{"_id":"5ec808098ebc3e905a08ea8f","slug":"vat-savitri-fast-kept-for-husband-s-longevity-bijnor-news-mrt482943324","type":"story","status":"publish","title_hn":"पति की दीर्घायु के लिए रखा वट सावित्री व्रत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पति की दीर्घायु के लिए रखा वट सावित्री व्रत
विज्ञापन
पति की दीर्घायु के लिए रखा वट सावित्री व्रत
बिजनौर। सुहागिनों ने वट सावित्री पर्व पर अपने पति की दीर्घायु के लिए उपवास किए। इस अवसर पर सुहागिनों ने बायना निकालकर बुजुर्गों के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लिया। इस दौरान सुहागिनों ने सावित्री-सत्यवान की पुण्य कथा का श्रवण किया।
प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को वट सावित्री पर्व मनाया जाता है। इस दिन सौभाग्यवती स्त्रियां पति की लंबी आयु एवं सभी प्रकार की सुख समृद्धियों की कामना करती हैं। इस दिन स्त्रियां व्रत रखकर रोली और अक्षत चढ़ाकर वट वृक्ष पर कलावा बांधती हैं तथा उसकी परिक्रमा करती हैं। शुक्रवार को जिले में वट सावित्री पर्व सादगी से मनाया गया। सुबह सवेरे उठकर महिलाओं ने स्नान आदि से निवृत्त होकर पूजा-अर्चना की। इस दौरान महिलाओं ने अपने घरों में पकवान बनाए। इसके बाद महिलाओं ने बायना निकालकर अपने बुजुर्गों को दिया और चरण स्पर्श कर उनसे अखंड सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद लिया। इससे पूर्व सुहागिनों ने सावित्री-सत्यवान की पुण्य कथा का श्रवण किया। इसके उपरांत सुहागिनों ने अपने व्रतों का परायण किया।
विज्ञापन
बिजनौर। सुहागिनों ने वट सावित्री पर्व पर अपने पति की दीर्घायु के लिए उपवास किए। इस अवसर पर सुहागिनों ने बायना निकालकर बुजुर्गों के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लिया। इस दौरान सुहागिनों ने सावित्री-सत्यवान की पुण्य कथा का श्रवण किया।
प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को वट सावित्री पर्व मनाया जाता है। इस दिन सौभाग्यवती स्त्रियां पति की लंबी आयु एवं सभी प्रकार की सुख समृद्धियों की कामना करती हैं। इस दिन स्त्रियां व्रत रखकर रोली और अक्षत चढ़ाकर वट वृक्ष पर कलावा बांधती हैं तथा उसकी परिक्रमा करती हैं। शुक्रवार को जिले में वट सावित्री पर्व सादगी से मनाया गया। सुबह सवेरे उठकर महिलाओं ने स्नान आदि से निवृत्त होकर पूजा-अर्चना की। इस दौरान महिलाओं ने अपने घरों में पकवान बनाए। इसके बाद महिलाओं ने बायना निकालकर अपने बुजुर्गों को दिया और चरण स्पर्श कर उनसे अखंड सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद लिया। इससे पूर्व सुहागिनों ने सावित्री-सत्यवान की पुण्य कथा का श्रवण किया। इसके उपरांत सुहागिनों ने अपने व्रतों का परायण किया।
विज्ञापन