोग आए लेकिन हमने उनसे कह दिया कि ये हमारे पुरखों की विरासत है, हम इसे सहेजकर रखेंगे।

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